अल्फाज़ ख़ामोशी के...✍️

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अल्फाज़ ख़ामोशी के...✍️

अल्फाज़ ख़ामोशी के...✍️

@Rishvii01

poetry's. motivation.shayri कोई ठुकरा दे तू हंस के सह लेना; मोहब्बत की ताबित में ज़बरदस्ती नहीं होती!

rajasthan Katılım Temmuz 2024
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अल्फाज़ ख़ामोशी के...✍️
.......इत्तेफाक से राहों में कोई यूं मिल जाए कि जैसे ज़िंदगी पास से गुज़र जाए .........
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हमने कितने धोखे में सब जीवन की बर्बादी की गाल पे एक तिल देख के उनके सारे जिस्म से शादी की
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वो मुद्दतें हुई हैं किसी से जुदा हुए लेकिन ये दिल की आग अभी तक बुझी नही...
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तेरे बिना लगता नही दिल मेरा रह जाएगी, कहानी मेरी अधूरी जो तू ना मिला..
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और ज़ब ज़लील होकर सब्र आ जाए , तो क्या महबूब, क्या इश्क़ , क्या मोहब्बत।
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अल्फाज़ ख़ामोशी के...✍️
कहीं मिले कोई अपना तो फूटकर रो लूँ कई दिनों से बहुत मुस्कुरा रहा हूँ मैं
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एक सदा पूछती रहती है कोई ज़िंदा है? मैं कहे जाता हूँ, हाँ है कोई सुनता ही नहीं
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मुझको रोने का सलीका भी नहीं है शायद लोग हँसते हैं मुझे देख के आते-जाते
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हर परिणाम मेरे विपरीत होता जा रहा (प्रभु ),,। कुछ तो ऐसा कर दो, जिससे मेरी आस्थाएं बनी रहें..।।
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अल्फाज़ ख़ामोशी के...✍️
गलती भले ही सौ बार की होगी मैने, लेकिन तेरे साथ गलत करने का ख्याल कभी नही आया..!!🥰
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अल्फाज़ ख़ामोशी के...✍️
लवो को छू कर यूँ बहकाया न करो,यूँ ख्वाबो में आकर इश्क महकाया न करो।
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अल्फाज़ ख़ामोशी के...✍️
समंदर ने सही एक नदी तो होनी चाहिए, ऐ शहर तुझ में कहीं जिंदगी तो होनी चाहिए!!
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अल्फाज़ ख़ामोशी के...✍️
पढ़ा था और अब महसूस कर रहा हूं , "ये दुनिया किसी और दुनिया का नर्क भी तो हो सकता है"...!!!
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कोई ठुकरा दे तू हंस के सह लेना; मोहब्बत की ताबित में ज़बरदस्ती नहीं होती!
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अल्फाज़ ख़ामोशी के...✍️
क़लम उठाऊँ कि बच्चों की ज़िंदगी देखूँ पड़ा हुआ है दोराहे पे अब हुनर मेरा
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अल्फाज़ ख़ामोशी के...✍️
ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया
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