सुमन

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सुमन

सुमन

@Shubhra_subh

I shall overcome someday

Lucknow, India Katılım Eylül 2018
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
पहला सब कुछ विशेष होता है।पहली किताब हाथ में है।रह जाना मुझमें इतना ही" कविताओं का संग्रह नहीं है। यह मेरी आत्मा का एक हिस्सा है, मैंने इसमें अपने भीतर की दुनिया को उकेरा है, और शायद इसमें आप अपनी दुनिया की झलक भी देख सकें।आपका स्नेह मेरे लिए अनमोल होगा amzn.in/d/bDd0jFI
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
वो जो धूप को कंधों पर ढोते हैं और शाम को थककर अपने ही साए में बैठ जाते हैं उनके हाथ सिर्फ ईंट नहीं उठाते वो अधूरे सपनों का बोझ भी उठाते हैं किसी की बालकनी से दिखती रोशनी में उनकी आँखों की नींद जलती है कितनी अजीब बात है शहर उन्हें पहचानता नहीं पर हर रास्ता उन्हीं से होकर गुजरता है
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
जिंदगी एक अधूरी पंक्ति है जिसे हम हर दिन थोड़ा-थोड़ा पूरा करते रहते हैं। #hindipoetry
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
पहाड़ों की उन ढलानों पर अब भी कहीं बची होगी हमारी साथ चली हुई वह पगडंडी जहाँ हम खामोशी से बाते कर रहे थे और मैंने तुम्हारी चुप्पी को अपनी सबसे प्रिय स्मृति की तरह सहेज लिया था। अजीब होते हैं ऐसे रास्ते वे कहीं पहुँचाते नहीं, फिर भी मंजिलों से प्रिय होते हैं
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
स्त्री जब लौटती है… तो खाली नहीं लौटती, वह अपना पूरा आकाश साथ लेकर लौटती है। ✨
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हिंदी प्रेमम्
किसी की नज़र में रहना होती है खुशनसीबी नज़र से उतरना है अज़ाब के आने जैसा नज़र से गिरना निष्कासित कर दिया जाना जैसे अपने ही बनाए स्वर्ग से कभी कभी लग जाती है ख़ुद को ख़ुद की भी नज़र। • सुमन शर्मा @Shubhra_subh
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हिंदी प्रेमम्
जब कोई पास होकर भी करीब न हो, तो उसके लिए तड़पना उन धड़कनों की तौहीन है, जो कभी उसके नाम पर धड़कती थीं तौहीन है उन पलों की जब वो सबसे करीब था • सुमन शर्मा @Shubhra_subh
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Mukesh Kumar Sinha
Mukesh Kumar Sinha@Tweetmukesh·
"इश्क" है मेरे रफ कॉपी का वो अंतिम पन्ना जहां बेवजह बेतरतीब अनगढ़ तो कभी-कभी बेहद सलीके से लिखा था हजारो बार सिर्फ तुम्हारा ही नाम हर नए कलम से निकले स्याही के शुरुआती अंश पर, लिखा होता था तुम्हारा ही नाम समझे न मेरे इश्क सहेज रखा है मैंने इश्क का पन्ना ! ~मुकेश~
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
मैंने जाना, प्रेम किसी और की प्रतीक्षा में ठहर जाना नहीं होता, प्रेम तो वह जगह है जहाँ स्त्री अपने भीतर सुरक्षित रहती है। अब मैं लौट आई हूँ अपने ही पास अपने स्वाभिमान की उजली देहरी पर।
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
जो बांधे वो प्रेम नहीं।प्रेम तो मुक्त करता है
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
मैंने भरोसे को एक छोटे से दीपक की तरह हथेलियों में बचाकर रखा था, पर हवा बाहर से नहीं आई वो तो उसी ने बुझाया जिसके लिए मैं अँधेरे से लड़ रही थी…
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
तुम्हारा नाम बुदबुदाती हूं कलमे की तरह, हर लफ्ज़ में तुम ही हो, जैसे कोई दुआ। #jokahanahigaya #DilseLikha
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
सभी को शुभकामनाएं🙏❤️🌺
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
तुम्हारेऔर मेरे मिलन से जो राग जन्म लेता है, वही सृष्टि की सबसे मधुर धुन है।
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Mukesh Kumar Sinha
Mukesh Kumar Sinha@Tweetmukesh·
मन में तुम थी, शब्दों में ढल गई एक बेचैन-सी प्रेम कविता। कहीं तुम ही तो नहीं या फिर मैं ही प्रेम हूँ? तुम्हारा दिखना, मेरा लिखना! दरम्यान बहती थोड़ी-सी हलचल, और सागर-सा सुकून। ये प्रेम है, या कोई और नाम, क्या फर्क पड़ता है… जब हर बार तुम आती हो, तो मैं पूरा हो जाता हूँ।
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सुमन
सुमन@Shubhra_subh·
सुकून है, यूं ही चुप तुम्हें भी ख़बर हुए बिना तुम्हें देखते रहना न आवाज़, न हलचल, बस एक मौन में तुम्हारे साथ होना। ©सुमन शर्मा
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