BOY
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शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की मांगों को सुनने के बजाय उन्हें हिरासत में लेना गलत संदेश देता है। लोकतंत्र तभी सबसे मजबूत होता है जब असहमति को सुना जाए, न कि दबाया जाए।
यदि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात कहने वालों को हिरासत में लिया जा रहा है, तो यह पूछना उचित है: क्या हम लोकतंत्र की रक्षा कर रहे हैं, या असहमति से असहज हो रहे हैं?
लोकतंत्र को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से डरना नहीं चाहिए। आप सोनम वांगचुक से सहमत हों या न हों, शांतिपूर्ण तरीके से अपनी चिंताओं को उठाने के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।#सोनमवांगचुक

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"प्रगति का सबसे बड़ा अवरोध कोई दूसरी राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि अंधभक्ति है। हर किसी पर सवाल उठाओ। किसी की पूजा मत करो।
"अगर राजनेताओं का मूल्यांकन उनके भाषणों के बजाय उनके वादों को पूरा करने के आधार पर किया जाए, तो राजनीति बिल्कुल अलग दिखेगा।
लोकतंत्र इसलिए विफल नहीं होता क्योंकि लोग असहमत होते हैं। यह तब विफल होता है जब लोग सवाल पूछना बंद कर देते हैं।

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#दिल्लीपुलिस को आदेश दिया गया है कि,
#जंतरमंतर पर चल रहे आंदोलन को ,
बंद करा के और उनको वहां से हटाया जाए।
20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे #sonamwangchuk से बात करना चाहिए सरकार को ।
इसका मतलब यह है कि सरकार चाहती है कि
पेपर लीक,
स्टूडेंट्स की suicide होती रहे।

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@bullet_bhaiya_ If everyone gets such things,🤩
the expression on their face is beyond comparison.🔥
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