𝐊𝐌 𝐏ɽ𝐢𝐘ɑɳʞɑ

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@Priy2007

तुम मुहब्बत में ज़िंदगी चाहते हो मैं ज़िंदगी में मुहब्बत चाहती हूं।

Pratapgarh Katılım Temmuz 2022
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हम से यहाँ तो कुछ भी समेटा न जा सका, हम से हर एक चीज़ बिखरती चली गई। ~अमीर इमाम
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देवानंप्रिय
वाकई ये अनिश्चितताओं से भरी जिंदगी भी कभी कभी हमें बेमौसम बारिश की तरह सरप्राइज़ देती हैं !
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काव्य कुटीर
दिन रोशनी का पक्षधर है, और रात ईमानदारी की...! - सूर्यभान 'सूरी' 🌷 शुभरात्रि
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शब्द शक्ति 😊
जिन्दगी मे कोई साथ दे या ना दे खुद ही आगे बढ़ते रहो , क्योकि खुद से बड़ा कोई हमसफ़र नही होता ...!!
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उसके स्त्रीत्व की परिभाषा?अगर नहीं! तो फिर जानते क्या हो तुम रसोई और बिस्तर के गणित से परे एक स्त्री के बारे में...? -निर्मला पुतुल🌻
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पढ़ा है कभी उसकी चुप्पी की दहलीज़ पर बैठ शब्दों की प्रतीक्षा में उसके चेहरे को? उसके अंदर वंशबीज बाते क्या तुमने कभी महसूसा है उसकी फैलती जड़ों को अपने भीतर? क्या तुम जानते हो एक स्त्री के समस्त रिश्ते का व्याकरण? बता सकते हो तुम एक स्त्री को स्त्री-दृष्टि से देखते
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क्या तुम जानते हो पुरुष से भिन्न एक स्त्री का एकांत? घर, प्रेम और जाति से अलग एक स्त्री को उसकी अपनी ज़मीन के बारे में बता सकते हो तुम? बता सकते हो सदियों से अपना घर तलाशती एक बेचैन स्त्री को उसके घर का पता? क्या तुम जानते हो अपनी कल्पना में...
Bimla Verma 🦋@BimlaVerma6

(कुछ स्त्रियां आज भी झेल‌ रहीं हैं औरत होने का अभिशाप... कृपया अन्यथा न लें कवयित्री के मन के उद्गार को पढ़कर... ✍🏼) (अस्तित्व) क्या मेरा खुद का कोई अस्तित्व नहीं? पत्नी बनकर घर की जिम्मेदारी उठाती हूँ, माँ बनकर औलाद की जिंदगी बनाती हूँ। सबका तिरस्कार सहकर भी रिश्तों को प्यार से सजाती हूँ। बेटी बनकर बाप की दहलीज़ की पगड़ी का सदा मान रखती हूँ। मायके के दिए संस्कारों पर खरी उतरती हूँ। नौ दिन पूजते हो दुर्गा, सीता, सरस्वती बनाकर मुझे, फिर रखते हो पांव की जूती बनाकर मुझे। रहना चाहती हूँ बस तुम्हारे बराबर ही होकर मैं, तुम से आगे निकलकर बोलो कहाँ जाऊंगी मैं! फिर भी सब भूलकर तुम पर प्यार ही बरसाती हूँ, हर रिश्ते को प्यार से सजाती हूँ। 🦋 ~ निधि 'मानसिंह' @nidhisinghiitr #छोटा_दरवाज़ा #नवरात्रि_स्पेशल_कविता

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Professor X
Professor X@Rahul_Rahi_·
ये मिलना बिछड़ना तो केवल प्रकिया है, ये हृदय अब मृत्यु तक तुम्हारे ही अधीन रहेगा । ....... Credit - Social Media/Ig
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@sharma_k_deepak न जाने हार है या जीत क्या है ग़मों पर मुस्कुराना आ गया है ~ सय्यद एहतिशाम हुसैन
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Deepak Sharma
Deepak Sharma@sharma_k_deepak·
@Priy2007 महफ़िल में लोग चौंक पड़े मेरे नाम पर तुम मुस्कुरा दिए मिरी क़ीमत यही तो है सय्यद हाशिम रज़ा
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खिलना गुलाब का नहीं हरगिज़ कोई दलील हम मुस्कुरा रहे हैं तो समझो बहार है...🤍:)
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@sharma_k_deepak हर नए हादसे पे हैरानी पहले होती थी अब नहीं होती - बाक़ी सिद्दीक़ी
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Deepak Sharma
Deepak Sharma@sharma_k_deepak·
@Priy2007 हादसा कौन सा हुआ पहले रात आई कि दिन ढला पहले ऐन इरफ़ान
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Deepak Sharma
Deepak Sharma@sharma_k_deepak·
रोके से कहीं हादसा-ए-वक़्त रुका है शोलों से बचा शहर तो शबनम से जला है अली अहमद जलीली
𝐊𝐌 𝐏ɽ𝐢𝐘ɑɳʞɑ@Priy2007

शाम-ए-ग़म करवट बदलता ही नहीं वक़्त भी ख़ुद्दार है तेरे बग़ैर..!! - शकील बदायूंनी

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@sharma_k_deepak मैं ने क़ुबूल कर लिया चुप चाप वो गुलाब जो शाख़ दे रही थी तिरी ओर से मुझे — चराग़ शर्मा
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Deepak Sharma
Deepak Sharma@sharma_k_deepak·
मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूँ वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता अफ़ज़ल इलाहाबादी
𝐊𝐌 𝐏ɽ𝐢𝐘ɑɳʞɑ@Priy2007

ज़र्द मौसम ने दरख़्तों की ज़बाँ सिल दी थी फिर कोई फूल हँसा और ख़िज़ाँ हार गई। ~ अहमद सग़ीर

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𝐊𝐌 𝐏ɽ𝐢𝐘ɑɳʞɑ
अज़ाब होती हैं अक्सर शबाब की घड़ियाँ गुलाब अपनी ही ख़ुश्बू से डरने लगते है - बद्र वास्ती
Deepak Sharma@sharma_k_deepak

भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है अहमद फ़राज़

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आपसे मिल के हम कुछ बदल से गए ....🎶❤️
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Er. Avinash Yadav (A2Y)
Er. Avinash Yadav (A2Y)@AvinashYadavSP4·
ये दुनिया, हर रिश्ते को तर्क से तौलना भी बताएगी समझदार बनाकर सब त्यागना भी सिखाएगी... पर तुम, ना-समझ ही बने रहना , वही अच्छा है, वरना जी नहीं पाओगे.....!! Good evening #altın #trtsporstüdyosu #Nothing4aSeries
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आठ साल की छुटकी अपने से दस साल बड़े अपने भाई के साथ बराबरी से झगड़ रही है छीना-झपटी खींचा-खाँची नोचा-नाची यहाँ तक की मारा-पीटी भी उसकी माँ नाराज़ है इस नकचढ़ी छुटकी से बराबरी से जो लड़ती है अपने भाई के साथ वह मुझसे भी नाराज़ है सर चढ़ा रखा है मैंने उसे.....
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