सा विद्या या विमुक्तये

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@Sanatan_Science

Researcher : Jyotish | Mantra Vigyan | Puran || Herbs || Scientifically Religious✡️⚛️ Sanatani | Music देवभूमि | ब्राह्मणी 🇮🇳 नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे...🚩

उत्तराखण्ड Katılım Eylül 2013
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~Medical-Astrology~ चिकित्सीय_ज्योतिष चिकित्सीय ज्योतिष के विषय मे बात करती हूँ तो अक्सर लोग हैरान हो जाते हैं कि कैसे बिना जांच के पूर्व में हुए/वर्तमान के/या भविष्य में होने वालें रोगों के विषय मे बिना जाँच के सटीक जानकारी सिर्फ जातक की कुंडली से निकल आती है।
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आषाढ़ गुप्त नवरात्र को वाराही नवरात्र भी कहा जाता है, अगर आपको लगता है को आप किसी के द्वारा किए अभिचार कर्म से पीड़ित हैं तो भगवती वाराही के अश्वारूढ़ा स्वरूप का ध्यान करके वाराही नवरात्र की पंचमी तिथि को भगवती से दया और रक्षा को प्रार्थना करते हुए एक दिया लगाएं। कोई भी मंत्र, अनुष्ठान आदि करने की आवश्यकता नहीं है अगर बहुत इच्छा ही हो तो किसी विद्वान आचार्य से संपर्क करें अनुष्ठा हेतु....किंतु भगवती का केवल ध्यान कर दीपक समर्पण और प्रार्थना कोई भी कर सकता है।
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अश्वारूढ़ा वाराही भगवती का ये स्वरूप विजय देने वाला, मारण उच्चाटन और अन्य क्रूर तांत्रिक कर्मों/ काला जादू से रक्षा देने वाला कहा जाता है। भगवती सफेद अश्व पर विराजित हैं जिसका नाम अपराजित है, इस स्वरूप के दर्शन और ध्यान से मन को अडिगता मिलती है और सभी अभिचार कर्मों के दुष्प्रभाव का नाश होता है।
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वार्ताली देवी भगवती वाराही का ये स्वरूप धनुष, कमल और कर माला और वरमुद्रा धारण किये हुए है। 📌बहुत सारे शास्त्र सम्मत चित्र उपलब्ध ही नहीं हैं इसलिए चित्र वार्ताली देवी के मूल स्वरूप का नहीं है।
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कल से वाराही/गुप्त नवरात्र शुरू हैं📌 इंटरनेट पर मिलने वाले, विशेषकर "बीज" युक्त कठिन मंत्रों को प्रयोग करने से बचें। सादा सरल दुर्गा चालीसा और हनुमान चालीसा भी बहुत ही प्रभावी पाठ हैं। बीज मंत्रों की विशेष ऊर्जा बिना गुरु सानिध्य के आपके शरीर के ऊर्जा तंत्र को भी बिगाड़ सकती हैं। कुलदेवी का जरूर ध्यान, पूजा, अर्चना आदि करें, कुछ संभव न हो तो उनके नाम से केवल एक दिया लगाएं रोज़ सुबह शाम। गुप्त "नवरात्र" साधना/मंत्रजप/अनुष्ठान के लिए अति महत्वपूर्ण है। आप ग्रह शान्ति, समस्याओं के निवारण हेतु उपचारात्मक जप इत्यादि स्वयं कर सकते हैं तथा अनुष्ठान आदि किसी विद्वान आचार्य से करवाइए। जय माता की🚩
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संपूर्ण समस्याओं का एक महा उपाय 📌 आप सब लोगों ने एक शब्द सुना होगा "आत्म मंथन" कभी विचार किया है इस पर ? एक ऐसी शैली, एक ऐसी आदत है जो अगर आपके भीतर आप धारण कर पाए तो बहुत बार जब आपको पश्चाताप होता है की अरे मैंने यह क्या बोल दिया, मुझे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था, या मैंने यह क्या पूछा, यह तो मुझे पता ही था ऐसी हर वह स्थिति जो की आपको किसी भी प्रकार की रिग्रेट या बाद में होने वाले पश्चाताप में डाल देती है उसका एकमात्र कारण है कि हम चीजों के बारे में सोचते ही नहीं है हमारी पुरातन शिक्षा व्यवस्था, हमारी धार्मिक आस्था और हमारी संस्कृति और सनातनी सोच ही आत्म मंथन वाली है यानी हर बात, हर सोच, हर परिस्थिति, हर समस्या, हर वह चीज जो आपको कष्ट दे रही है या वह हर बात जो आपको अत्यंत आनंद प्रदान कर रही है उसके लिए आवश्यक है कि आप