Sanjay Bhatnagar
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Sanjay Bhatnagar
@Sanjaykatra
Nationalist•Yogi as PM. कबीरा खडा बाजार में मांगे सब की खैर ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर.
Stockholm, Sweden Katılım Ekim 2021
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BREAKING: UP ATS foils major terror plot at Lucknow's Charbagh Railway Station.
Four suspects arrested while planning to sabotage signal boxes and railway infrastructure through arson or explosives.
The module was allegedly directed by a Pakistan-based handler via social media and encrypted apps.
Flammable substances, multiple smartphones, and extremist materials recovered.
Indian Railways has strengthened security across all stations and assured that passenger safety remains the top priority.
Swift action by UP ATS prevents potential disruption. Investigation underway.
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नीतीश कुमार के राज्य में सबसे तेजी से कोई "अमीर" बना है, तो वो हैं कुछ भ्रष्ट अधिकारी!😱
बिहार के किशनगंज में पदस्थापित SDPO गौतम कुमार का मामला चौंकाने वाला है।
EOU की जांच में पता चला कि SDPO की पत्नी-प्रेमिका ही नहीं, बल्कि नौकरानी भी करोड़पति है।
जांच में खुलासा हुआ कि इनके पास 80 करोड़ से ज्यादा की बेनामी संपत्ति है।
हैरानी की बात यह है कि नौकरानी पारो के पास भी करोड़ों की संपति है। 35 लाख की थार से घर का काम करने आती थी।

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यहाँ हम EMI भर भर के टूट रहे हैं… और उधर नौकरानी 35 लाख की कार से झाड़ू पोछा मारने आ रही है
बिहार में तो कहानी ही उलटी चल रही है
किशनगंज में तैनात SDPO गौतम कुमार के यहाँ छापेमारी में ऐसा खुलासा हुआ कि लोग सोच में पड़ गए…
2.5 करोड़ का बंगला
चाय बागान
लग्जरी गाड़ियां
25 प्लॉट
और तो और… नौकरानी भी करोड़पति निकली
अब समझ नहीं आ रहा…
नौकरी करें बिज़नेस करें या सीधा झाड़ू पोंछा जॉइन कर लें
देश बदल रहा है… या फिर सेटिंग ही सबसे बड़ा टैलेंट है

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आज शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले निजी स्कूल धीरे-धीरे एक व्यवसायिक मंडी में बदलते नजर आ रहे हैं। पहली कक्षा जैसे बुनियादी स्तर पर भी हजारों रुपये की किताबें थोपना यह दिखाता है कि शिक्षा अब सेवा नहीं, बल्कि मुनाफे का जरिया बन चुकी है। जब एनसीईआरटी की किताबें सस्ती और पर्याप्त हैं, तो फिर निजी प्रकाशनों का यह खेल आखिर किसके इशारे पर चल रहा है?
अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें मजबूरी में वही किताबें खरीदनी पड़ती हैं जो स्कूल तय करता है। खुले बाजार से खरीदने की आजादी केवल कागजों में है, जबकि हकीकत में स्कूल और दुकानों के बीच गठजोड़ साफ नजर आता है। यह सीधा-सीधा आम जनता की जेब पर हमला है, जिसे शिक्षा के नाम पर वैध बना दिया गया है।
हर साल सिलेबस और किताबें बदलने का खेल भी कम चिंताजनक नहीं है। बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा ध्यान इस बात पर रहता है कि पुरानी किताबें बेकार हो जाएं और नई खरीदनी पड़े। इससे न सिर्फ आर्थिक बोझ बढ़ता है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े होते हैं—क्या वाकई पढ़ाई बदल रही है या सिर्फ कमाई का तरीका?
सरकारी तंत्र की भूमिका भी यहां संदेह के घेरे में है। गाइडलाइन होने के बावजूद अगर निजी स्कूलों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संकेत है कि या तो सिस्टम कमजोर है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं। जब नियम लागू ही नहीं होंगे, तो उनका अस्तित्व केवल दिखावा बनकर रह जाएगा।
आखिरकार इसका सबसे बड़ा नुकसान मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को उठाना पड़ता है। शिक्षा, जो समान अवसर देने का माध्यम होनी चाहिए थी, अब असमानता को और गहरा कर रही है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में अच्छी शिक्षा केवल उन्हीं के लिए रह जाएगी जो इसकी ऊंची कीमत चुका सकते हैं।

