


MahaRana ( Kavita)
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@Ra8657
self Realization and Visualization Awakening of Kundalini through Shaktipat Initiation by Gurudev Siyag SIDDHA YOGA For Spiritual Enlightenment .

















मंत्र जप बहुत शीघ्र फलित होता है। संत तुकाराम जी ने कहा है कि तुम्हारी जीभ पर भगवान का नाम हो, तो मुक्ति का आनंद तुम्हारे हाथ में है। परन्तु मंत्र समर्थ सदगुरू देव के श्री मुख से प्रदत्त होना चाहिए। तभी फलदायी होगा। हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने कहा है कि गुरु की आवाज़ में अलोकिक दिव्य शक्ति होती हैं। यह मंत्र हमे हमारी उलझनों से, हमारी परिकल्पनाओ से और निरंतर बदलते हमारे मन से, परे ले जाता है। जैसे जैसे मंत्र जपते हैं वह हमारे रोम रोम में व्यापत हो जाता है। मन दिव्य बन जाता है। भगवान का नाम जो अनगिनत सच्चे गुरुओ के जप से सिद्ध होता है वह संजीवनी मंत्र कहलाता है। ऐसे मंत्र के जप से हमारी अंतर चेतना में भूकम्प सा आ जाता है। हमारे अंदर जन्म जनमातंर कर्म संस्कार और विचारों का रिकार्ड होता है। जिसको मिटाना बहुत ही कठिन होता है जो निरंतर इस मानसिक जप से मिटने लगते हैं और उसके स्थान पर भगवान का नाम अमिट हो जाता है। यदि इस तरह प्रेम और सदभाव से मंत्र जप के कारण मानव उस मंत्र में लीन हो जाता है। मंत्र में ऐसी दिव्य क्षमता है । ऐसा कहा गया है कि मंत्र वह है जो मंत्र जप करने वाले की रक्षा करता है। मंत्र की शक्ति हमारी कल्पना से बाहर है। हम मंत्र का अर्थ समझ सकते हैं किन्तु उसमें निहित शक्ति क्या है यह नहीं जान सकते। मंत्र परमात्मा के सजीव प्राण हैं। अतः इसे आदर के साथ जपो । गुरुदेव अपने प्रवचन में कहते हैं कि इस आराधना में ईश्वर का नाम ही कुंजी है। इसे जितना जपोगे, उतना ही अधिक लाभ होगा । जय सदगुरु देव कोटि कोटि वंदन