रात में सोने से पहले, मेडिटेशन के समय (या दिन में कोई भी ऐसा समय के आज के समय में ट्रैवल करते समय) आप 5 मिनट ऐसे निकाले कि आप उन विषयों के बारे में सोचें उनके दूरगामी परिणाम, उस स्थिति, उनको किस तरह से प्राप्त किया है, उसके भविष्य में होने वाले लाभ और हानि, वह नहीं होगा तो आप कैसे जीवन निर्वाह करेंगे या कैसे अपना जीवन प्लान करेंगे और अगर ऐसे ही परिस्थितियां रहती हैं तो आप उनके साथ कैसे सामंजस्य बिठाएंगे। यह सब प्रश्न जो आपको परेशान करते हैं.... वास्तव में इनका उत्तर आपके भीतर ही छुपा हुआ है आपने यह महावाक्य सुना होगा "अहम् ब्रह्मास्मि" तो मान के चलें कि ईश्वर का अस्तित्व स्वयं आपके भीतर है। आत्म मंथन मात्र एक प्रक्रिया है कि आप उस शक्ति से स्वयं को जोड़ सकें और अपने उत्तर प्राप्त करें, सफलता का मार्ग प्रशस्त करें और आने वाले अच्छे बुरे को देख सकते की क्षमता विकसित करें। चरक संहिता में वर्णित है। "यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे" तो सदैव याद रखें वह सब जो ब्रह्मांड के गर्भ में छुपा हुआ है वास्तव में वही सब आपके अंदर इस पिंड रूपी शरीर में भी सूक्ष्म रूप में उपस्थित है इसलिए जब भी मैं किसी जातक की कुंडली में स्वयं से कनेक्ट होने की 10% भी संभावना देखती हूं तो उसे बार-बार कहती हूं कि ध्यान करिए....स्वयं को जानने की और स्वयं के भीतर छुपी हुई शक्ति को प्रयोग करने की क्षमता को विकसित करने का एकमात्र उपाय है यह, और इस प्रक्रिया में मिलने वाले आनंद की पराकाष्ठा यहां बताना संभव नहीं है जब आप ध्यान करेंगे तो आप पाएंगे संसार में कोई और ऐसा माध्यम ही नहीं है बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड में कोई ऐसा माध्यम नहीं है, कोई ऐसा व्यसन नहीं है कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है, कोई ऐसा साधन नहीं है जो इस ध्यान से मिलने वाले आनंद की तुलना के योग्य है और सबसे बड़ी बात यह है कि यह आपको आनंद के साथ आत्म संयम भी देता है आपको किसी चीज, का किसी व्यक्ति का, किसी व्यसन का या किसी भी आदत का गुलाम नहीं बनाता बल्कि आपको स्वयं को साधने की क्षमता देता है। मैं आज बस आप लोगों से इतना कहना चाहूंगी कि आप जो भी बोलते हैं उसे बोलने से पहले, आप जो भी सोचते हैं, आप जो भी कहते हैं, आपने जो भी अनुभव किया, आपने जो सीखा, या आपने जो सुना.... उस पर आत्म मंथन करें, किसी एक कंक्लुजन पर नहीं पहुंचे बल्कि बहुत सारी शाखाएं निकाले, इतना विचार करें की आपसे उस बात का कोई भी पहलू अछूता न रह जाए। शिवाय नमः🚩
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Save this Post 📌 श्रावण - रविवार व्रत और पूजा शिवपुराण के अनुसार श्रावण मास के प्रत्येक रविवार को व्रत विशेषकर हस्त नक्षत्र से युक्त सप्तमी तिथि को सूर्य पूजा विशेष फलदायक होती है। श्रावण के रविवार को शिवपूजा पाप नाशक कही गयी है सूर्य देव शिव मंदिर में निवास करते है अतः शिव मंदिर में भोलेनाथ तथा सूर्य दोनों की की पूजा अर्चना करनी चाहिए। शिवपुराण में सूर्यदेव को शिव का स्वरूप व नेत्र भी बताया गया है, सूर्य और शिव की उपासना जीवन में सुख, स्वास्थ्य, काल भय से मुक्ति और शांति देने वाली मानी गई है।
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Astrology & Remedies ग्रहशांति के लिए औषधि स्नान सूर्य ग्रह📌 काश्मीरयष्टीमधुपद्मकैला, मनः शिलोशीरवसन्तदूतिभिः । सदारुभिः स्यादहिते खरांशौ, निमज्जनं नुः किल कर्मसिद्धयै ।। सूर्य की अनिष्ट-शान्ति के लिये केशर, जेठीमधु, कमलगट्टा, इलायची, मनःशिल, खस, देवदारु और पाटला से स्नान करना चाहिये। ये औषधि स्नान सूर्य की दशा अंतर में तथा सूर्य के कष्टकारी व् पाप भाव में गोचर में अवश्य करें। नित्य सूर्य द्वादशनाम का पाठ भी अत्यंत लाभकारी है।

