Singh

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@Singh2571350813

Katılım Temmuz 2024
37 Takip Edilen5 Takipçiler
ameesha patel
ameesha patel@ameesha_patel·
GADAR 3 will come fr sure and JAB aayegi . Theatre mein hungama mach Jayega . With audiences love and gods blessings .. 500 cr is just the minimum nos at the box office for a brand like GADAR 👌👌🙏🏻❤️and this time the scale and script willl be even bigger and dhamakedar . Be prepared
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Rahul Gandhi
Rahul Gandhi@RahulGandhi·
पटना में कल अपने रोज़गार का हक़ मांगते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों को बिहार पुलिस ने बेरहमी से पीटा - फिर से। बेरोज़गार युवाओं को BJP का जवाब - लाठी। भारत में आज सबसे बड़ी बीमारी बेरोज़गारी है और इसकी सबसे भयंकर मार बिहार और उत्तर प्रदेश के युवाओं पर पड़ रही है। लाखों युवा डिग्री और क़ाबिलियत हाथ में लेकर दर-दर भटक रहे हैं। मगर BJP की सरकार को न इनकी परवाह है, न आपकी। जब युवा सड़कों पर उतरकर अपना हक़ मांगते हैं, उनके हाथ में रोज़गार नहीं - पीठ पर लाठियां रख दी जाती हैं। भारत का युवा BJP के झूठ से तंग आ चुका है - वो अब चुप नहीं बैठेगा। और, कांग्रेस उनके साथ हर मोड़ पर खड़ी है।
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Pappu Yadav
Pappu Yadav@pappuyadavjapl·
शिक्षक अभ्यर्थियों पर बर्बर लाठीचार्ज बीजेपी सरकार का युवा, बिहार, रोजगार विरोधी सोच का नग्न प्रदर्शन है भ्रष्ट जनता पार्टी के ख़िलाफ़ युवाओं को महासंग्राम का ऐलान करना चाहिए इनके नुमाइंदों के मुंह पर कालिख पोत दो!
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Tejashwi Yadav
Tejashwi Yadav@yadavtejashwi·
अपने-अपने बच्चे को मंत्री बना लो, युवाओं पर लाठी चला दो! बिहार में यही हो रहा है। NDA के नेताओं ने बिना चुनावी प्रक्रिया में भागीदार किये, अपने बच्चों को मंत्री बना दिया। लेकिन बिहार के लाखों युवा, जिन्होंने सालों मेहनत कर पढ़ाई की है, उनसे चुनाव से पूर्व NDA के नेताओं द्वारा वादा किया गया था कि TRE-4 की वैकेंसी जारी की जाएगी। लेकिन सरकार गठन के 6 महीने बाद भी TRE-4 का विज्ञापन नहीं निकला है। उल्टे वैकेंसी की मांग करने पर लाठियां बरसाई जा रही है। बिहार के युवाओं से इतनी नफरत क्यों है NDA सरकार को? क्यों उन पर अत्याचार किया जा रहा है? वे तो बस वादा निभाने के लिए कह रहे हैं, जिस वादे के आधार पर उनसे वोट मांगा गया था? ये युवा बस अपना अधिकार मांग रहे हैं, वे केवल परीक्षा आयोजित करने के लिए कह रहे हैं। ताकि अपनी प्रतिभा दिखा सके। लेकिन रोजगार विरोधी ये सरकार कर रही है अत्याचार, NDA की युवाओं से वादाखिलाफी नहीं भूलेगा बिहार #Bihar #RJD
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शिक्षक अधिकार मंच 𓂃🖊
TRE 4 के लिए यह हमारी आखिरी और निर्णायक लड़ाई है। इसे हम सभी को मिलकर लड़ना होगा। यकीन मानिए, इसके बाद चाहे TRE 4 आए या न आए, हम फिर किसी से गुहार लगाने नहीं जाएंगे। इसीलिए आप सभी से आग्रह है कि 8 मई को अपने सभी जरूरी काम छोड़कर TRE 4 की मांग को मजबूत करने हेतु पटना कॉलेज परिसर में एकजुट होकर पहुंचें। आपकी उपस्थिति ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। धन्यवाद 🙏 #BPSC #BPSCTRE4 #BPSC_TRE4 #TRE4 #TRE #BPSCTRE #BPSC_TRE #Bihar
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🌼🌼🌻मयंक कुमार पटेल ⚔️🌾🌷
8 मई को आंदोलन बहुत महत्वपूर्ण हैं. ये छात्रों का आंदोलन हैं ये आपका आंदोलन आप सभी का स्वागत हैं. इस बार निर्णायक बना देना हैं. सबका साथ हैं 💪 बस कमी हैं तो आपके भीड़ की एक जनसैलाब की. 8 मई जनसैलाब = TRE4 नोटिफिकेशन
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Singh
Singh@Singh2571350813·
@PratikVoiceObc To pakistan chale jao phir ohi pe tumhara vishwas hai....
