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༄ᶦᶰᵈ᭄✿प्रशान्त राव ࿐🐘BSP🐘
@RaoPrashant1997
|🌺| BSP Supporter|🌺| Ambedkarites|🌺| Writer|🌺| Social Activities|🌺| Jay bhim🙏Jay Sambidhan📘 //चमचागिरी छोड़ दो,शासक बनने पर जोर दो//
Uttar Pradesh, India Katılım Şubat 2019
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1. ख़ासकर उत्तर प्रदेश स्टेट के बी.एस.पी. के सभी ज़िला अध्यक्ष एवं छोटे-बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्तागण, आज मैं पार्टी के कार्यों से दिल्ली जा रही हूँ और कार्य पूरा होते ही जल्दी वापिस भी आ जाऊँगी। और इस दौरान् पार्टी की पिछले महीने दिनांक 31 मार्च सन् 2026 को लखनऊ में हुई यू.पी. प्रदेश-स्तरीय बड़ी बैठक में पार्टी संगठन को तैयार करने व कैडर आदि के ज़रिये पार्टी का जनाधार बढ़ाने एवं आर्थिक मज़बूती देने तथा यू.पी. विधानसभा आमचुनाव की तैयारी से सम्बन्धित जो भी ज़रुरी दिशा-निर्देश दिये गये थे, उस पर पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अमल करते रहना है।
2. साथ ही, बैठकों में यू.पी. में बी.एस.पी. के नेतृत्व में रही सरकार में प्रदेश के विकास व जनहित आदि में किये गये कार्यों के बारे में ज़रूर बताना है। बैठकों में यह भी बताना है कि यू.पी. में अब तक जितने भी एक्सप्रेस-वे आदि बने हैं तथा नोएडा में एयरपोर्ट भी बना है ऐसे अनेकों और भी जनहित के कार्य किये गये हैं जिनकी योजना व रुपरेखा बी.एस.पी. की रही सरकार में ही बनाई गयी थी और ये सभी कार्य काफी हद तक ज़रूर पूरे हो जाते यदि उस समय केन्द्र की रही कांग्रेसी सरकार बी.एस.पी. के प्रति अपनी जातिवादी मानसिकता के चलते इनमें रुकावटें पैदा नहीं करती।
3. कहने का तात्पर्य यह है कि यूपी के समुचित विकास व सर्वसमाज की उन्नति/तरक़्क़ी व बेहतर कानून व्यवस्था हेतु ’कानून द्वारा कानून का राज’ के ज़रिये बी.एस.पी. के ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ शासन में ही यह संभव हो सकता है, जिस पर भी ध्यान देने की अपील।
4. इतना ही नहीं बल्कि लखनऊ में दिनांक 22 फरवरी सन् 2026 की यू.पी. को छोड़कर आल-इण्डिया की हुई बड़ी बैठक में, पार्टी व मूवमेन्ट के हित में जो भी ज़रुरी दिशा-निर्देश दिये गये थे, तो उन्हें भी समय से ज़रूर पूरा करना है।
5. इसके इलावा, यू.पी. सहित पूरे देश में, पार्टी द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों को लेकर स्थानीय स्तर पर पार्टी की बुलाई जा रही सभी इन बैठकों में महिला आरक्षण को लेकर अभी हाल ही में, मेरे द्वारा दिनांक 15 अप्रैल 2026 को मीडिया में पार्टी का जो स्टैण्ड रखा गया है तथा उसके बाद एक्स पर पोस्ट भी किया गया है और ज़रुरत पड़ने पर आगे भी बयान दिये जायेंगे।
6. अर्थात् महिला आरक्षण के समर्थन के मामले में अभी भी पार्टी का स्टैण्ड दिनांक 15 अप्रैल वाला ही है, इसमें कोई भी बदलाव नहीं किया गया है, उसके बारे में भी इन बैठकों में ज़रूर बताना है ताकि महिला आरक्षण के इस ख़ास मुद्दे पर पार्टी के लोग गुमराह ना हो सकें, लेकिन इसके लिए पार्टी के अनुशासन के मुताबिक़ कोई भी धरना-प्रदर्शन आदि नहीं करना है।
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@NkNandanLive @Mayawati मै कोई ज्योतिषी नहीं हु,और ना मै जिसको कहूंगा ओ PM बनेगा उसके लिए चुनाव होता है,हा पर हम सभी बहन जी को PM की कुर्सी पर देखना चाहते है बाबा साहेब,मान्यवर साथ साथ यही हमारी नेता है,आदर्श है, माना की बसपा कमजोर हुयी है परन्तु हम ओ नहीं जो बुरे वक्त मे निजी स्वार्थ मे बाप बदल भाई!
