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भगवान बिरसा मुंडा जी ने स्वधर्म, स्वसंस्कृति की रक्षा, प्रकृति संरक्षण, एकजुटता और राष्ट्रप्रेम के जो संस्कार जनजातीय समाज में स्थापित किए, उन्हीं पदचिह्नों पर चलते हुए आज आदिवासी समाज विश्व के समक्ष जीवन जीने का सस्टेनेबल मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।
आज दिल्ली में आयोजित ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ में लाखों की संख्या में उपस्थित आदिवासी बहनों-भाइयों को नमन।



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