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Pratik Patel
Pratik Patel@PratikVoiceObc·
क्या आपको - लोकतंत्र, - सुप्रीम कोर्ट, - चुनाव आयोग, - नेशनल मीडिया, - ED,CBI, इनकम टैक्स इनमें से किसी पर भरोसा है..? मेरा तो अब नहीं रहा!
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Tejashwi Yadav
Tejashwi Yadav@yadavtejashwi·
𝟏𝟕 महीनों की महागठबंधन सरकार में मेरी विशेष पहल पर शिक्षा विभाग को राजद कोटे में लेकर सर्वप्रथम युद्ध स्तर पर शिक्षा विभाग में 𝐓𝐑𝐄-𝟏 और 𝐓𝐑𝐄-𝟐 के अंतर्गत निर्धारित समय सीमा के अंदर बिना किसी पेपरलीक, संपूर्ण पारदर्शिता के साथ रिकॉर्ड 𝟐,𝟐𝟎,𝟎𝟎𝟎 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देकर ज्वाइनिंग कराई। हमने 𝐓𝐑𝐄-𝟑 की भी नियुक्ति प्रक्रियाधीन कराई लेकिन जनवरी 𝟐𝟎𝟐𝟒 में हमारे सरकार से हटते ही पेपरलीक के कारण 𝐓𝐑𝐄-𝟑 को रद्द किया गया और फिर यह परीक्षा भी विलंब से हुई। फिर चुनावी साल 𝟐𝟎𝟐𝟓 में वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने लिखा-लिखाया ट्वीट चिपका कर युवाओं से वादा किया था कि बिहार में सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की रिक्तियों की गणना कर जल्द ही टीआरई-𝟒 परीक्षा आयोजित की जाएगी। आज उस घोषणा को लगभग एक वर्ष बीत चुका हैं लेकिन अब तक 𝐓𝐑𝐄-𝟒 की वैकेंसी तक जारी नहीं हुई है। 𝐁𝐏𝐒𝐂 कैलेंडर के अनुसार यह परीक्षा अगस्त 𝟐𝟎𝟐𝟒 में ही हो जानी चाहिए थी, लेकिन चुनाव आयोग, तंत्र और 𝟏𝟎 हज़ारिया की बदौलत सत्ता हड़पने वाली कुर्सीबाज भाजपा-जदयू सरकार युवाओं की जरूरत को कभी समझ ही नहीं पाई। फिर साल 𝟐𝟎𝟐𝟓 के अक्टूबर में परीक्षा कराने की बात कही गई, ताकि चुनावी आचार संहिता लागू होते ही परीक्षा टल जाए, ऐसा ही हुआ। चुनाव हो गए, सरकार बन गई, महीनों बीत गए लेकिन आज भी शिक्षक अभ्यर्थी इंतजार ही कर रहे हैं। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री रहते हुए 𝟏𝟕 महीने में मैंने 𝟓 लाख युवाओं को नौकरियां दी और 𝟑,𝟓𝟎,𝟎𝟎𝟎 से अधिक नौकरियों की प्रक्रिया शुरू करवाई। लेकिन आज की डबल इंजन सरकार बार-बार अकारण परीक्षा टालकर बहाना बनाकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। अभ्यर्थियों की आयु सीमा पार हो रही है, उनका धैर्य जवाब दे रहा है। हर युवा नौकरी पाकर अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाना चाहता है, अपने परिजनों के सपनों को पूरा करना चाहता है। भले ही चुनाव जीतने के लिए भाजपा-जदयू ने बड़े-बड़े झूठे आसमानी वादे किए हों लेकिन ये युवाओं के हित से जुड़ा मामला है। मेरी एनडीए सरकार से अपील है कि टीआरई-𝟒 की वैकेंसी अविलंब जारी की जाए। क्योंकि यह लाखों युवाओं के भविष्य और उनके परिवार की उम्मीदों का मामला है। मेरी अपील है कि कुर्सी की अदला-बदली में भाजपा-जदयू सरकार बिहार के लाखों युवाओं के हक-अधिकार, मांगों, आकांक्षाओं, उम्मीदों और सपनों का क़त्ल ना करे। #TejashwiYadav #BPSC_TRE4
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Mukesh Khanna
Mukesh Khanna@actmukeshkhanna·
