Rahi ✍️💎
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@Rahi1966
किसी भी धार्मिक कट्टरता से असहमत,RT और एंडोर्स में जरूरी नहीं की सहमत हो ,काश महिलाओं के लिए भी गौरक्षा दल जैसा कोई दल होता NOT INTERESTED IN STOCK MARKET
भारत Katılım Temmuz 2013
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ट्रेन में सामने क्या चल रहा था — एक छोटा सा किस्सा, बड़ा ट्विस्ट
ट्रेन की खिड़की के पास दो खूबसूरत लड़कियाँ बैठी थीं, और सामने खड़ा एक लड़का बार-बार ऊपर वाली लड़की को देख रहा था। उसकी मुस्कान में कुछ ऐसा था कि लड़के का दिल वहीं अटक गया।
अचानक ऊपर वाली लड़की ने हल्की शर्म और मुस्कान के साथ कहा, “Hello…”
लड़का थोड़ा घबराया, फिर बोला, “क्या हुआ?”
लड़की ने धीरे से कहा, “Number दे दो…”
बस, लड़के की तो जैसे लॉटरी लग गई। दिल खुश, चेहरा लाल उसे लगा आज का दिन खास बन गया।
लेकिन नीचे बैठी लड़की कन्फ्यूज थी ये बात किससे हो रही है? वो कभी ऊपर देखती, कभी नीचे।
तभी लड़का नंबर देकर आगे बढ़ गया… और नीचे वाली लड़की बस एक ही सोच में रह गई ये हुआ क्या अभी? 😂


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@menirbhay93 100/100
इस से बेहतरीन हाथी की तस्वीर खुद हाथी भी नहीं बना सकता है
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@RebornManish तब गांधी जी के पीछे निस्वार्थ देश भक्तों की फौज थी
शायद
अब राहुल के पीछे सत्ता लोलुप लोग ज्यादा हैं
किधर भी लुढ़कने वाले
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हाउ ही फेल टू बिकम अवर लीडर।
1917 की एक सुबह, जज साहब कुर्सी पर विराजमान थे। कटघरे में खड़े उस अधनंगे शख्स से पूछा- व्हाट्स योर प्ली??
संक्षिप्त जवाब मिला - आई प्लीड गिल्टी।
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चंपारण में शांति भंग करने का आरोप था। गांधी को इलाका छोड़ने के आदेश थे। जाने से इनकार किया, तो गिरफतार हुए।
अब कटघरे मे तनकर अपराध स्वीकार रहे थे। जज ने रास्ता निकाला- तुम्हे 100 रु की जमानत पर छोड़ा जाता है।
गांधी बोले- पैसे तो नही दूंगा। जेल भेजिए।
बाहर जनसमुद्र ठाठें मार रहा था। जज ने मजबूरन, बिना जमानत रिहा कर दिया। इस पल में दक्षिण अफ्रीका से लौटा वकील,
इस देश का लीडर बन गया।
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कुछ बरस बाद दो लड़कों ने असेंबली में बम फेंका।
भागने का मौका था। पर वे रुके, गिरफ्तार हो गए। अगले दिन अखबारों में उनका फोटो छपा।
कई महीनों तक वही नाम छपता रहा। भगतसिंह ने वकील नही लिया। कटघरे को मंच बना लिया। सजा ए मौत हुई।
पर भगतसिंह आज भी जिंदा है।
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मुकदमा राहुल पर हुआ।
न हत्या!! न भ्रष्टाचार!! न डकैती!!
चोर को चोर कहने का अपराध था।
अधिकतम सजा हुई, सांसदी गई। ये राहुल का सुनहरा मौका था, चूक गए। रास्ता पकड़ा- वकील, दलील और अपील।
नतीजा- एक उबाऊ राहत।
क्या होता, अगर तुरन्त सरेंडर करते?? जेल जाते,
अपील अपील का खेल वहीं से खेलते।
और जब लौटते.. ??
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गांधी के साथ हुआ था। जब दोबारा 1922 में राजद्रोह मुकदमे में अपराध स्वीकारा। कहा- हूँ राजद्रोही!!
भेजो जेल।
जज ने सचमुच जेल भेज दिया।
6 साल की सजा हुई।
पर जब लौटे, तो सीने पर बैज ऑफ ऑनर था। जेल यात्रा का टैग, ऐसी वो इज्जत जो हर कोई पाना चाहता था। गांधी ने सबको आसान रास्ता दिया।
नमक बनाओ, केवल 15 दिन जेल जाओ।
चटपट लौटकर अपने इलाके का गांधी बन जाओ।
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फिर तो अंग्रेज सरकार की तमाम जेलें, गांधी के अनुयायी मैन्युफैक्चर करने की फैक्ट्री बन गयी।
सोचिये, अगर गांधी जमानत ले लेते??
उनके वकील एंटीसिपेटरी बेल की याचना लेकर हाईकोर्ट सुप्रीम भागते। 32 मुकदमों में आवेदन लेकर, याचक बने घूमते। तो आततायी सत्ता से लड़ने को हजारो गांधी कहाँ से आते??
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राहुल चूक गए। और उनकी बनाई लीक पर पवन खेड़ा भी हैं। यह बात काग्रेस का एक एक कार्यकर्ता वॉच कर रहा है।
सोच रहा है कि जेल, बैज ऑफ ऑनर नही है। पवन खेड़ा के पास तो महंगे वकील हैं, बच निकलेंगे। लेकिन पर यही आरोप हम चौराहों पर दोहराएं, जनता तक पहुचायें।
तो फंस जाएंगे।
वे हिमंता की अहंकारी ललकार से खौफ खाकर भयभीत हैं। वे गिरफ्तार होकर पेले जाने से, पेड़ा बन जाने से डर से हिले हुए हैं।
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क्या होता- तब राहुल दम से गिरफ्तार होते।
तो आज खेड़ा दम से गिरफ्तार होते। पीछे दर्जन भर बड़े नेता वही कागज लहराकर, वही आरोप दोहराते। खुद पर FIR की मांग करते, जेल जाते।
उनके पीछे 500- 1000 नेता, विधायक, सांसद, प्रवक्ता यही दोहराते। हर महामानव की धो-धोकर मानहानि करते। थाने जाकर खुद पर ही FIR लिखवाते, गिरफ्तारी देते।
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दरअसल डरा हुआ नेता, मरा कैडर बनाता है।
गांधी को मालूम था- हिंदुस्तान की रिहाई का रस्ता, जेल की चहारदीवारी से होकर गुजरता है।पर इस राह पर, सबसे आगे आगे उन्हें खुद चलना होगा।
जमानत लेने वाले, लाखो मरजीवड़े पैदा नही कर सकते। आज भी राहुल की फौज जेलें ही खड़ी करेंगी, प्रवक्ता- और डिबेट नही।
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मुकदमा मंच है। मौका है।
पत्रकार, कार्टूनिस्ट, स्टैंड अप कामेडियन, नेता-सबको यह रेजीम थोक में अवसर मुहैया करा रहा है। लेकिन इस मंच का इस्तेमाल तब शुरू होगा, जब सबसे बड़े नेता अगुआई करेंगे।
जब राजद्रोह, मानहानि, और मखौल उड़ाने के लिए वे भर भरकर जेल जाएंगे। रेजीम FIR करने से डरेगा, कितनो को जेल भरेगा?
नेता वह जो सजा को ऑनर बना दे। चोरों की सदारत में चल रहे रेजीम को चोर कहने की सजा सबसे पहले भुगते। और जब तलक ये नही होगा..
ही विल फेल टू बिकम अवर लीडर।

