
सामाजिक प्राणी
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सामाजिक प्राणी
@SamajikPraani
#कांग्रेसी#Farmer #Food🚜🚜🧑🌾







नार्वे की जितना कुल जनसंख्या है उससे दस लाख लोग जियादा रोज दिल्ली मेट्रो में सफर करते हैं .. ये सोशल मीडिया पर एक्टिव लोगों की तरह मत उछलो .. किसी भी देश का राज्याध्यक्ष देश का होता है, पार्टी का नहीं .. घर के मसले घर में निपटाए जाते हैं




रोशन किशोर (@Roshanjnu) भारत में डेटा एनालिसिस की पत्रकारिता के चर्चित लेखकों में हैं. उनका यह विश्लेषण पढ़ना चाहिए. लिखते हैं— “A deeper analysis of the election results provides more evidence that the obsession with attributing TMC’s loss to SIR is misplaced. In fact, Muslims on the electoral roll, rather than those who were possibly disenfranchised because of SIR, might have played a bigger role in the TMC’s poor showing this time.” विस्तार से समझने के लिए पूरा विश्लेषण पढ़ें. लिंक नीचे है. अपना कोई वैचारिक एजेंडा है नहीं, प्रिय सौरभ जी. आपका ज़रूर है. आप स्पष्ट तौर पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के पक्षधर हैं. अपन दोनों पक्षों में नहीं हैं और अध्येता-वॉचडॉग की भूमिका में है. तो नैरेटिव का धंधा अपना नहीं है. आभासी दुनिया में कुछ भी लिखा जाता रहे, TMC के नेताओं से ही ऑफ कैमरा पूछ लेंगे तो हार के कारण बता देंगे. मीडिया की आलोचना करें. लेकिन अंधाधुंध फ़ायरिंग से आपकी (आपके पक्ष की) ख़ामियाँ नहीं छिपेंगी. विचारना चाहिए कि उत्तरी बंगाल और जंगल महल के इलाक़ों में दलितों-आदिवासियों ने बीजेपी को क्यों चुना और इन इलाक़ों में तृणमूल खाता क्यों नहीं खोल पाई. कैसे तृणमूल सरकार में लॉ एंड ऑर्डर के मसले इतने बड़े हो गए कि देश ने एक वक़्फ़े के बाद ऐसी सत्ताविरोधी लहर देखी. कोर्स करेक्शन के लिए ज़रूरी है, समस्या का स्वीकार. सेहत और राजनीति, डिनायल दोनों में आत्मघाती साबित हो सकता है. hindustantimes.com/india-news/los…