कुत्ते की दुम टेढ़ी रहती है। उसे लाख शीशियों में रखो। बाहर निकालो। फिर टेढ़ी की टेढ़ी !! समय रैना की भी एक दुम है। कितना भी मारो। सीधा करो। वो वापस टेढ़ी हो जाती है। क्योंकि वो सीधा सादा प्राणी नहीं है। वो रोस्टेड प्राणी है। गंदगी की आग में जलाया हुआ।पकाया हुआ। पूरे देश ने लताड़ा।मारा। फिर आ गया बेशर्मों की तरह। और मार खाने। अब एक ही चीज़ बाक़ी है। उसका मुंह काला कर गधे पर बिठा कर देश भर के शहरों में, गालियों में उसकी परेड करनी चाहिए। जहाँ बच्चे उसको अंडे, टमाटर मारें। क्योंकि उसने उनके सुपर हीरो शक्तिमान का अपमान किया है !!! youtu.be/qYxScz87k1k
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Singh
Singh@Singh2571350813·
@PratikVoiceObc Mazza aaya.....sahi hai...or reservation mango
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Pratik Patel
Pratik Patel@PratikVoiceObc·
आखिर पिछड़ों/दलितों के साथ भेदभाव कब तक..?
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Babita Joshi
Babita Joshi@Crazy9hl·
प्रिय पुरुषों अगर आप किसी महिला को लेकर असमंजस में हैं तो उससे पुरुष-विरोधी 'चिरैया' सीरीज़ पर उसकी राय पूछिए लाखों रुपये शादी पर खर्च करने और उसके सारे खर्च उठाने के बाद भी, अगर वह अब भी यौन संबंध को वैवाहिक बलात्कार समझती है, तो बेहतर है कि आप किसी रोबोट से शादी कर लें।
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@Mohan_Gunjan 🐦
@Mohan_Gunjan 🐦@MohanKamat11·
@AjajAlam538165 संविदा (Contract) पर जो शिक्षक नियुक्त किए जाते हैं उसे ही Guest Teacher कहते हैं
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@Mohan_Gunjan 🐦
@Mohan_Gunjan 🐦@MohanKamat11·
🚨 BPSC TRE-4 विज्ञापन अपडेट 🚨 📍 पद: 46,000+ 📍 खास: गेस्ट टीचर को 25 अंकों तक का वेटेज। 📍 अपडेट: विज्ञापन में देरी का कारण 'जीरो एरर' पॉलिसी। 📍 संभावित तारीख: अप्रैल प्रथम सप्ताह। भर्ती कोर्ट में न फंसे, इसके लिए आयोग पूरी सावधानी बरत रहा है।🎯 #TRE #TRE4 #BPSCTRE4 #BPSCTRE
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Dr. Laxman Yadav
Dr. Laxman Yadav@DrLaxman_Yadav·
“आवा लक्ष्मण बाबू, किताब के लिए बहुत बधाई। बहुत सुने हैं तोहरे बारे में। लड़ाई जारी रखिहा।” मेरी किताब ‘जाति जनगणना’ उस जननेता के हाथों में, जिनके स्वप्न, संघर्ष और राजनीतिक हस्तक्षेपों ने इस देश में सामाजिक न्याय की ऐसी अनगिनत रचनात्मक संभावनाओं को जन्म दिया। कल पटना में मेरी किताब पर एक पुस्तक परिचर्चा आयोजित है; उस बिहार की राजधानी में, जिसकी मिट्टी ने सामाजिक न्याय, समाजवादी चेतना और बहुजन राजनीति के अनेक निर्णायक अध्याय लिखे हैं। उसी आयोजन के सिलसिले में एक शाम पहले पटना पहुँचा, तो मन में सबसे पहले यही इच्छा उठी कि अगर इस किताब को आदरणीय लालू प्रसाद जी तक पहुँचा पाऊँ, तो यह सिर्फ़ एक औपचारिक भेंट नहीं होगी, बल्कि उस वैचारिक-राजनीतिक परंपरा को सलाम होगा, जिसकी लंबी लड़ाइयों ने हम जैसे लोगों के लिखने-बोलने और हस्तक्षेप करने की