राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय)

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@RSSRashtriya

#ध्येय – #राष्ट्र_हित_में_शिक्षा, #शिक्षा_हित_में_शिक्षक और #शिक्षक_हित_में_समाज। ८२, पटेल कालोनी, राजकीय छापेखाने के पास, सरदार पटेल मार्ग, जयपुर-३०२००१

जयपुर, भारतवर्ष Katılım Kasım 2020
165 Takip Edilen10K Takipçiler
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🚩 जय श्री राम 🚩 मर्यादा, सत्य और धर्म के प्रतीक प्रभु श्रीराम के पावन जन्मोत्सव #श्रीरामनवमी की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्री राम समस्त देशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सदाचार का संचार करें। सभी का जीवन धर्म, कर्तव्य और आदर्शों के मार्ग पर अग्रसर रहे। 🙏 जय श्री राम 🙏
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🚩 जय श्री राम 🚩 मर्यादा, सत्य और धर्म के प्रतीक प्रभु श्रीराम के पावन जन्मोत्सव #श्रीरामनवमी की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्री राम समस्त देशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सदाचार का संचार करें। सभी का जीवन धर्म, कर्तव्य और आदर्शों के मार्ग पर अग्रसर रहे। 🙏 जय श्री राम 🙏
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प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने संगठन के विभिन्न स्तरों से प्राप्त समस्याओं के बारे में प्रदेश स्तर पर संगठन द्वारा किये गये प्रयासों को विस्तार पूर्वक रखा। जिनमें प्रमुखतः निदेशालय स्तर से आगामी सत्र 2026-27 के लिए  शिक्षकों के ग्रीष्मावकाश की अवधि को वर्तमान 45 दिन से घटाकर 36 दिन करने के शासन स्तर पर विचाराधीन प्रस्ताव का अनुमोदन नहीं करने,माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अध्यापक पात्रता परीक्षा के संबंध में पुनर्विचार याचिका दायर कर राहत दिलाने,प्रदेश में कार्यरत संविदा शिक्षकों के शीघ्र स्थायीकरण करने,स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल और महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम राजकीय विद्यालयों में रिक्त पदों को भरने,स्टाफिंग पैटर्न शीघ्र करते हुए प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में सवा लाख से अधिक पदों को स्वीकृत करने और सेवारत शिक्षकों के इंटर्नशिप अवधि के वेतन वसूली नहीं करने के वित्त विभाग के प्रस्ताव का अनुमोदन कर हजारों शिक्षकों को राहत दिलाने की मांग की। सभी संवर्गो की पदोन्नतियां शीघ्र करते हुए तृतीय श्रेणी शिक्षकों के पदोन्नति के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय में सरकार की और शीघ्र निस्तारण के लिए एएजी लगाकर वर्षों से लंबित पदोन्नतियां पूरी करने,सभी संवर्गो के स्थानांतरण ग्रीष्मावकाश में ही करने, टी एस पी से नॉन टी एस पी में नियुक्त शिक्षकों को गृह जिले में लगाने, समसा के सभी पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने, मुख्यमंत्री जनसहभागिता योजना पर रोक हटाने और विद्यालयों को मिलने वाली समस्त ग्रांट राशि समय पर जारी करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री , शिक्षा सचिव, वित्त सचिव से मिलकर शीघ्र निस्तारण करवाने का आश्वासन दिया। तृतीय सत्र में राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, क्षेत्र प्रमुख उमराव लाल वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा का सानिध्य प्राप्त हुआ। सत्र में क्षेत्र प्रमुख उमराव लाल वर्मा ने चारित्रिक शुचिता के साथ आर्थिक शुचिता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने खंड,जिले, प्रदेश सभी स्तरों पर अध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष से अनुमोदन पश्चात सभी आय व्यय, वाउचर फाइल,केश बुक सभी को पूर्ण कर ऑडिट किया जाना अत्यंत आवश्यक है। किसी भी प्रकार से एकत्रित की गई राशि किसी व्यक्ति के पास न रखकर खाते में शीघ्र जमा करवानी चाहिए। किसी भी कार्यक्रम के पश्चात आय व्यय का सम्पूर्ण सामूहिक रूप से रखना चाहिए ताकि पूर्ण शुचिता बनी रहे। सत्र में राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर ने बताया कि हमे हमारे संगठन के ध्येय वाक्य राष्ट्र हित में शिक्षा, शिक्षा हित में शिक्षक, शिक्षक हित में समाज की त्रिवेणी के अनुरूप अपने संगठन की यात्रा को आगे लेकर जाना है। कार्यकर्ता ईमानदारी से निरंतर अपने दायित्वों और कार्यों का मूल्यांकन करते रहे और शिक्षा,राष्ट्र,विद्यार्थी हित में अपने प्रयत्नों की पराकाष्ठा करनी चाहिए। कार्यकर्ता की गति के साथ उसकी मति भी अच्छी होनी चाहिए। उन्होंने खंड स्तर पर प्रशिक्षण के बारे में स्थान,विषय,वक्ता,का चयन, व्यवस्थाओं का विभाजन, अपेक्षित कार्यकर्ताओं की सूची बनाना,सूचनाएं भेजना,आदि के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। कार्यक्रम के चतुर्थ सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य हनुमान सिंह राठौड़ ने संगठन की कार्य पद्धति एवं कार्यकर्ता प्रवास पर विस्तार से अपने विचार रखे। सम्पूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी बैठक के विभिन्न सत्रों का संचालन प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने किया। अंत में कल्याण मंत्र ,सहभोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। महेंद्र कुमार लखारा प्रदेश महामंत्री अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) (2/2)
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*अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान( विद्यालय शिक्षा) की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक जयपुर में सम्पन्न* *शिक्षक राष्ट्रहित, शिक्षाहित और विद्यार्थी हित में प्रयत्नों की पराकाष्ठा करें : महेंद्र कपूर* जयपुर। कल अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान विद्यालय शिक्षा की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक सरस्वती बालिका उच्च माध्यमिक विद्या मंदिर जवाहर नगर जयपुर में संपन्न हुई । प्रथम सत्र में मां सरस्वती एवं मां भारती के चित्रों पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के पश्चात सभी कार्यकर्ताओं का परिचय हुआ। सत्र में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री माननीय महेंद्र कपूर , क्षेत्र प्रमुख उमराव लाल वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष राजस्थान रमेश चंद्र पुष्करणा प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा का सानिध्य प्राप्त हुआ। प्रथम सत्र में प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने संगठन के स्वरूप एवं सदस्यता कार्यक्रम को विस्तार से रखा। उन्होंने बताया कि 1954 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक श्रद्धेय जयदेव जी पाठक द्वारा इस संगठन की स्थापना हुई और शिक्षा के क्षेत्र में यह शिक्षक संघ राष्ट्रीय के नाम से निरंतर कार्य कर रहा है। अब राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय 2026 से पूरे भारत में एक ही नाम अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के नाम से कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि संगठन की मुख्य रूप से आठ स्तर पर इकाइयां है, हमारी सबसे छोटी इकाई विद्यालय है, राजस्थान के 70000 में से 48000 विद्यालयों में सदस्यता कर पिछले सत्र में 2,70,175 सदस्य बनाएं जो अब तक का उच्चतम है । इस बार यह संख्या 3,25,000 के पार जाएगी। दूसरी इकाई 10192 संकुल हैं । प्रत्येक संकुल में तीन कार्यकर्ता कुल 30,576 कार्यकर्ता है। तीसरी इकाई खंड जिसमें 402 खंडों में कुल 12060 कार्यकर्ता, जिला स्तर पर 45 जिलों में 1395 कार्यकर्ता, विभाग स्तर पर 22 विभाग संगठन मंत्री ,संभाग स्तर पर 50 और प्रदेश स्तर पर 185 कार्यकर्ताओं की टीम है। राष्ट्रीय स्तर पर वर्तमान में संगठन के 13 लाख 60 हजार सदस्य हैं। 17 स्थान पर राजस्थान में संगठन के कार्यालय हैं। उन्होंने यूट्यूब पर सब्सक्राइबर बढ़ाने एवं ट्विटर पर अधिक सक्रियता की बात कही। उन्होंने बताया कि हमारा सदस्यता अभियान इस बार 15 अप्रैल से 25 अप्रैल कुल 10 दिन का होगा। खंड स्तर पर इसके लिए 31 मार्च, 3 अप्रैल, 5 अप्रैल को प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे एवं सदस्यता डायरी का वितरण होगा। 23 से 28 मार्च तक प्रधानाचार्य संवाद कार्यक्रम, 14 अप्रैल को समरसता दिवस, 26 अप्रैल को प्रकोष्ठों की कार्यशाला की जानकारी दी । उन्होंने संगठन के चार अनिवार्य अखिल भारतीय कार्यक्रमों वर्ष प्रतिपदा, गुरु वंदन, कर्तव्य बोध, जन जागरण की जानकारी दी। द्वितीय सत्र में प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा प्रदेश महिला उपाध्यक्ष सुषमा बिश्नोई का सानिध्य प्राप्त हुआ। (1/2)
