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*एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन से हार्ट अटैक का खतरा:* ब्रिटिश कंपनी ने कोर्ट में माना; भारत में इसी फॉर्मूले से बनी कोवीशील्ड के 175 करोड़ डोज लगे
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❤️🔥 भारत में बनी कोवीशील्ड वैक्सीन
⭐ ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) द्वारा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) के साथ मिलकर बनाई गई थी।
भारत में इसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) द्वारा '
कोविशील्ड' (Covishield) नाम से बेचा गया सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मालिक आदर पूनावाला ने हजारों करोड़ रुपए का चंदा राजनैतिक पार्टियों को दिया सभी पार्टियों को सत्तारूढ़ दलों को ज्यादा और दूसरी पार्टियों को कम और हर राज्य के सत्तारूढ़ दल को अलग से चंदा दिया ताकि राज्य सरकारे ज्यादा ज्यादा वैक्सीन लगाने का टारगेट पूरा कर सकें,
,❓🌻 आप कहेंगे हमें क्या हमें तो फ्री में लगी है वैक्सीन
अरे श्रीमान जी आपकों फ्री में नहीं आपकी वैक्सीन का दाम सरकार ने आमजन की ख़ून पसीने की गाढ़ी कमाई जो करो के रूप में राजकोष में जमा होती है उसी में से आदर पूनावाला को प्रति वायल के २५००-३००० रुपये का भुगतान किया एक वायल में ८-१० डोज होती है,
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अब मैं आपकों बताता हूं कि इसमें कौनसा वायरस को लिया गया
इस वैक्सीन में चिंपाजी बंदरों में पाये जाने वाले वायरस कों लिया गया है जिसका नाम ChAdOx1 (Chimpanzee Adenovirus Oxfo)
यह वायरस कोरोना जैसे स्पाइक प्रोटीन बनाता है
और इसमें बीमारी फैलाने वाला जीन्स E1 भी होता है,
कंपनी ने दावा किया गया की प्रोसेसिंग द्वारा E1 को हटा दिया गया है
पर विज्ञान में अभी तक ऐसा संभव नहीं है की डीएनए में से पूर्ण रुप से जीन्स को हटा दिया जाये,
हां उसका विकास किया जा सकता कुछ परिवर्तन किये जा सकतें हैं कुछ समय के लिए जींस को सुषुप्त किया जा सकता है पर पूर्णतया हटाना संभव नहीं है।
तो इस E1 जींस और चिंपांजी के वायरस द्वारा स्पाइक प्रोटीन बनाने के कारण हमारे शरीर में वैक्सीन के कारण बहुत सी बीमारियों ने घर कर लिया है,
यह E1और स्पाइक प्रोटीन और चिंपांजी का वायरस ChAdOx1 हमारे को किस प्रकार प्रभावित करता है कल की पोस्ट में विस्तार से बताऊंगा, ❤️⭐🙏🌄