ज़मीन तैयार की है। पटना पहुँचते ही संपर्क किया, संदेश भिजवाया। थोड़ी ही देर में उधर से बुलावा आ गया। समय काफ़ी हो चुका था, लेकिन यह जानकर मन और भी भीग गया कि आदरणीय लालू जी इंतज़ार कर रहे थे। सामने पहुँचा तो उन्होंने अपने परिचित अपनापे और सहज आत्मीयता के साथ कहा— “आवा लक्ष्मण बाबू, किताब के लिए बहुत बधाई। बहुत सुने हैं तोहरे बारे में। लड़ाई जारी रखिहा।” यह सिर्फ़ एक वाक्य नहीं था; यह जैसे संघर्ष की एक पूरी परंपरा का हस्तांतरण था, एक पीढ़ी का दूसरी पीढ़ी के कंधे पर रखा हुआ भरोसेमंद हाथ। उसके बाद जिस उत्सुकता, स्नेह और तल्लीनता से उन्होंने किताब को हाथ में लिया, उसे पलटा, देखा और अपने पास रखा वह क्षण मेरे लिए सिर्फ़ निजी खुशी का नहीं, बल्कि गहरे ऐतिहासिक अर्थ का क्षण था। लगा जैसे किताब के उन पन्नों में दर्ज शब्दों के भीतर वे अपने समय के संघर्ष, जनता की आकांक्षाएँ और सामाजिक न्याय की अब तक अधूरी परियोजना को फिर से प्राणवत्ता दे रहे हों। हम जानते हैं कि कोई भी बौद्धिक व्यक्ति विचारों को व्यवस्थित करता है, उन्हें अपने समय के संघर्षों के अनुकूल नए रूप में ढालता है, दर्शन को स्पष्टता देता है, और कलम-किताब के माध्यम से उन्हें दस्तावेज़ी रूप में इतिहास के हवाले करता है। लेकिन एक जननेता वही विचार तब सचमुच इतिहास में बदलता है, जब वह उसे विश्वविद्यालयों, सेमिनारों और पुस्तकों की दुनिया से निकालकर आम जन के जीवन, दुख, ग़ुस्से, सपनों और राजनीतिक आकांक्षाओं से जोड़ देता है। जब वह सड़क, संसद और सत्ता तीनों स्तरों पर लड़ते हुए राजनीति की धारा को मोड़ देता है, तब विचार सिर्फ़ विचार नहीं रह जाता, वह समाज बदलने की ठोस ताक़त बन जाता है। मेरे लिए आज का यह अनुभव ठीक वैसा ही था जैसे कलम अपने स्रोत से मिल रही हो, जैसे किताब अपने सामाजिक अर्थ की सार्थकता से और भर उठी हो। ‘जाति जनगणना’ पर लिखी गई यह किताब सिर्फ़ आँकड़ों, बहसों और नीतिगत विमर्शों का संकलन नहीं है; यह उस ऐतिहासिक सवाल का दस्तावेज़ है कि भारत जैसे समाज में जाति-आधारित गैर-बराबरी, प्रतिनिधित्व की असमानता, संसाधनों के बँटवारे में पक्षपात और सामाजिक अपमान के विरुद्ध न्याय का रास्ता कैसे निर्मित होगा। जननायक कर्पूरी ठाकुर, बाबू जगदेव प्रसाद, बी.पी. मंडल की धरती पर लालू प्रसाद, शरद यादव, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान का राजनीतिक दौर बहुत हद तक उसी ऐतिहासिक दिशा में आगे बढ़ा, जिसे इस किताब में दर्ज करने की कोशिश की गई है। यह दौर अपने अंतर्विरोधों, सीमाओं और उपलब्धियों के साथ सामाजिक न्याय की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। उस पीढ़ी के एक बड़े नायक के हाथों में इस किताब को देखना, सच कहूँ, मेरे लिए किसी जीवित इतिहास से साक्षात्कार जैसा था। लगा कि किताब केवल पढ़े जाने की वस्तु नहीं रही, बल्कि वह अपने समय, अपने स्रोत और अपने संघर्षशील वंशक्रम से फिर जुड़ गई है। यह क्षण इसलिए भी भावुक कर देने वाला था, क्योंकि इसमें निजी संतोष से कहीं अधिक सामूहिक स्मृति और राजनीतिक उत्तराधिकार की चमक