योगी आदित्यनाथ retweetledi

जनता जवाब दे देती है तो खीझ कर टपोरी वाली भाषा पर उतर आते हैं ये सपैये का मालिक 😂😂
और अगर इतने ही पावर प्लांट लगवाए थे तो बिजली क्यों हफ़्ते के हिसाब से दी जाती थी, एक ख़राब ट्रांसफार्मर को बदलने में दस बारह दिन क्यों लगते थे, गांवों में रात के हफ्ते की बिजली में किसान भयंकर रात में ट्यूबवेल चला कर पानी चलाने को क्यों मजबूर था, उस समय शहरों में बिजली छः घंटे भी आ गई तो बहुत थी... पावर प्लांट लगवाने और पावर सप्लाई करने दोनों में अंतर है
उत्तर प्रदेश से सारे उद्योग धंधे पलायन कर गए थे इसीलिए उद्योगों को बिजली सप्लाई बिलकुल जीरो हो गई थी
और अखिलेश जी सुन लो योगी जी सरकार में कितने पावर प्लांट लगे हैं पता तो तुमको भी होगा लेकिन चिल्ला चिल्ला कर झूठ बोल रहे हो
घाटमपुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट (कानपुर): इसकी 660 MW की पहली यूनिट चालू की गई।
पनकी थर्मल पावर प्लांट (कानपुर): पुरानी बंद यूनिट की जगह नई 660 MW की आधुनिक यूनिट बनाई गई।
जवाहरपुर थर्मल पावर स्टेशन (एटा): 1320 MW (660 MW की दो यूनिट) की क्षमता का प्लांट।
ओबरा-सी थर्मल पावर प्लांट (सोनभद्र): 1320 MW की क्षमता की परियोजना।
खुरजा थर्मल पावर प्लांट (बुलंदशहर): 1320 MW क्षमता का प्रोजेक्ट।
मेजा थर्मल पावर स्टेशन (प्रयागराज): एनटीपीसी (NTPC) और राज्य सरकार के संयुक्त उद्यम के रूप में \(1320\) मेगावाट (\(2 \times 660\) मेगावाट) क्षमता की इस परियोजना की दोनों यूनिट्स को चालू किया गया है। इसके अलावा यहाँ \(2400\) मेगावाट की तीन नई इकाइयों को भी मंजूरी दी गई है।
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