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Astrology & Remedies ग्रहशांति के लिए औषधि स्नान सूर्य ग्रह📌 काश्मीरयष्टीमधुपद्मकैला, मनः शिलोशीरवसन्तदूतिभिः । सदारुभिः स्यादहिते खरांशौ, निमज्जनं नुः किल कर्मसिद्धयै ।। सूर्य की अनिष्ट-शान्ति के लिये केशर, जेठीमधु, कमलगट्टा, इलायची, मनःशिल, खस, देवदारु और पाटला से स्नान करना चाहिये। ये औषधि स्नान सूर्य की दशा अंतर में तथा सूर्य के कष्टकारी व् पाप भाव में गोचर में अवश्य करें। नित्य सूर्य द्वादशनाम का पाठ भी अत्यंत लाभकारी है।
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Serious concern in Rishikesh: Locals report a home CONVERTED into a Mosque drawing crowds from other states for Namaz. Residents claim they were told they're 'outsiders' in their own holy city 🤯
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शनि प्रदोष आज आज शिवालय में दीपदान करें। शनि पीड़ा, साढ़े साती इत्यादि में महादेव का प्रदोष विशेषकर शनि प्रदोष के दिन अर्चन अभिषेक कष्टहारी और अत्यंत लाभ देने वाला है।
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संतान सुख देने वाला प्रदोष व्रत शनि प्रदोष - कल मदनरत्न में भी वर्णित है कि शनिवार को पढ़ने वाला प्रदोष व्रत संतान सुख की प्राप्ति कराता है। प्रदोषव्रत को अलग अलग दिन में आने से इसका महत्व और अधिक हो जाता है केवल प्रदोष व्रत करके भी ग्रह जनित पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है। प्रदोष काल मे शिव परिवार( महादेव, अम्बिका, षडानन, गणपति, नंदी और कीर्तिमुख) का पूजन करें, मिट्टी के अभाव में हल्दी/रोली से बनाकर यथाशक्ति पंच/दश/षोडशोपचार पूजा करें, उसके बाद किसी नदी, तालाब या क्यारी में इनका विसर्जन कर दें। शिवालय में इस दिन 108/32 घी के दीपक लगाए, प्रयास करें मिट्टी के दिये हों अन्यथा आटे से दिए बनाकर, शिवलिंग के समक्ष दिए लगाए, परिक्रमा करें। सौभाग्वती स्त्रियाँ गौरी जी को श्रृंगार चढ़ाकर किसी भी सौभाग्यवती स्त्री (पुजारी परिवार/मान पक्ष) को दे सकती हैं। शनि साढ़ेसाती से प्रभावित व्यक्ति भी कल पूजा करें, शिवालय में शनि ग्रहजनित पीड़ा के निवारण के लिए दीपदान करें, कुंडली में कुपित (अगर योगकारक नही है) शनि के लिए कल शनि ग्रह की कारक सामग्री का दान करें। क्योंकि शनिवार व त्रयोदशी के साथ साथ अनुराधा नक्षत्र भी है।

