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Sanchit Kulshresthaa (Advocate) 🇮🇳
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Sanchit Kulshresthaa (Advocate) 🇮🇳
@Sanchicasm
कुकर्मी कुसङ्गी कुबुद्धिः कुदासः कुलाचारहीनः कदाचारलीनः (हिंदू, सवर्ण, कायस्थ, कुलश्रेष्ठ)
बृज की कुंज गलियन में Katılım Nisan 2022
110 Takip Edilen723 Takipçiler
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भारतीय जनता पार्टी के मा. राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य श्री @NitinNabin जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

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As one of the proprietors of Baddie Janata Party me and my girls stand with the rise of Baddie Janata Party!
Our first modus operandi is to defeat the corrupt “Cockroach Janata Party,” then to walk with an alliance with BJP for a fearless, disciplined & developed Bharat. 🇮🇳🔥
CC - @_its_ishani_ , @_Moyu_____
@carat2002stay

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Urgent help needed 🙏 patient name Shivanshi sharma disease jaundice in
5-year-old child critical in Lok Nayak Hospital. Doctors not providing reports and saying no more chances of survive. Condition serious (high bilirubin & infection). Kindly intervene immediately. @JPNadda
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जब बिहार के @NitinNabin जी को बीजेपी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था तब लोग बोल रहे थे कि बिहार बंगाल के कायस्थ बीजेपी को समर्थन नहीं करेंगे तथा बीजेपी ने यही फैसला क्यों किया । किंतु कल के Result के बाद यह strategy काम करती हुई नजर आई । ना सिर्फ बिहार और असम में कायस्थ वोट बीजेपी की तरफ लामबंद हुआ बल्कि बंगाल में भद्रलोक के कायस्थ वोट भी बीजेपी की तरफ शिफ्ट हो गए । बंगाल में कई बीजेपी के विधायक कायस्थ समाज से जीत कर आए हैं।
कुशाभाऊ ठाकरे जी के बाद नितिन नबीन के रूप में दूसरे कायस्थ राष्ट्रीय अध्यक्ष बीजेपी को मिले हैं । कायस्थ समाज देश में काफी मात्रा में है तथा यह अधिकतर पढ़े लिखे होते हैं । सदियों से राजा के मंत्री के तौर पर कार्य करने के कारण सत्ता की समझ इस समाज को विरासत में मिली है । लाल बहादुर शास्त्री से लेकर, जेपी नारायण और बालठाकरे जैसे बड़े नाम इसी समाज से आते हैं । बंगाल में स्वामी विवेकानंद, सुभाषचंद्र बोस, रासबिहारी बोस इत्यादि इसी समाज का अंग थे । संविधान सभा में सच्चिदानंद सिन्हा एवं राजेंद्र प्रसाद जी भी कायस्थ ही थे, यहां तक के लेखनी से संविधान को सजाने वाले भी इसी जाति के थे । किंतु योगदान होने पर भी इस समाज को संविधान निर्माण में बहुत गिना ना जाना इतिहासकारों की भूल कह सकते हैं।
मध्यप्रदेश में सभी दलों में इस समय कायस्थों को बहुत ज्यादा राजनीति में प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है । इसका मूल कारण है कि यह समाज चुपचाप अपना कार्य करता है, पड़ता लिखता एवं मेहनत करता है और जाति से ऊपर उठकर देश के विषय में सोचता है । इस कारण इनके सामूहिक आंदोलन राजनैतिक मुद्दों पर अधिक दिखाई नहीं देते और प्रतिनिधित्व अधिकतर उनको मिल जाते हैं जिनकी जातियां एकजुट होकर राजनैतिक ताकत का प्रदर्शन करती हैं । इस कड़ी में पढ़ने लिखने वाले और चुपचाप मेहनत करने वाले ग्लैमर की दुनिया में अक्सर पीछे रह जाते हैं ।
किंतु लेखनी के धनी इस समाज के पास आमजन के विचार परिवर्तन करने की अदभुत क्षमता होती है । यह स्वयं संख्या में कम होकर भी जेपी आंदोलन की तरह इंदिरा की सत्ता के खिलाफ लाखों लोगों को खड़ा करने का हुनर जानते हैं । मुंशी प्रेमचंद, महादेवी वर्मा से लेकर अमिताभ बच्चन, सोनू निगम तथा खुदीराम बोस इत्यादि इस समाज का विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व दर्शाते हैं । कला, संस्कृति, लेखन, विचार में जातिगत पकड़ होने के कारण इन्हें सनातन धर्म का बौद्धिक क्षत्रिय कहा जाता है । विवेकानंद और श्री अरबिंदो जैसे विचारकों ने बंगाल में अंग्रेजों को वैचारिक रूप से पराजित किया था । आज भी कई कायस्थ राष्ट्रविरोधी ताकतों से वैचारिक रूप से लोहा लेते आपको नजर आ जाएंगे ।
- डॉ शुभम वर्मा
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@DammnGirll Tumhare liye bhi ek khride hain 😌
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