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यह ईरान के मिलिट्री कमांडर रहे कासिम सुलेमानी की भतीजी हमीदेह सुलेमानी है
इन्हें इनकी बेटी उनके पति सहित चार अन्य ईरानी मूल के लोगों को अमेरिका का ग्रीन कार्ड रद्द करके हिरासत में रखा गया है और उन्हें ईरान डिपोर्ट करने की तैयारी है
उन्हें आर्मेनिया के रास्ते ईरान बॉर्डर पुलिस को सौपा जाएगा
यह अमेरिका घूमने आई थी और खुद को सरेंडर कर दिया कि उसे ईरान में जान को खतरा है उसे वक्त ओबामा राष्ट्रपति थे और ओबामा के दौर में ऐसे हजारों मुसलमानो ने अमेरिका की नागरिकता ले ली
अमेरिका ने इन्हें शरण दिया नागरिकता दी ग्रीन कार्ड दे दिया यह वहां वेलसेटल हो गई
शानदार पश्चिमी जीवन का आनंद उठाने लगी हमर के अलावा दुनिया भर के लग्जरी चीज इनके पास थी
लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने जब इन के सोशल मीडिया हैंडल पर नजर रखा तब पता चला की यह ईरान अमेरिका लड़ाई में अमेरिकी जहाज के गिराए जाने पर ख़ुशी मना रही है अमेरिकी पायलट की खोज पर यह कह रही थी कि काश वह पायलट ईरान के लोगों के हाथ लग जाए
यह सब चीज भारत जैसे देश में चलता है भारत में आप नमक ह***मी कर सकते हो यहां का खाकर यहां पैदा होकर तुम अपने गहने ईरान को दान कर सकते हो लेकिन अमेरिका जैसे देश में यह नहीं चलता है
तुरंत अमेरिका के विदेश मंत्री और उपराष्ट्रपति तक का प्रेस कॉन्फ्रेंस हुआ अभी हमीदेह सुलेमानी सहित पांच ईरानियन को गिरफ्तार किया गया है और अमेरिकी सरकार ने बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया पर नजर रखने का आदेश दिया है और कहां है जो भी कोई इस युद्ध में अमेरिका का मजाक उड़ाएगा या ईरानी हमले पर खुशी जताएगा उसे उसके मूल देश डीपोर्ट किया जाएगा चाहे वह 25 पीढ़ी से अमेरिका में क्यों न रह रहा हो
इसीलिए मैं कहता हूं भारत में भोंकने की जितनी आजादी है इतना दुनिया के किसी भी देश में नहीं है