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परम पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के जन्मदिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन । राष्ट्रभक्ति, संगठन और सनातन मूल्यों के प्रति समर्पित उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। विनम्र श्रद्धांजलि एवं जन्मदिवस पर सादर स्मरण। #हेडगेवार
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सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥ चैत्र नवरात्रि की सभी सनातनियों को हार्दिक शुभकामनाएं। मां दुर्गा की असीम कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे। यह पावन नवरात्रि आपके जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए। शुभ नवरात्रि! #चैत्रनवरात्रि
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बागौर में शक्तिपूजा के तीस हजार वर्ष पहले के प्रमाण मिलते हैं। सभ्यता का पर्याय, शक्ति का पर्याय और पितृ सत्ता का भी पर्याय मातृ पूजा ही है। विवाह से परिवार, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र बनता है लेकिन मातृ पूजन के बाद ही वैवाहिक मंगलकार्य शुरू होते हैं। कुल देवी, ग्राम देवी, अंचल देवी से लेकर भारत माता तक मातृ देवियों के आशीष, उनके द्वारा पोषित संतानों से मिल कर इस राष्ट्र का अभ्युदय हुआ है। ऋग्वेद के दशम मंडल के १० वें अध्याय के १२५ वें सूक्त की आठ ऋचाएं हैं जिन्हें देवी सूक्त कहा जाता है जिसकी द्रष्टा महर्षि ब्रह्मज्ञानिनी वाक् थीं। वाक् ने प्रकृति की सर्जना शक्ति के साथ तादात्म्य कर देवी सूक्त उसी का उद्घाटन किया। इस सूक्त के अनुसार देवी ही इस सम्पूर्ण जगत की अधिष्ठात्री हैं। पितृ व्यवस्था भी देवी के ही अधीन है। अहं सुवे पितरमस्य मूर्धन्मम मैं इस जगत के पितृरूप आकाश को सर्वाधिष्ठान स्वरूप परमात्मा के ऊपर उत्पन्न करती हूँ। देवी घोषित करती हैं कि 'मैं ही अखिल भुवन में व्याप्त हूँ। यह जगत मेरी ही अभिव्यक्ति है। देवी के व्यापक स्वरूप को लोक पचरा में उद्धरित करता है, देवी मोरे अँगना में आईं या जगतारन घर मे दियरा बार आई हों के माध्यम से लोक उनकी सहज उपलब्धि का बखान करता है। लोक परम्परा देवी से संवाद स्थापित करने की बात साक्षी है। यहां देवी घर आंगन में लगे नीम के पेड़ पर झूलना डाल कर झूलती हैं, निमिया के डरिया मईया नावेली झुलनवा होकि झूलई लागीं ना स्त्रियां माँ से अपनी सहज बातचीत करती हैं, बात बात में वे अपने घर परिवार की समृद्धि का आशीष बड़ी चतुराई से मांगती हैं, माँ उन्हें पूरा करने का वचन भी देती हैं। लोक और शास्त्र दोनों की परंपरा में शक्ति की सर्वोच्चता है। जब देवगण असुरों से हारने लगते हैं तो वे माँ दुर्गा का आह्वान करते हैं। आनंद मंगल और न्याय के विजय का एकमात्र केंद्र माँ हैं। माँ का हर रूप संतानों के लिए कल्याणकारी है। ममता इस ब्रह्मांड का आधार है। माता का आदर पाने के लिए त्रिदेव शिशु रूप में आते हैं किंतु जब जब मातृत्व का अपमान होता है, जगतजननी महाकाली बनकर पापियों का रक्तपान करती हैं। उनके मुंडों से अपना सिंगार करती हैं। माँ सर्वव्यापी हैं, बालक का रुदन चाहे वह चींटी के पैर रखने जितना तेज हो उसके कानों में पड़ ही जाती है। वह दौड़कर आती है अपने बच्चे को दुलारने। हम प्रायः माता के जागरण की बात करते हैं पर माता सोती कब है? सोए तो हम हैं, वास्तविक जागरण की आवश्यकता हमें हैं। मैं सोचता हूँ वह कितना अद्भुत क्षण होगा जब सुबह सुबह माँ आए और स्नेह से उठाए, दुलार कर उठाये, जागृत कर दे। जीवन चैतन्य और ज्योतिपुंज हो उठे। या देवी सर्वभूतेषु, मातृ रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। (चित्र: हड़प्पा में मिली महिषासुर मर्दिनी की मुहर) साभार @pawanmvijay जी।
