सामाजिक प्राणी

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@SamajikPraani

#कांग्रेसी#Farmer #Food🚜🚜🧑‍🌾

New Delhi, India Katılım Mart 2022
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Ajay Maken
Ajay Maken@ajaymaken·
🙏 यह पाँच-भाग की शृंखला मेरी मार्गदर्शक, श्रीमती शीला दीक्षित जी को समर्पित — मेरी नज़र में, आज के आधुनिक दिल्ली की निर्माता। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली सरकार ने ईंधन संकट को लेकर कई सलाहें जारी की हैं — मेट्रो लीजिए, साथ में सवारी कीजिए, ग़ैर-ज़रूरी सफ़र कम कीजिए। ये सलाहें अपने-आप में ग़लत नहीं हैं। पर ये "हमें", यानी आम लोगों को, बताती हैं कि हमें क्या करना है। पहले सवाल का जवाब इनमें नहीं है — क्या वह "विकल्प" है भी? क्या दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन इतना तैयार है कि परिवार जब अपनी गाड़ियाँ घर पर छोड़कर निकलें, तो उन्हें ढो सके? एक बात पहले ही साफ़ कर दूँ। आगे जो भी मैं रखूँगा, उसका मक़सद आलोचना नहीं है। ये सुझाव हैं, सद्भावना के साथ, दिल्ली सरकार के लिए — ताकि वह काम आगे बढ़ाया जा सके जो 2013 में शीला जी के कार्यकाल के समाप्त होने तक चल रहा था। यहाँ जो भी आँकड़े आप देखेंगे, वे सिर्फ़ सरकारी दस्तावेज़ों से हैं : भारतीय रिज़र्व बैंक, दिल्ली सरकार के अपने ऑडिटेड खाते, दिल्ली मेट्रो की वार्षिक रिपोर्टें, और दिल्ली का आर्थिक सर्वेक्षण। आँकड़ों से पहले एक छोटी सी बात समझ लेते हैं। CAPEX — यानी पूँजीगत व्यय — सरकार के बजट का वह हिस्सा है जो "बनाता" है। मेट्रो लाइनें, डिपो, फ़्लाईओवर, सड़कें। ऐसी संपत्तियाँ जो दशकों तक चलती हैं। दूसरा हिस्सा, राजस्व व्यय, ख़र्च होता है वेतन, सब्सिडी और बिजली के बिल पर। दोनों ज़रूरी हैं — शहर चलाने के लिए दोनों चाहिए। पर शहर "बनाता" सिर्फ़ CAPEX है। अब देखिए — तीस सालों में दिल्ली की चार चुनी हुई सरकारें रहीं। हर सरकार ने परिवहन पर जो रुपया ख़र्च किया, उसमें से वास्तव में "बनाने" पर कितने पैसे लगे : 🔸 बीजेपी, 1993–98 : 54 पैसे। 🔸 शीला दीक्षित / INC, 1998–2013 : 73 पैसे। दिल्ली की किसी भी सरकार से सबसे ज़्यादा, और बहुत बड़े अंतर से। 🔸 आम आदमी पार्टी, 2014–25 : सिर्फ़ 33 पैसे। सबसे कम, बहुत बड़े अंतर से। 🔸 बीजेपी, 2025–26 (बजट अनुमान) : 51 पैसे अनुमानित। पर यह सिर्फ़ एक बजट-अनुमान वर्ष है, आँकने के लिए बहुत जल्दी। दिन 2 में हम इसकी ईमानदारी से जाँच करेंगे। यही, एक आँकड़े में, फ़र्क़ है — एक बने हुए शहर में, और एक उस शहर में जो ज़्यादातर सिर्फ़ "घोषित" हुआ हो। 2013 के अंत में शीला जी ने पद छोड़ा। और उसके बाद से, दिल्ली में बुनियादी ढाँचे के विकास की रफ़्तार बस ठहर सी गई है। मेट्रो का फ़ेज़ चार — जिसकी योजना-स्तर की मंज़ूरी उनकी सरकार ने 2011 में दे दी थी — केंद्र की मंज़ूरी के लिए 2019 तक इंतज़ार करता रहा। डीटीसी का बेड़ा आज 2010–11 के अपने शिखर से, चौदह साल बाद, अब भी छोटा है। और बजट का जो हिस्सा कभी निर्माण पर ख़र्च होता था, वह अब लगभग ग़ायब है। अगले चार दिन, एक दिन एक सवाल : 📊 दिन 2 · CAPEX, पैसा-पैसा। दिल्ली ने वास्तव में क्या बनाया, क्या बनाना बंद किया, और क्या सिर्फ़ "घोषित" किया। रसीदों और ऑडिट के साथ। 