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ll जय हिंद ।। ll You will get what you sow ll
🇮🇳 Nadaun,Himachal Pradesh Katılım Ocak 2022
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|| श्रीहरि: ||. #engineer
परम श्रद्धेय सेठजी श्रीजयदयालजी गोयन्दका
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वैराग्य का प्रभाव
( पोस्ट 1 )
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किसी भी मार्ग में चलो, वैराग्य ही सबसे बढ़कर मालूम देता है | राग का, आसक्ति का अभाव बहुत मूल्यवान है | किसी प्रकार भी आसक्ति का अभाव हो जाय तो बहुत ठीक हो | यहाँ तो स्थान ऐसा ऐसा ही है, इसका प्रभाव पड़ता है | जो चाहे उसे उसे वैराग्य मिलता है | यहाँ जो इच्छा करे उसे स्वाभाविक वैराग्य होता है | जो चाहे ही नहीं उसे कैसे मिले | चाहने वाले के लिये उपयुक्त स्थान है | कंचन, कामिनी, मान बड़ाई, शरीर – ये विशेष आसक्ति के स्थान हैं |
इन सब पदार्थों का तत्व समझकर यानी विवेकपूर्वक वैराग्य हो, वह मूल्यवान है | संसार के पदार्थ क्षणभंगुर हैं | उनका राग हमारे लिये घातक है | क्षणिक वैराग्य तो होता ही रहता है | न होने की अपेक्षा तो वह भी अच्छा है | वैराग्यवान पुरुषों की स्मृति से भी वैराग्य होता है |
वैराग्य होने से ध्यान में प्रत्यक्ष आनन्द, शान्ति मिलती है | जल्दी ही उस साधन से परमात्मा की प्राप्ति होती है | संसार के सारे पदार्थ क्षणभंगुर नाशवान हैं | यह समझकर ऐसा भाव हो, फिर वैराग्य हो, उसके बाद उपरति होकर ध्यान हो, उसमे शान्ति आनन्द है | ध्यान चाहे निराकार हो, चाहे साकार का वैसी ही प्राप्ति होती है | जब साधनों का राजा ध्यान है | ध्यान का फल परमात्मा की प्राप्ति है | योग में ध्यान का फल समाधि, वेदान्त में परब्रह्म परमात्मा की प्राप्ति बताया है | सगुण के ध्यान से साकार भगवान् की प्राप्ति बतायी है |
यह बात देखी गयी है कि जो विरक्त पुरुष हैं, जिनके विवेक वैराग्यपूर्वक उपरति है, उनका दर्शन करने से बड़ा वैराग्य हुआ | इससे मालूम देता है कि उन पुरुषों का स्मरण, दर्शन प्रत्यक्ष में लाभदायक है |
गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित पुस्तक “सम्पूर्ण दु:खों का अभाव कैसे हो ?” १५२९ से |

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🌳 संसार में दो प्रकार के पेड़ पौधे होते हैं
🌳प्रथम: अपना फल स्वयं दे देते हैं,
🍎जैसे:- सेब, आम, अमरुद, केला इत्यादि.
🌿द्वितीय : अपना फल छिपाकर रखते हैं,
🥔जैसे:- आलू, अदरक, प्याज इत्यादि.
🍑जो फल अपने आप दे देते हैं, उन वृक्षों को सभी खाद-पानी देकर सुरक्षित रखते हैं, और ऐसे वृक्ष फिर से फल देने के लिए तैयार हो जाते हैं.
🥕किन्तु जो अपना फल छिपाकर रखते है, वे जड़ सहित खोद लिए जाते हैं, उनका वजूद ही खत्म हो जाता हैं.
☝️ठीक इसी प्रकार… जो व्यक्ति अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वयं ही समाज सेवा में समाज के उत्थान में लगा देते हैं, उनका सभी ध्यान रखते हैं और वे मान-सम्मान पाते है.
☝️वही दूसरी ओर… जो अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वार्थवश छिपाकर रखते हैं, किसी की सहायता से मुख मोड़े रखते है, वे जड़ सहित खोद लिए जाते है, अर्थात् समय रहते ही भुला दिये जाते है.
प्रकृति कितना महत्वपूर्ण संदेश देती है, बस समझने, सोचने और कार्य में परिणित करने की बात है..

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