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5 लाख की डाउन पेमेंट और 84 महीने की EMI भरते ही कुछ लोगों के भीतर का “माफिया डॉन” जाग उठता है… और जैसे ही वे "थार" की सीट पर विराजमान होते हैं, उन्हें लगता है कि सड़क अब उनकी पुश्तैनी जागीर है।
ट्रैफिक नियम? वो क्या होता है भाई!
इंडिकेटर देना उनकी शान के खिलाफ, और हॉर्न बजाना जैसे उनका जन्मसिद्ध अधिकार है... और बाकी लोग सड़क पर क्यों हैं – ये सवाल उन्हें उतना ही परेशान करता है जितना EMI की अगली किस्त।
काली थार, करिया चश्मा और खिड़की से आधा शरीर बाहर निकालकर चलाने का जो “टशन” है, वो भले ही उन्हें किसी फिल्मी विलेन का एहसास दिलाए, लेकिन पीछे चल रही गाड़ियों के लिए वो “सस्पेंस थ्रिलर” बन जाता है कि अब ये भाई साहब अगला स्टंट क्या करेंगे।
दरअसल हमें समस्या ये नहीं कि,
आपने थार खरीदी है, समस्या ये है कि आपने उसे “जिम्मेदारी” की जगह “रौब दिखाने का लाइसेंस” समझ लिया है।
इसलिए याद रखिए कि –
सड़क पर आपकी गाड़ी जितनी बड़ी है, आपकी जिम्मेदारी उससे भी बड़ी होनी चाहिए... वरना ये टशन कभी भी दुर्घटना में बदल सकता है, और फिर ना EMI काम आएगी, ना एटीट्यूड।
~ साभार: @NCIBHQ
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5 लोग जो 2029 मैं लोकसभा चुनाव haarenge.
मोदी
धर्मेन्द्र प्रधान
रविशंकर प्रसाद
Sambit patra
बांसुरी स्वराज
इन्होंने Gen को धोखा दिया है और Hindu एकता को palita लगाया है
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
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Nobody give source code not even Russia.amca stuck bcos GE is not supplying engine on time so like China we will have to do reverse engineering for jet engine with pvt sector. no other way than buying of reafael are time buying and only for temporary arrangements. That's why we are continuously working on tejas. at present we have almost all the technology required for fighters except jet engine so working on drone n missiles a good alternative of costly fighter jets.
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India paid almost Double the price per #Rafale Fighter Jet ✈️
The deal size was significantly cut down to 36.
International whistle blowers wrote about the fishy deal.
And now this - France refuses to give the source code access to India.
From Day-1 there were questions around the deal and now we have this…..
People might have forgotten but the reality is #ChowkidarHiChorHai
#ChowkidarChorHai #RafaleDeal #RafaleSourceCode #RelianceDefence #RafaleScam #Rafale

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खुरपेंच : देश में बीमारियां बढ़ रही हैं, सड़कों से लेकर मॉल तक धड्डले से खराब खाना बिक रहा ? FSSAI कुछ कर क्यों नहीं रहा?
डिपार्टमेंट : सब कुछ चंगा सी ,
खुरपेंच: लेकिन आपके कुछ अधिकारी गलत तरीके से भर्ती हुए हैं, किसी के पास एक्सपीरियंस नहीं है , कुछ सलेक्शन क्राइटेरिया ही नहीं पूरा करते ?
डिपार्टमेंट : सबूत क्या है?
खुरपेंच : ये लो सारे सबूत
डिपार्टमेंट : ये डॉक्यूमेंट प्रॉपर चैनल से नहीं है, ये विदेशी धरती से साजिश रची जा रही है इसमें फॉरेन फंडिंग इन्वॉल्व है, डिपार्टमेंट की छवि धूमिल की जा रही, तुमको जेल भिजवाएंगे,
खुरपेंच : तो फिर बाकी एक्सपोज के लिए तैयार रहिए।
ThePrintIndia@ThePrintIndia
‘Coordinated conspiracy of national scale, foreign funding’—FSSAI’s case against social media users Ananya Bhardwaj @bhardwajananya and Samridhi Tewari @samridhitewari report for ThePrint Illustration: Sonali Dub @sonalidub theprint.in/india/coordina…
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@garvit_sethii Most of the guards in my society are Gen and residents are quota class.
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Met a Rapido rider yesterday while heading back home.
Casually, he started sharing his story: works a full-time accounts job, earns barely ₹20,000 a month, and drives Rapido after office just to support his family. He’s the sole earner.
Then he said something that stayed with me:
“I couldn’t get into a good college… I come from the general category.”
This is the reality no one talks about.
People assume General Category = privilege, wealth, advantage. But on the ground, many are struggling just to survive no reservations, no support, no safety net.
Working two jobs. Competing in an uneven system. Still being labelled as “privileged” or “oppressors.”
This is why I oppose reservation based on caste !
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