🚇 दिन 3 · दिल्ली मेट्रो। मंज़ूरी किसने दी, बनाया किसने, और फ़ेज़ चार को सिर्फ़ एक मंज़ूरी के लिए छह साल इंतज़ार क्यों करना पड़ा। 🚌 दिन 4 · डीटीसी। सर्वकालिक शिखर, उसके बाद की गिरावट, और जो ऑडिट रिपोर्टें अब चुपचाप प्रकाशित नहीं हो रहीं। 🧍 दिन 5 · बसें और लोग। दिल्ली को कितनी बसें चाहिए, कितनी हैं, और क्यों ज़्यादातर दिन आपको एक भी बस नहीं मिलती। हर आँकड़ा सरकारी रुपये में होगा। कुछ वर्षों में अंतराल हैं — हर एक को मैं वहीं ईमानदारी से बताऊँगा। पाँच सवाल, पाँच दिन। आँकड़े बोलेंगे। उसके बाद फ़ैसला आप कीजिए। दिल्ली परिवहन — तीस साल, तीन दौर — मामला अब खुला है। #DelhiTransport #दिल्लीपरिवहन #CAPEX #DelhiMetro #DTC #SheilaDikshit
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Rahul Gandhi
Rahul Gandhi@RahulGandhi·
मोदी जी, आपका Melody Reel हर भारतीय का - और उसके दर्द का - अपमान है।
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@Sachingupta Aam Aadmi party के सदस्य हैं साथ में।ये भी बताओ ये सब आम आदमी पार्टी वालों का फिर से वही चोचला आज केजरीवाल की वजह से ये हाल हैं देश के
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Sachin Gupta
Sachin Gupta@Sachingupta·
जज साहब ने बेरोजगारों की तुलना कॉकरोच से की। इसके बाद महाराष्ट्र के अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर "कॉकरोच जनता पार्टी" अकाउंट बना लिया। 5 दिन में इंस्टाग्राम पर 56 लाख और X पर 1.21 फॉलोअर्स हो गए हैं। CJP ज्वाइन करने के 4 नियम हैं 1– बेरोजगारी 2– आलसी होना 3– ऑनलाइन रहने की लत 4– प्रोफेशनली तरीके से भड़ास निकालने की क्षमता CJP बनाने वाले अभिजीत दीपके अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन की मास्टर डिग्री कर रहे हैं।
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Exx Cricketer
Exx Cricketer@old_cricketer·
उसके अंडू पांडू लड़कियों के मामले में उसकी इमेज अच्छी बताने को सबसे लड़ते रहते और अय्याश बूढ़ा खुद छिनरई करता घूम रहा।
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प्रधान 2.0
प्रधान 2.0@Panchpradhan_·
देश की जनता विशेषकर ऑनलाइन वाली बहुत चूतिया है भाई कुछ दिन पहले राघव चड्ढा को पीएम बना रहे थे और अभी कॉकरोच बने घूम रहे हैं। धीरे धीरे समझ आ रहा है आखिर मोदीजी इतने सालो से राज कैसे कर रहे।
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Ajay Jha
Ajay Jha@Ajay_reporter·
RSS के लोगों सुन लो..आपने कहा कि मुझे माफी मांगनी चाहिए.. मैं कभी माफी नहीं मांगूगा और फिर कहता हूं.. अमित शाह और नरेंद्र मोदी गद्दार हैं, क्योंकि उन्होंने संविधान पर हमला किया है..सुन लो अच्छी तरह...मैं तुम लोगों से नहीं डरता.. @RahulGandhi
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Alok Sharma
