ShaiQbit
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@ShaiQbit
मैं ज्ञान में ब्राह्मण हूँ, व्यवस्था में वेश्य हूँ, रणभूमि पर मैं क्षत्रिय हूँ, और सेवा करने मैं शुद्र हूँ...अत: मैं सिर्फ हिन्दू🚩

It’s honestly hard to understand how someone can be this cruel 😔

गौतमबुद्धनगर में प्रशासन ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो लंबे समय से मेहनत करने वाले श्रमिकों के हक में एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगाता है...!!✌🏼 औद्योगिक शांति बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी ने श्रमिकों से सहयोग की अपील की है, लेकिन इस बार सिर्फ अपील नहीं कुछ ठोस फैसले भी लिए गए हैं। अब ओवरटाइम का भुगतान दुगनी दर से होगा और उसमें किसी भी तरह की कटौती नहीं की जा सकेगी। साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य रहेगा, और अगर रविवार को काम लिया जाता है तो उसका भी डबल भुगतान सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा सभी श्रमिकों को हर महीने की 10 तारीख तक वेतन और वेतन पर्ची देना अनिवार्य किया गया है, जबकि 30 नवंबर तक बोनस देने का प्रावधान भी तय किया गया है। यही नहीं, हर फैक्ट्री में यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति, शिकायत पेटी और श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए कंट्रोल रूम जैसी व्यवस्थाएं भी शुरू की जा रही हैं, ताकि मजदूर अपनी बात खुलकर रख सकें। सच तो यह है कि मजदूर किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी होते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा अन्याय भी अक्सर इन्हीं के साथ होता रहा है कहीं जबरन काम, कहीं समय पर वेतन नहीं, तो कहीं शोषण। ऐसे में गौतमबुद्धनगर की यह पहल एक राहत भरी खबर जरूर है। अब देखने वाली बात यह होगी कि ये फैसले कागजों तक सीमित रहते हैं या ज़मीन पर भी उतनी ही मजबूती से लागू होते हैं। अगर सही तरीके से यह नियम लागू हुए, तो यह सिर्फ एक जिले की नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकते हैं।

IPL stadiums में फैंस को लूटा जा रहा है जो स्नैक्स बाहर 50 रुपए में मिलते हैं, वही अंदर 100 रुपए में बेचे जा रहे हैं असली कीमत छिपाने के लिए नकली MRP स्टिकर चिपकाकर पुराने को हटा दिया जाता है..!

राजस्थान के नागौर में एक ऐसा किस्सा सामने आया है, जिसे पढ़कर लगता है भारत में EV आगे बढ़ रही है, लेकिन कुछ लोग अब भी बैटरी से नहीं, भ्रम से चलते हैं...!!😲 जोधपुर के पुनाराम ने बड़ी उम्मीदों से इलेक्ट्रिक कार खरीदी थी सोचा था धुआँ नहीं, खर्चा नहीं, PUC का झंझट नहीं…पर नागौर पुलिस ने साबित कर दिया कि भारत में कुछ भी संभव है। घटना कुछ इस प्रकार हैं...कार को रोककर ASI साहब ने धड़ाक से PUC चालान ठोक दिया। अशोक पंवार ने विनम्रता से समझाया साहब, यह इलेक्ट्रिक कार है… इसमें तो धुआँ निकलता ही नहीं। लेकिन जवाब सुनकर विज्ञान भी रो पड़े मशीन NIL दिखा रही है, इसलिए चालान होगा। और फिर 1500 रुपये PUC चालान + 200 रुपये टिंटेड ग्लास = 1700 की तकनीकी लूट पूरी। अब सवाल यह है....ये पुलिस वाले ज्यादा अनुशासित हैं, अनभिज्ञ हैं, या फिर चालान काटने में ही एडवांस्ड टेक्नोलॉजी अपनाई जाती है ? क्योंकि जो लोग EV से प्रदूषण ढूंढ सकते हैं, वो कल साइकिल से तेलपाइप धुआँ भी ढूंढ लें, तो भी आश्चर्य नहीं होगा। यह घटना सिर्फ एक चालान नहीं,बल्कि सिस्टम की पुरानी सोच पर तगड़ा तमाचा है जहाँ तकनीक बदल गई है, पर नियम लागू करने वाले दिमाग आज भी वहीं के वहीं खड़े हैं।
