Sabitlenmiş Tweet

शीर्षक: मनुष्य का मोल
-----------------------
प्रकृति ने दिया हमें ज्ञान और उजियारा,
पर हम ही भूल गए उसका सच्चा सहारा।
जब बुद्धि से रचते हैं विनाश का व्यापार,
तब गिरता है इंसान अपने ही स्तर के पार।
जिसे छोटा समझा, वही रेशम बुन जाता,
अपने जीवन से भी संसार को सजा जाता।
हम ऊँचे होकर भी अक्सर राह भटक जाते,
अपने ही कर्मों से खुद को छोटा कर जाते।
सृजन में ही छिपा है जीवन का असली मान,
विनाश की राह बस देती है क्षणिक पहचान।
जो देता है जग को, वही सच में बड़ा होता,
जो छीनता रहता है, वो भीतर से खोटा होता।
— ✍️ आशुतोष पाणिग्राही।

हिन्दी





















