Shashank
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@Shashank1230341
🚩 सनातन सोच | भारतीय आत्मा श्रद्धा में विवेक,विचारों में धर्म।
📍 भारतवर्ष 🇮🇳 | सनातन भूमि Katılım Aralık 2025
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कांग्रेस महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कभी गंभीर नहीं रही, और यही कारण है कि आज उसकी नीयत पर सवाल उठ रहे हैं।
#MahilaVirodhiCongress
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आँखों 👀 की बात है
आँखो को ही कहने दो !
कुछ लफ़्ज़ -लबों पर मैले हो जाते हैं !
प्रेमिकाएं- पत्नी की बराबरी नही कर सकती है
सिंदूर सिर्फ रिश्तों का प्रतीक नही,
प्रेम का सबसे सशक्त हस्ताक्षर है
सिंदूर की ताकत के आगे हजारों प्रेमी/प्रेमिकाएं निरीह हो जाते हैं
सात फेरे सिर्फ रस्म नही -पूरे ब्रम्हांड की जुगल परिक्रमा है
हजारों प्रेमिकाएं मिलकर भी एक पत्नी से गौण ही रहेगी
प्रेमिकाओं का पत्नी हो जाना
इस सृष्टि की सबसे सुंदर घटना है❤️

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#मातृत्व_की_यात्रा आसान नहीं होती,
यह एक स्त्री की देह, मन और आत्मा से
लिखी गई सबसे कठिन इबारत होती है।
इतनी पीड़ा, इतना असह्य दर्द कि शरीर टूटकर रह जाता है।
माँ जन्म नहीं देती,
वह खुद को चीरकर- एक जीवन को रास्ता देती है।
लेबर रूम की वह अँधेरी जगह जहाँ न अपना दिखता है, न कोई परिचित चेहरा
पसीना ठंडा पड़ जाता है,
आँखों के सामने अँधेरा छा जाता है और हर साँस एक युद्ध बन जाती है।
वह चीखती है - क्योंकि दर्द असहनीय होता है।
वह रोती है- क्योंकि उसका शरीर जवाब देने लगता है।
और तब भी सुनती है
“इतना क्यों चिल्ला रही हो,
बच्चा पैदा कर रही हो, तो नखरे क्यों?”
जैसे पीड़ा पर भी स्त्री से शालीनता की उम्मीद हो।
कभी लापरवाही,
कभी लालच—
कुछ पैसों के लिए
नॉर्मल डिलीवरी को
ऑपरेशन में बदल दिया जाता है,
और एक औरत का जिस्म
हमेशा के लिए बदल जाता है।
निशान रह जाते हैं—
देह पर भी और आत्मा पर भी।
#मातृत्व_का_सुख आसान नहीं होता।
स्त्री जितना कोई नहीं टूटता।
वह अपनी जान दाँव पर लगाकर
एक और जान को जन्म देती है।
वह खुद को पीछे रखकर
किसी और का भविष्य बनाती है।
जब वह माँ बनती है,
तो केवल बच्चा नहीं जन्म लेता—
उस दिन
उसकी नींद,
उसका शरीर,
उसकी पहचान
और उसका जीवन
सब बदल जाता है।
मातृत्व बलिदान है।
मातृत्व साहस है।
मातृत्व वह युद्ध है
जिसे स्त्री
मुस्कुराकर लड़ती है
और दुनिया
अक्सर देख ही नहीं पाती।

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@DrGudiyaa ये पंक्तियाँ कविता नहीं, आत्मा पर पड़ा हुआ वो हस्ताक्षर हैं, जहाँ पीड़ा स्याही बन जाती है और प्रेम अर्थ।💐💐👌👌
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