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Maharashtra, India Katılım Eylül 2018
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@SushantSin @livemint सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस भेजा 4 हफ्तों में जवाब मांगा,11 साल की मासूम बच्ची को राशन न मिलने से भुखमरी से मौत,3 करोड़ राशन कार्ड कैंसिल किए गए!मतलब 15 करोड़ भारतीय भुखमरी का शिकार,डिजिटल इंडिया के साइड इफैक्ट्स! #300DeathsAtProtest #4_साल_यूपी_बेहाल #COVID19 @INCIndia
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In 2021 Crude oil was at 85 Dollar 25 times #PetroleumProducts prices changed in last 33 days. #petrolprice #DieselPriceHike
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Dibang@dibang

तेल के दाम के खेल में कई तरह के घालमेल: कैसे जगे लोगों का भरोसा भारत में #Petrol-डीजल की कीमतें को लेकर हमेशा से विवाद के साथ ये लगता रहा है कि कहीं कुछ झोल है. हाल में पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद सरकारी तेल कंपनियों को रोज़ाना करीब 600 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है. पहले ये नुकसान था रोज़ाना करीब 1,000 करोड़ रुपये. असल में, #Iran जंग और #StraitOfHormuz बंद होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में 50% उछाल आया. वैसे 2025-26 में #IndianOil, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के कुल 'शुद्ध लाभ' में 130% की बड़ी बढ़त हुई. यानी 2024-25 के ₹33,601.5 करोड़ रुपये के मुकाबले इन सरकारी कंपनियों ने 2025-26 में 77,280 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा कमाया. और सबसे ख़ास बात, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में इन कंपनियों का फायदा 19,470 करोड़ रुपये रहा, जो कि पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 40% से ज्यादा है. ऐसे में सवाल है कि जब कंपनियां इतना मुनाफा कमा रही हैं, तो महंगाई का बोझ जनता पर ही क्यों डाला जाना चाहिए, पेट्रोल की कीमत में सिर्फ कच्चे तेल की लागत नहीं होती बल्कि इसमें डॉलर-रुपया exchange rate, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, डीलर कमीशन और टैक्स भी शामिल होते हैं. कई बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स का हिस्सा आधे से भी ज्यादा होता है. भारत में टैक्स का बोझ कई देशों की तुलना में ज्यादा माना जाता है. यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने पर भी जनता को राहत नहीं मिलती. चुनावों के दौरान तेल कंपनियों को कीमतें बढ़ाने से रोका जाता है और चुनाव खत्म होने के बाद दाम बढ़ाए जाते हैं. इससे ये साफ होता है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें पूरी तरह से बाजार के दाम के हिसाब से नहीं चलती हैं. जबकि बार-बार ये मांग उठती रही है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें सरकार और कंपनियों की मनमानी से नहीं, बल्कि एक साफ़, पारदर्शी और नियम-आधारित व्यवस्था के तहत तय हों. ऐसा फार्मूला हो जिसमें कच्चे तेल की कीमत बढ़ने या घटने का असर सीधे दिखाई दे और टैक्स की जानकारी भी सार्वजनिक हो. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता का भरोसा मजबूत होगा. जब लोगों को साफ़-साफ़ समझ में आएगा कि वो किस चीज़ के लिए क्यों और कितना पैसा दे रहे हैं, तभी इस 'तेल के खेल' में सबका विश्वास कायम होगा. क्या है आपकी राय

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State shares reduce from 41% to 31%. #GST #PetrolDieselRate
ABP News@ABPNews

#WATCH | अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार ने समझाया पेट्रोल-डीजल पर तेल कंपनियों के फायदे का गणित 'सीधा सवाल' संदीप चौधरी के साथ abplive.com/live-tv #SeedhaSawaal #SandeepChaudhary #PetrolDieselPriceHike #OilCompanies #Profit #ABPNews

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