Alok Sharma@Aloksharmaaicc·
@RahulGandhi कूटनीति कम, कैमरा एंगल ज्यादा है, देश की चिंता से ज्यादा वायरल होने का इरादा है… सत्ता का ये नया अध्याय देखिए, दर्द कम और अभिनय ज़्यादा देखिए… जनता महंगाई में पिसती रही, और विदेशों में “मेलोडी” पर मुस्कुराता भारत देखिए।
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Rahul Gandhi
Rahul Gandhi@RahulGandhi·
आर्थिक तूफ़ान सर पर है, और हमारे प्रधानमंत्री इटली में टॉफ़ी बाँट रहे हैं! किसान, युवा, महिलाएँ, मज़दूर और छोटे व्यापारी सब रो रहे हैं - PM हंसकर रील बना रहे हैं, और BJP वाले ताली बजा रहे हैं। यह नेतृत्व नहीं, नौटंकी है।
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°अद्वितीय°
छवि खराब न हो इस कारण से सटायर वीडियो तक सोशल मीडिया से राष्ट्रीय सुरक्षा का नाम लेकर रिलीज होते ही गायब करवा दिए जाते हैं. राजा अगर नंगा है तो उसे कपड़े पहनाना देश की जिम्मेदारी है. पर अगर नंगई घर तक ही रखनी है तो बेहतर है कि राजा विदेश न जाए.
rajeevranjan@maholkyahai@rajeevranjanMKH

नार्वे की जितना कुल जनसंख्या है उससे दस लाख लोग जियादा रोज दिल्ली मेट्रो में सफर करते हैं .. ये सोशल मीडिया पर एक्टिव लोगों की तरह मत उछलो .. किसी भी देश का राज्याध्यक्ष देश का होता है, पार्टी का नहीं .. घर के मसले घर में निपटाए जाते हैं

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Rofl Gandhi 2.0 🏹 Commentary
जितनी आसानी से आप रेहड़ी वाले, दुकान वाले, सब्जी वाले के पास पहुंच कर पूछ लेते हो कि माहौल क्या है, क्या आप ऐसे ही 12 साल में कभी अपने प्रधानमंत्री से एक बार भी पूछ पाए हैं कि माहौल क्या है मोदी? आपके अंदर हिम्मत भी है, काबिलियत भी है, लेकिन वो मौका ही नहीं देते, पास ही नहीं फटकने देते। सवालों से उन्हें साजिश की दुर्गंध आती रहती है। अब आप विदेशी जमीन की ढाल बनकर परोक्ष रूप से उनका बचाव कर रहे हैं तो उनकी ही धारणा को बल दे रहे हैं, उन्हें सही ठहरा रहे हैं। हमारे देश के राज्याध्यक्ष साल में कितनी बार राज्याध्यक्ष जैसा आचरण करते हैं? कभी कोई ऐसा हफ्ता गुजरा है जिसमें उन्होंने दोयम दर्जे के राजनैतिक आक्षेप ना किए हों? और अंतिम बात ये कि ज्यादा जनसंख्या होना ना शक्ति की निशानी है, ना खराब व्यवस्था को ढकने का बहाना हो सकता है। सीधी सी बात ये है कि हमारा राज्याध्यक्ष गैर ज़िम्मेदार है, वो सवाल पूछने के मौके नहीं देता। किसी को कहीं भी मौका मिले तो पूछ लेना चाहिए। प्रणाम।
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Ajay Jha
Ajay Jha@Ajay_reporter·
प्रेस वार्ता..( साल 2014 से साल 2026).. नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) = 0 राहुल गांधी ( नेता प्रतिपक्ष) = 129 ( नोट: लिमिटेड डेमोक्रेसी )
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Rahul Gandhi
Rahul Gandhi@RahulGandhi·
We get very good information these days. Modi ji, did Norway agree to your personal request to remove Adani from their pension fund black list?