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देश में सामाजिक परिवर्तन के पितामह के रूप में प्रसिद्ध ’बहुजन समाज’ में अति-पिछड़े वर्ग में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले को आज उनकी जयंती पर मेरे व बी.एस.पी. की ओर से भी शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित।
ख़ासकर शिक्षा के माध्यम से स्त्री/नारी शक्ति के प्रणेता के रूप में महात्मा ज्योतिबा फुले व उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। महात्मा ज्योतिबा फुले के शब्दों में ’’विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी। नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना शुद्र हताश हेये, और गुलाम बनकर रह गये।’’ अर्थात यह सब कुछ शिक्षा के अभाव में हुआ और इसीलिये आगे चलकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनसे प्रेरित होकर शिक्षा की तरफ विशेष ध्यान दिया।
साथ ही, उन्नीसवीं सदी के मध्य में दलितों व शोषितों की मुक्ति के लिये महात्मा ज्योतिबा फुले के ज़बरदस्त प्रयासों के कारण अकेले पुणे में ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की नई अलख जगी और विशेषकर नारी मुक्ति व सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कार्य शुरू हुआ, जिस संघर्षों के लिये उनकी जितनी भी सराहना व प्रशंसा की जाये वह कम है।
ऐसे अति-पिछड़े/ओबीसी समाज के महापुरुष की स्मृति व उनके सम्मान में मेरी बी.एस.पी. सरकार द्वारा अनेकों कार्य यहाँ यूपी में किये गये जिनमें अमरोहा को नया ज्योतिबा फुले नगर ज़िला बनाना शामिल है, किन्तु सपा सरकार ने इसे भी अपनी संकीर्ण राजनीति व जातिवादी द्वेष आदि के कारण इसका नाम भी बदल डाला।
उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी की सरकार द्वारा कासगंज को कांशीराम नगर ज़िला बनाने के साथ-साथ कानपुर देहात को रमाबाई नगर, संभल को भीमनगर, शामली को प्रबुद्ध नगर व हापुड़ को भी पंचशील नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था, जिसे सपा सरकार ने ज़िला तो बनाये रखा लेकिन इन सभी ज़िलों के नामों को बदल डाला, यह है इनके पीडीए का अति-दुखद चाल, चरित्र व चेहरा।
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@NkNandanLive @Mayawati तूझे इमिडियेट एक पार्टी बनाना चाहिए। तू बहुत बड़ा इनफ्लुएंसर है 🤣🤣🤣
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सुनो कांग्रेसी चमचो!
एक बार इस एंकर की बात को अच्छे से सुन लो समझ लो यह है हमारी सम्मानित बहन जी @Mayawati जी का रुतबा।
सत्ता तो आती जाती रहेगी हमारे बहुजन महापुरुषों का जो मिशन है उस पर आच नहीं आनी चाहिए।
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@Voiceofpavan @baserbhai10 हम भी दिल से बसपाई ही है,लेकिन सच यही है की बसपा की अभी स्थिति और रवैया दोनों ठीक नहीं है,जिन बड़े चेहरों के नाम पर वोट मिलता था ओ सभी पार्टी से जा चुके है,जो कुछ लोग आना भी चाहते है उन्हें हरी झंडी नहीं मिल रही है,राजनीति मे ज्यादा ईमानदार और स्वाभिमानी होना नुकसानदायक होता है
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@Voiceofpavan @baserbhai10 भाई जितना नाम गिनाये हो इनमे से आकाश जी का खुद बनाई पहचान थोड़ी है जो उनके नाम पर वोट पड़ेगा
हाँ बाकि इंदु जी, रामजी, बाकि अन्य अच्छे नेता और विश्वसनीय लोग जरूर है पर ये लोग इतने बड़े चेहरे नहीं है की इनके नाम पर किसी एक समाज या एक क्षेत्र का वोट दिला सके
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बसपा को ऐसे लोगों को आगे लाना चाहिए। वास्तव में इनके एक वीडियो में विरोधियों के 50 नेरेटिव को ध्वस्त करने की क्षमता होती है।
@Mayawati
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1. सपा व कांग्रेस आदि ये दलित-विरोधी पार्टियाँ, इस बार यू.पी. में विधानसभा आमचुनाव के नज़दीक आते ही, इनके वोटों के स्वार्थ में बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की सोची-समझी रणनीति के तहत् जयंती मनाकर तथा कांग्रेस पार्टी तो अपनी केन्द्र की सरकार में रहकर इनको ’भारतरत्न’ की उपाधि ना देकर, अब दूसरी पार्टी की सरकार से देने की माँग कर रही है, यह हास्यास्पद नहीं है तो क्या है?
2. जबकि ये पार्टियाँ शुरू से ही, बी.एस.पी. को ख़त्म करने में लगी रही हैं, जिस पार्टी की मान्यवर श्री कांशीराम जी ने ख़ुद नींव रखी है। जिसे इनकी एकमात्र उत्तराधिकारी व बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष के जीते-जी कोई हिला नहीं सकता है।
3. इतना ही नहीं बल्कि इससे ऐसा भी लगता है कि इन पार्टियों के महापुरुषों में कोई जान नहीं रही है, जो अब ये हमारे महापुरुषों को भुनाने में लगे हैं, जिन्होंने मान्यवर श्री कांशीराम जी के जीते-जी हर मामले में हमेशा इनकी उपेक्षा की है।
4. तथा इनके सम्मान में बी.एस.पी. सरकार द्वारा किये गये कार्यों को भी सपा सरकार द्वारा अधिकांशः बदल दिया गया है। यह है इन पार्टियों का इनके प्रति दोग़ला चाल व चरित्र। इसलिए यदि सपा व कांग्रेस आदि के ख़ासकर दलित चमचे चुप रहें तो उनके लिए यह बेहतर होगा। यही सलाह। हालाँकि ऐसे लोगों से दूरी बनाने के लिए ही मान्यवर श्री कांशीराम जी ने ’चमचा युग’ के नाम से अंग्रेज़ी में एक किताब भी लिखी है।
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