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वर्ष 2083 का अभिनंदन चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर चुका है, नवीन संवत्सर की किरणें विश्व को आलोकित कर रही हैं। हम नूतन होने का क्या अभिप्राय लगाते हैं ? नवीन तन को धारण करना अथवा तन का नवीन होना ही नूतन है। तन को मात्र एक व्यक्ति तक सीमित करना उसके अर्थ की व्यापकता के साथ अन्याय है। तन का तात्पर्य सम्पूर्ण जड़ चेतन से है। तन से थकान, अप्रासंगिकता के जाले को हटा कर, समयांतराल के कारण स्वतः उत्पन्न होने वाली कलुषता को मांज कर परिष्कृत होना, नूतन हो जाना है। सनातन परम्परा में स्नान की महिमा इसी नवीनता की प्राप्ति के लिए है। नित्य नवीन होना ही प्रत्येक चराचर का धर्म है। चैत्र प्रतिपदा उसी धर्म के नित्य नवीन होने की अभिव्यक्ति है जिसे दुर्भाग्यवश ‘दिसम्बर’ की कांपती अंतिम अँधेरी आधी रात में खोजने का उपक्रम कुछ लोग करते हैं। चैत्र मास में प्रकृति स्नान कर नवीन हो उठती है। सद्यस्नाता के स्पर्श से अभिसिक्त नव वर्ष के कपाट खुल जाते हैं सृष्टि की सुंदरता और रस के सुमेल से नव प्रभाती गीत झरते हैं जिनमे जीवन संगीत का माधुर्य समाहित होता है । प्रकृति मधुमास के आलिंगन में बँध जाती है , फूलों पर तुहिन बिंदु मानो उसके कुंचित केशों पर ढलके जलावाशेष हों, तरुदलों का प्रत्येक पत्ता दुग्ध-स्नात सा लगता है , प्रेमिल भावनाओं के उपवन को स्पर्श करती प्रकृति के अधर प्रवाल से नवल स्वर प्रस्फुटित होते जाते हैं जिसे सुनने के लिए मनुष्य को उतना पवित्र और निर्दोष होना होता है। चैत्र नव वर्ष जड़ -चेतन सभी को भाव विह्वल कर देता है। हरी दूब से लेकर वन -पाखी के रागों से छलकती हुई मादकता सृष्टि को रागमय बना देता है और इन्ही नेह छोह के माध्यम से हर एक हृदय में महुए का रस घोल उसे सरस स्नेहिल एवं सौन्दर्ययुक्त मंगलकामनाओं का सौरभ भी प्रदान प्रदान करता है। मोजराए आम की सुरभि से अस्थिर हुए मरुताकाश के शिलापट पर उनरे मनहर चित्रों की शुभ्रता से जगत आड़ोलित हो उठता है। नव वर्ष अपने साथ रंग, छंद अन्न, रस, आशा और उल्लास लेकर आता है । पतझर के बाद चुरुंगुन से झांकते कोमल लालछिमे नये कल्ले धीमी किन्तु दृढ़ स्वर में अमृतपुत्र होने की घोषणा करते हैं। नव वर्ष का आगमन आम्रावलियों में मंजरियों, पुष्प भार से झुकी लता वृक्षादि, सुगंधियुक्त वायु, भ्रमर गुंजन, शस्य में अन्नप्रस्फुटन भांति-भांति के फूलों से लदे नयनाभिराम सुरभित वृक्ष लतादि, सरोवर कमल दक्षिण गंधवाही पवन प्रात: एवं सांध्य बेला को अतिशय मनोरम, सुवासित एवं स्फूर्तिदायक बनाते हैं। किंशुक, कचनार से सुरभित एवं मदहोश करने सुखद मलयानिल का बहना नव जीवन का संचार करता है । जीवन मानो गीता का जीवंत भाष्य प्रतीत होने लगता है। नव वर्ष आशा व सिद्धि का सुंदर संयोग, कल्पना और वास्तविकता का सुलभ समन्वय है। यह मर्त्य होने पर अमरता का जयघोष और अमंगल पर मंगल की विजय है।उदय और प्रारम्भ का रंग भगवा होता है, भगवे की लाली से अपने घर को आलोकित होते हुए देखिए। स्वागत करिये नूतन वर्ष का। समय की नाव 2083 वाले घाट पर आई है, सभी हिंदू मित्रों को अशेष मंगलकामनाएं। - @pawanmvijay जी।
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आप सभी को सनातन नव संवत्सर की मंगलमयी शुभकामनाएँ। यह पावन नववर्ष आपके जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और उत्तम स्वास्थ्य का संचार करे। आपके सभी कार्य सफल हों, परिवार में आनंद और सौहार्द बना रहे तथा आप निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहें। ईश्वर से प्रार्थना है कि यह नव संवत्सर आपके जीवन को नई ऊर्जा, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति से परिपूर्ण करे। नव वर्ष मंगलमय हो! 🚩 #नव_संवत्सर