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Parinda 2.0🕊
Parinda 2.0🕊@Parinda_2·
Meanwhile our godi media.
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Swapnil 😎
Swapnil 😎@Swapnil35550095·
केरलम में आज कांग्रेस के मुख्यमंत्री शपथग्रहण करेंगे। कांग्रेस ने किसी भी गठबंधन के नेता को नहीं बुलाया है। क्योंकि किसी भी गठबंधन के नेता ने केरलम के कांग्रेस के विजय पर बधाई तक नहीं दी। क्षेत्रीय नेताओं की अकड़ अभी तक नहीं जा रही है।
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Sandeep Manudhane
Sandeep Manudhane@sandeep_PT·
I feel really sad for the many very young people now being conned again by CJP (AAP), as we have gone through the entire cycle in 2008-2013 period with the AAP-IAC giant scam. All we can do is warn the young folks, basis our earlier experience. Rest is their destiny now. But remember, with Kejri, end result is guaranteed. He'll use and throw you out most mercilessly like he did with entire founding team in IAC AAP itself, while cornering all gains. You under-estimate the man at your severe peril. Research and learn.
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@sauravyadav1133 जो खुदको न्यूट्रल कहता है समझो वो सरकार की तरफ है न्यूट्रल आदमी वहां हो सकता है जहां सरकार न्यूट्रल की भूमिका में हो, न्यूट्रल सबसे बड़े भक्त हैं जब भी सरकार किन्हीं फसती है ये उग जाते हैं, निष्पक्षता का कोई मायना नहीं जब मैदान बराबर न हो !
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Saurabh
Saurabh@sauravyadav1133·
महान अफ्रीकी नेता डेसमंड टूटू (Desmond Tutu) का मशहूर कोट है “If you are neutral in situations of injustice, you have chosen the side of the oppressor. If an elephant has its foot on the tail of a mouse and you say that you are neutral, the mouse will not appreciate your neutrality.” "नाइंसाफ़ी के वक़्त आप निष्पक्ष हैं तो आप दमनकर्ता की तरफ़ हैं। हाथी का पैर चूहे के ऊपर है और आप कहते हैं कि आप किसी के पक्ष में नहीं हैं तो चूहा आपकी इस निष्पक्षता को बिल्कुल नहीं सराहेगा" आपका कहना है कि आप दोनों पक्षों में नहीं है तो मतलब अगर आप इमरजेंसी के वक्त होते तो तब भी आप दोनों पक्षों में नहीं होते और तटस्थ होते❓ मुझे लगता है कि पत्रकार को तटस्थ तो नहीं होना चाहिए और एक पक्ष कमजोर हो तो निष्पक्ष भी नहीं होना चाहिए। कुलदीप भाई आपको कहने की जरूरत नहीं है कि हम कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के पक्षधर हैं बिल्कुल हैं क्योंकि बीजेपी जैसी सांप्रदायिक और नफरती पार्टी के सामने कोई भी जागरुक नागरिक उसके विपक्ष में रहना ही चुनेगा। और आभासी दुनिया में ही सच लिखा जा रहा है क्योंकि टीवी चैनलों पर आपके साथियों ने खुद को बीजेपी के चरणों में रख दिया है और आजाद पत्रकारों की रिपोर्ट में हमने जमीन पर भी देखा कि SIR के जरिए क्या खेल किया गया था। हमें कांग्रेसी ठहरा कर आप मीडिया वालों की खामियां नहीं छिपेंगी सब समझ गए हैं कि मीडिया सिर्फ दिखता है जनता की तरफ लेकिन है वो सत्ता की तरफ। आखिरी लाइन आपकी आपके लिए ज्यों की त्यों... कोर्स करेक्शन के लिए ज़रूरी है, समस्या का स्वीकार. सेहत और राजनीति, डिनायल दोनों में आत्मघाती साबित हो सकता है.
