🚨ब्रेकिंग न्यूज़🚨 🚨हिंदी कमेंट्री पैनल में बड़ा बदलाव🚨
प्रशंसकों की नाराज़गी और सोशल मीडिया पर चल रहे विवादों को देखते हुए, जियो टीम कमेंट्री पैनल में बड़ा बदलाव करने की योजना बना रही है।
खबरों के मुताबिक, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और आकाश चोपड़ा को हटाया जा सकता है। उनकी जगह जतिन सप्रू, विवेक राजदान और सबा करीम को शामिल किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो कमेंट्री का पूरा माहौल बदल सकता है। [रेव्येज़ स्पोर्ट्स]
ये महाराष्ट्र पूर्व महिला अध्यक्ष रुपाली चाकणकर हैं।
इनका कहना है कि गलत वीडियो के संदर्भ में इन्हें प्रचारित किया जा रहा है।
ये गलत है, मैं ऐसे लोगों पर कार्यवाही करूंगी।
अशोक खरात के साथ मेरा केवल आध्यात्मिक संबंध था।
मैं उन्हें गुरु मानती थी।
वायरल वीडियो के सामने आने के बाद इन्होंने अपने पद से भी इस्तीफा दे दिया है।
ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
आरक्षणधारी साउथ अफ्रीका का जन्म सिर्फ सेमी फ़ाइनल और फाइनल खेलने के लिए हुआ है, ट्रॉफी जितने के लिए नहीं !
इन्हें अपने क्रिकेट का 'संविधान' बदलने की जरूरत है !
कैसे SC/ST Act ने जिंदगी बर्बाद कर दिया
आप मर्दों को बहुत कम रोते हुए देखे होंगे
पर यह सख्स फूटफूट कर रोने लगा
इनके परिवार को SC/ST Act लगाकर परेशान किया गया, इनके पास बेगुनाही का पूरा सबुत था पर किसी ने नहीं सुना
गुनाह सिर्फ इतना था कि ब्राह्मण हैं
💔 प्रेग्नेंट पत्नी ने पति की आधी जीभ काट डाली! दिल्ली का चौंकाने वाला मामला 😱
अजमेर के पति-पत्नी का झगड़ा दिल्ली रणहौला में भीषण रूप ले गया। प्रेग्नेंट पत्नी ने गुस्से में पति की आधी जीभ काट दी। पति चीखते हुए अस्पताल पहुंचे, पुलिस ने पत्नी को गिरफ्तार कर लिया।
डॉक्टर्स ने कहा, जीभ जुड़ने की उम्मीद बेहद कम है।
प्यार और गुस्सा का ये खौफनाक मिक्स हमें सिखाता है कि पल भर का क्रोध हमेशा जिंदगी बदल सकता है। 💔
धत्त तेरी….! छी ससुर ….! यही तो गुंडागर्दी है ….! यही तो लठैतवाद है….! यही तो जातिवाद है ….! यही यो नफरतवाद है ….!
- दूल्हा अनंत कुमार यादव एक IITan और उप-मंडल कल्याण अधिकारी हैं। उसकी पत्नी शिखा रंजन एक ब्लॉक पंचायती राज अधिकारी हैं।
- किसी पुजारी से विवाह ना करवाना उनकी मर्जी है। इनका व्यक्तिगत अधिकार है। ये चाहे कोर्ट से विवाह करें या किसी मदरसे या चर्च से कर लें ये भी इनका अधिकार है।
- लेकिन एक सिविल सेवकों के रूप में, इनका कर्तव्य है कि वे बिना किसी पूर्वाग्रह के जाति और समुदाय के प्रत्येक नागरिक की सेवा करें। किसी के प्रति जातीय दुर्भावना ना रखें।
- लेकिन ब्राह्मणों की सार्वजनिक रूप से अस्वीकृति, एक समाज को शोषक बताना, अत्याचारी बताना, उनको लेकर समाज में नफरत फ़ैलाना का एक गंभीर चिंता पैदा करता है:
- सवाल ये कि क्या ये दोनों प्रशासन में तटस्थ रहेंगे, क्या BPSC की गाइडलाइन इन्हें ये मान्यता देती है कि ये किसी के ख़िलाफ़ समाज में नफरत फैलाएँ?
- इन्होंने घटियापन की सारी सीमा पार कर दी है। ये नीचता की पराकाष्ठा है कि एक समाज के प्रति विवाह जैसे पवित्र परंपरा में नफरत फैलाया जाए।
- हैरानी ये कि ये सब देखकर भी सरकार मौन है? प्रशासन चुप्पी साधे है? क्यों? आख़िर क्यों?
- मामला बिहार के पटना का।