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@vishwachou901 कैसे कैसे लोग दुनिया में रहते हैं अपने बच्चों को कौन फेकता है भला।
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@VoiceOfTribals_ @Yogeshkherli @TribalArmy @HansrajMeena @drajayupadhyay @CommonBS786OM @priyanka2bharti @ProfNoorul @Priyaa_Purohit @zoo_bear Happy birthday betu
💐💐💐💐💐
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@Lovely92698976 @singh_asarpal @ShuebKh16859893 @AchryConfucious @budhwardee @Arvindkuma43649 @LucknowMsk @MadhuKothari9 @Satanis43352136 @sschauh75696498 @EntireBad चाचू की आंखे सुजी हुई है
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चाचू @ShuebKh16859893 तापमान देखने के लिये पैरामीटर की क्या जरूरत है,
वो तो चाची के थोबड़े से ही पता चल जाता है
😁😁
@AchryConfucious
@budhwardee
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@MadhuKothari9
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एक छोटा सा बच्चा दवा लेने एक दुकानदार के पास गया
उसने 500 का नोट दिया, दुकानदार ने नोट को देखा और समझ गया कि वो नकली था
उसने बच्चे से पूछा ये कहाँ से लाया?
बच्चे ने रोते हुए कहा माँ बहुत बीमार है
एक अमीर बाबूजी के जूते पॉलिश किए, उन्होंने 60 की जगह खुश होकर यही दे दिया
दुकानदार जानता था कि नोट नकली है फिर भी उसने चुपचाप दवा और बाकी के 300 रुपये उसे दे दिए
पास खड़े एक ग्राहक ने हैरान होकर पूछा,
तुमने जानबूझकर अपना नुकसान क्यों किया?
दुकानदार ने मुस्कुराकर कहा उसकी माँ शायद बच जाए, लेकिन अगर उसे बता दिया कि उसकी पहली मेहनत की कमाई नकली है,
तो उसका इंसानियत से भरोसा उठ जाएगा
500 रुपये से ज्यादा कीमती उस बच्चे का विश्वास है
क्या दुकानदार ने अपना नुकसान करके सही किया?
या उसे सच बता देना चाहिए था
नोट: फोटो प्रतीकात्मक है..

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