Kuldeep Mishra / sardar@kuldeepmishra

रोशन किशोर (@Roshanjnu) भारत में डेटा एनालिसिस की पत्रकारिता के चर्चित लेखकों में हैं. उनका यह विश्लेषण पढ़ना चाहिए. लिखते हैं— “A deeper analysis of the election results provides more evidence that the obsession with attributing TMC’s loss to SIR is misplaced. In fact, Muslims on the electoral roll, rather than those who were possibly disenfranchised because of SIR, might have played a bigger role in the TMC’s poor showing this time.” विस्तार से समझने के लिए पूरा विश्लेषण पढ़ें. लिंक नीचे है. अपना कोई वैचारिक एजेंडा है नहीं, प्रिय सौरभ जी. आपका ज़रूर है. आप स्पष्ट तौर पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के पक्षधर हैं. अपन दोनों पक्षों में नहीं हैं और अध्येता-वॉचडॉग की भूमिका में है. तो नैरेटिव का धंधा अपना नहीं है. आभासी दुनिया में कुछ भी लिखा जाता रहे, TMC के नेताओं से ही ऑफ कैमरा पूछ लेंगे तो हार के कारण बता देंगे. मीडिया की आलोचना करें. लेकिन अंधाधुंध फ़ायरिंग से आपकी (आपके पक्ष की) ख़ामियाँ नहीं छिपेंगी. विचारना चाहिए कि उत्तरी बंगाल और जंगल महल के इलाक़ों में दलितों-आदिवासियों ने बीजेपी को क्यों चुना और इन इलाक़ों में तृणमूल खाता क्यों नहीं खोल पाई. कैसे तृणमूल सरकार में लॉ एंड ऑर्डर के मसले इतने बड़े हो गए कि देश ने एक वक़्फ़े के बाद ऐसी सत्ताविरोधी लहर देखी. कोर्स करेक्शन के लिए ज़रूरी है, समस्या का स्वीकार. सेहत और राजनीति, डिनायल दोनों में आत्मघाती साबित हो सकता है. hindustantimes.com/india-news/los…

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Sandeep Manudhane
Sandeep Manudhane@sandeep_PT·
Beware of the suddenly arrived Cockroach Janata Party It is an AAP venture. Hence, a continuation of effort to destroy opposition space by new means. Same as IAC propped by RSS. Beware. Stay away.
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Sincere Dibya
Sincere Dibya@TheSincereDude·
Modi asked you to eat less oil, skip gold, work from home. Sitharaman told you to eat out less and watch your expenses. BJP IT Cell told you “India is the fastest growing economy.” Meanwhile, Indian Express’s Udit Misra just filed the autopsy report: 🔴 Rupee: ₹86 → ₹96 in ONE year. Quietly. 🔴 Net FDI gone NEGATIVE; Indians building factories abroad because they don’t trust this government’s economy 🔴 BOTH current account AND capital account in deficit; simultaneously. First time. Ever. 🔴 Per capita income = ₹20,000/month. MOST Indians earn below even that. 🔴 Exports? Almost stagnant and flat; after 12 years of “make in India”, And Misra confirmed, the government KNEW this for 2 years. They hid it during elections. The call only came once votes were counted. This isn’t bad luck. This isn’t Iran. This isn’t Trump. This is what 12 years of suit-boot economics, crony capitalism, and GDP optics actually looks like underneath. Rahul Gandhi called it in July 2025: “Indian economy is DEAD.” The Indian Express just put the post-mortem report on the table. They didn’t mismanage the economy. They HID the mismanagement from you; until after you voted. That’s not incompetence. That’s a betrayal. 🇮🇳 💔
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