थी। सामाजिक न्याय का संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। न्याय, समता और समाजवाद की राह अभी अधूरी है। जाति जनगणना से लेकर प्रतिनिधित्व, शिक्षा, रोज़गार, भूमि, सत्ता-साझेदारी और गरिमा तक यह लड़ाई लंबी है, कठिन है, लेकिन ज़रूरी है। और जब तक यह समाज अपने सबसे वंचित, सबसे बहिष्कृत, सबसे दबे हुए लोगों के लिए बराबरी का घर नहीं बन जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। हम उसी संकल्प, उसी वैचारिक प्रतिबद्धता और उसी जनपक्षधर ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का वचन दोहराते हैं। इन तस्वीरों को साझा करते हुए मन गहरे आभार से भरा है। आदरणीय @laluprasadrjd जी का यह स्नेह, यह आत्मीयता, यह प्रोत्साहन और यह भरोसा मेरे लिए निजी रूप से बहुत मूल्यवान है; लेकिन उससे भी अधिक, यह उस विचारधारा और संघर्षधारा का सम्मान है, जिससे हम सब अपनी ताक़त लेते हैं। उनके प्रति हृदय से आभार। संघर्ष ज़िंदा है। स्वप्न ज़िंदा है। सामाजिक न्याय की लड़ाई जारी है और जारी रहेगी।
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Singh
Singh@Singh2571350813·
@riskyyadav41 Aik tumara ristedar tha kya kya...
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Risky Yadav
Risky Yadav@riskyyadav41·
धुरंधर 2 पूरी तरह एक प्रोपेगेंडा फिल्म है जिसमें दिखाया गया है कि - मोदी जी ने नोटबंदी करके आतंकवादियों की कमर तोड़ दी असल में हमारी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी थी। अतीक अहमद को पाकिस्तानी एजेंट बताया गया है वो अलग बात है ये बात इनको उसके मरने के बाद पता चली।😂 क्योंकि जीते जी उसको पाकिस्तानी एजेंट साबित करने की न इनकी न इनकी सुरक्षा एजेंसियों की औकात हुई। #Dhurandhar2
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Singh
Singh@Singh2571350813·
@PratikVoiceObc Sab se bada jati wadi tu hai....ab obc nahi dikh raha hai.....
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Pratik Patel
Pratik Patel@PratikVoiceObc·
🚨 जातंकवादी घटना 💔 राजकोट AIIMS में MBBS के अंतिम वर्ष के दलित छात्र रतन मेघवाल की ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या की खबर बेहद दर्दनाक और शर्मनाक है। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने अस्मिता शर्मा और चार अन्य लोगों पर शारीरिक हमला और लगातार मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। अगर देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थानों में भी दलित छात्रों को सुरक्षा और सम्मान नहीं मिल पा रहा, तो यह पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल है। अब सिर्फ जांच नहीं, सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। अब समझ आ रहा है UGC रेगुलेशन की कितनी जरूरत है। इसके एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियमों को कड़ाई से सभी यूनिवर्सिटी में लागू किया जाना चाहिए।
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