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*नव वर्ष की पूर्व संध्या पर शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने शिक्षक सम्मान एवं स्नेह मिलन कार्यक्रम का किया आयोजन* *जीवन के सभी कार्य एवं कार्यक्रम हिंदू पंचांग के अनुसार संपन्न हो : पुष्करणा* जयपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) जयपुर द्वितीय, द्वारा नव संवत्सर 2083 की पूर्व संध्या पर स्वागत कार्यक्रम एवं स्नेह मिलन हवामहल उपशाखा में सायं 4.00 बजे से रा.बा.उ.मा. विद्यालय, गोविन्द नगर पूर्व, जयपुर (बलदेव मंदिर परिसर, जलमहल के सामने) संपन्न हुआ। कार्यक्रम मे श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी बालमुकुन्दाचार्य जी महाराज हाथौज धाम, जयपुर (विधायक हवामहल, जयपुर) का आशीर्वचन प्राप्त हुआ। भारतीय कैलेंडर विश्व की सबसे प्राचीन कालगणना है, जो लगभग दो अरब वर्ष पूर्व ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना के साथ प्रारंभ हुआ। भारत के कैलेण्डर को पंचांग नाम से जाना जाता है जो पूर्णतया खगोल पर आधारित एवं वैज्ञानिक काल गणना है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रमेश चन्द पुष्करणा प्रदेश अध्यक्ष, मुख्य वक्ता महेन्द्र कुमार लखारा प्रदेश महामंत्री ,अध्यक्षता राजेश कुमार वशिष्ठ ,वरिष्ठ उपाध्यक्षउपशाखा हवामहल के साथ श्री बसंत जिंदल ,अतिरिक्त प्रदेश महामंत्री, श्री जयराम जाट ,उपाध्यक्ष जयपुर संभाग, की गरिमामई उपस्थिति रही। प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने बताया हिन्दू परंपरा में जीवन के सभी कार्य एवं कार्यक्रम हमारे पंचांग के अनुसार ही होने चाहिए। जीवन से लेकर मरण तक एवं सभी शुभ अवसर मुहूर्त हों या वैवाहिक कार्यक्रम, जन्म दिवस, भारतीय पंचांग की तिथियों के अनुसार ही मनाए जाने चाहिए। प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदू नववर्ष भारतीय संस्कृति, परंपरा और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से एकजुट होकर सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि इसी दिन हमारे संविधान निर्मात्री समिति के सदस्य एवं समरसता के प्रतीक डॉ. भीमराव अंबेडकर,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक माननीय केशवराव बलिराम हेडगेवार जी का जन्मदिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। कार्यक्रम में अतिरिक्त प्रदेश महामंत्री बसंत जिंदल ने अबकी बार 3 लाख पार का नारा देकर सदस्यता अभियान में सक्रियता से जुट जाने के लिए कार्यकर्ताओं का आवाहन किया। कार्यक्रम में प्रदेश कार्यकारिणी से चंद्र प्रकाश शर्मा, नौरंग सहाय भारतीय,अर्जुन सिंह जाट, निधि छीपा, शकुंतला मौर्य,मेघराज शर्मा, श्री निवास शर्मा, देवेन्द्र शर्मा, धीरज गर्ग, ओम प्रकाश टेलर, जिला कार्यकारिणी से चौथमल कुमावत,रमेश चंद गुप्ता, जुगराज सिंह नाथावत,श्याम बहादुर,मदन मीणा,अजय शर्मा सहित जयपुर जिले के सभी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन उप शाखा हवा महल के मंत्री अभिनव त्यागी ने किया। अंत में सामूहिक राष्ट्रगान एवं सहभोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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Government of Rajasthan
Government of Rajasthan@RajGovOfficial·
शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने विधानसभा में, प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में पूर्ववर्ती सरकार द्वारा, बड़ी संख्या में विद्यालयों को महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) में रूपांतरित कर दिया गया था, लेकिन वहां शिक्षकों के पद सृजित नहीं किए गए है। वर्तमान सरकार ने इस स्थिति को सुधारते हुए, आवश्यकतानुसार पद सृजित किए और साक्षात्कार के माध्यम से, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। @madandilawar #आपणो_अग्रणी_राजस्थान
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सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, राजस्थान सरकार
महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति करेंगे  – शिक्षा मंत्री dipr.rajasthan.gov.in/press-release-…
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