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हरेर्नाम हरेर्नाम हरेर्नामैव केवलम्। कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यथा॥ कलियुग में, केवल हरि का नाम, हरि का नाम, हरि का नाम ही एकमात्र सहारा है, इसके अलावा कोई और गति नहीं है। कलियुग में, भगवान के नाम का जाप करना ही मुक्ति का एकमात्र साधन है।
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सोमवती अमावस्या कल📌
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🔴Astrology & Remedies🔴 सोमवती अमावस्या - कल 30/12/2024 पितृदोष निवारण, सौभाग्यवर्धन, कालसर्प दोष से सम्बंधित उपाय करें कल। सोमवती अमावस्या को सूर्यग्रहण के समान फलदायी कहा गया है, इस दिन किया गया स्नान, दान, जप, तर्पण आदि अनंत गुणा फल देता है। अमावास्या तु सोमेन सप्तमी भानुना सह। चतुर्थी भूमिपुत्रेण सोमपुत्रेण चाष्टमी।। चतस्रस्तिथयो स्त्वेताः सूर्यग्रहण सन्निभाः। स्नानं दानं तथा श्राद्धं सर्वं तत्राक्षयं भवेत्।। सोमवारी अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी एवं बुधवारी अष्टमी तिथीयां सूर्यग्रहण के समान फल देने वाली कही गयी हैं। इन तिथियों में किया गया स्नान, दान, जप, तर्पण आदि अनंत फलदायी कहा गया है। इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करना विशेष शुभ कहा गया है। वे जो पितृदोष से पीड़ित है पीपल 108 परिक्रमा "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र के साथ करें, अर्घ्य व जनेऊ अर्पित करें। वे जो पितृ कर्म के कर्तव्य में बंधे हैं प्रत्येक अमावस्या को अवश्य तर्पण आदि नियमों का पालन करें, कल परम पुण्यकारी सोमवती अमावस्या है आप स्वयं नही कर पा रहें है तो ब्राह्मण को बुलाकर विधि विधान से कर्तव्य का निर्वहन करें। याद रहे देव पूजा भाव प्रधान है पर पितृसत्ता के निमित्त किया जाने वाला कारक नियमपूर्वक व विधि विधान से किया जाना चाहिये। केवल इस कार्य से आप देखेंगे कि आप की बहुत सारी समस्याओं का स्वतः ही समाधान हो जाएगा। समय के साथ साथ अंतर महसूस होगा आपको। सौभाग्वती स्त्रियों के द्वारा तुलसी/पीपल की परिक्रमा कर सौभाग्यकारक शिव-पार्वती पूजा का विधान भी किया जाता है। जिसमे 108 परिक्रमा किन्ही 108 वस्तुओं फल, मेवे, सौभाग्य सामाग्री इत्यादि से पूर्ण कर, पूजा आदि कर, सभी वस्तुएँ सौभाग्यशाली स्त्री/ ब्राह्मणी को दे दी जाती हैं। मैंने आप लोगों से कहा था कि मैं एक ऐसे बहुत ही प्रभावशाली अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र के विषय मे बताऊंगी जिसका एक पाठ, शतरुद्री के तीन पाठों के समान फल देने वाला कहा गया है। यस्त्रिसंध्यं पठेच्छम्भोर्नाम्नामष्टोत्तरं शतम् ॥ शतरुद्रि त्रिरावृत्त्या यत्फलं प्राप्यते नरैः । स्तोत्र बहुत बड़ा है इसलिए यहां लिख पाना संभव नही है, आप स्तोत्र को हमारे blog पर प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही सोमवार व्रत की विशेषताओं और किये जाने वाले चंद्र ग्रह के उपायों पर भी लेख ब्लॉग में पोस्ट किए गए हैं। Blog का link आपको हमारे ट्विटर Bio में मिलेगा। sanatanandsciences.blogspot.com/2023/07/blog-p…

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उसके लिए मलमास में दान की बाध्यता नहीं है वो तो कभी भी कर सकते हैं और हमेशा करना भी चाहिए चाहे आप समय दें या समान
sanjeev kumar poddar🇮🇳@sanjeevk_poddar

@Sanatan_Science क्या केवल मालपुए और खीर ही दान करना चाहिए ? विद्या दान भी कर सकते हैं? मेरे पास एक पुराना लैपटॉप है ( वर्किंग कंडीशन) उसको मैं ग़रीब आदिवासी बच्चों की पढ़ाई के लिए देना चाह रहा था।

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अधिक मास में मालपुए- खीर का दान करना चाहिए। अधिकमास अब पूर्ण ही होने वाला है इसमें साधु,संत-समाज, ब्राह्मण, बहन, भांजी आदि को मालपुए का दान (दक्षिणा सहित) किया जाता है। अगर आपने भी नही किया है अभी तो अब कर दीजिए। कितने मालपुए? 33 33 ही क्यों❓ क्योंकि 11-11 दिनों का अंतर आने से 3 वर्ष के बाद पूरे 33 दिन का अधिक मास होता है तो प्रतिदिन एक कि गणना से 33 मालपुए मान लेते हैं। Picture Credit- pistachio doughnuts
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