Sunil Yadav
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छात्रों को मारने का आदेश किसने दिया?

राहुल नहीं रुके 🔥 ♦️सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ दिया था। 😓 ♦️दीपके सर को कभी बुखार हो रहा था तो कभी टाइफ़ॉइड। 😓 ♦️बाक़ी CJP की लीडरशिप में किसी को नड्डा जी के घर की कॉफ़ी पसंद आ गई तो किसी को बर्गर। 😓 ♦️केजरीवाल सर ने तो तीन दिन से उम्मीद ही छोड़ी हुई थी 😓 ♦️संजय सर ख़ुद को पड़ने वाली गालियों से निपटने में बिजी हो गए थे। 😓 इस सब के दौरान राहुल वो शख़्स रहे जिसने लगातार नए नए तरीके अपनाए, दबे नहीं, थमे नहीं, रुके नहीं। प्रधानमंत्री के घर के बाहर पहुँच गए, आनन फानन में मंत्री जितेन्द्र को दौड़ लगवा दी, लेकिन राहुल नहीं रुके। पुलिस ने जबरदस्ती की, सड़क पर घसीटा लेकिन राहुल नहीं रुके। नाक और छाती पर वार भी किए, नाक से और मुँह से खून बहने लगा , लेकिन राहुल नहीं रुके। हिरासत में लेकर छत्रसाल स्टेडियम ले गए लेकिन राहुल नहीं रुके। बहन प्रियंका को उठाकर ले गई पुलिस लेकिन राहुल नहीं रुके। अगले दिन राहुल फिर नहीं रुके, एक कदम आगे बढ़ाते हुए पीपीटी तैयार कर के ले आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मोदी सरकार की धज्जियाँ उड़ा दी जिसे लाइव एक लाख से अधिक युवा देख रहे थे। इससे अगले दिन राहुल 23 NEET के छात्र जिन्होंने आत्महत्या की, उनको श्रद्धांजलि देने गांधी स्मृति निकल पड़े। पुलिस ने घर में नज़रबंद करने की कोशिश की लेकिन राहुल नहीं रुके। पुलिस ने बैरिकेडिंग करके ब्लॉक करने की कोशिश की लेकिन राहुल नहीं रुके, गांधी स्मृति पहुँचे, छात्रों को श्रद्धांजलि दी। सरकार ने सोचा अब आगे क्या? ख़त्म सब। लेकिन राहुल तो राहुल हैं, वो तमाम सरकारी दावों और मीडिया की चुप्पी को धता बताते हुए उस छात्र को सामने ले आए जिस पर पैलेट गन चली। अमित शाह की पुलिसिया बर्बरता अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह बना चुकी थी क्योंकि राहुल ने ये सुनिश्चित किया कि ये बर्बरता छुपा नहीं सकती सरकार। इस दौरान राहुल ने लगातार ये सुनिश्चित किया कि राज्यसभा और लोकसभा में रोज़ाना सुबह प्रदर्शन हों, विपक्ष प्रधान के इस्तीफे की मांग पर एकजुट रहे। सरकार ने चर्चा में उलझाना चाहा, फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में उलझाना चाहा, किसी बिल में उलझाना चाहा लेकिन राहुल नहीं रुके। राहुल ने साफ़ शब्दों में दो टूक कहा कि पहले इस्तीफ़ा होगा, उसके बाद कोई और बात होगी। अगले दिन भी राहुल नहीं रुके, राहुल उन 5 छात्रों को मीडिया के सामने ले आए, जिन्होंने जंतर मंतर पर अनशन किया। वो छात्र जिन्हें CJP ने मंच नहीं दिया। वो छात्राओं को लेकर सामने आए और मीडिया के सामने मंच सौंपते हुए बोलने का मौक़ा दिया। राहुल को ख़बर लगी कि सरकार मुद्दे से भटकाने के लिए धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने की तैयारी में है। राहुल ने तुरंत मीडिया के सामने साफ़ शब्दों में कहा कि मंत्रालय बदलने से बात नहीं बनेगी। इस्तीफा मतलब इस्तीफ़ा। धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही पड़ेगा। नरेन्द्र मोदी के सामने से तमाम विकल्प राहुल ने एक झटके में खींच डाले। अंततः राहुल नहीं रुके। राहुल की जीत हुई, जीत हुई उन छात्रों की जो राहुल की तरह ही थमे नहीं, दबे नहीं, रुके नहीं। राहुल नहीं रुके, राहुल नहीं रुकेंगे। जय हिन्द। जय कांग्रेस। 🇮🇳 @RahulGandhi

राहुल नहीं रुके 🔥 ♦️सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ दिया था। 😓 ♦️दीपके सर को कभी बुखार हो रहा था तो कभी टाइफ़ॉइड। 😓 ♦️बाक़ी CJP की लीडरशिप में किसी को नड्डा जी के घर की कॉफ़ी पसंद आ गई तो किसी को बर्गर। 😓 ♦️केजरीवाल सर ने तो तीन दिन से उम्मीद ही छोड़ी हुई थी 😓 ♦️संजय सर ख़ुद को पड़ने वाली गालियों से निपटने में बिजी हो गए थे। 😓 इस सब के दौरान राहुल वो शख़्स रहे जिसने लगातार नए नए तरीके अपनाए, दबे नहीं, थमे नहीं, रुके नहीं। प्रधानमंत्री के घर के बाहर पहुँच गए, आनन फानन में मंत्री जितेन्द्र को दौड़ लगवा दी, लेकिन राहुल नहीं रुके। पुलिस ने जबरदस्ती की, सड़क पर घसीटा लेकिन राहुल नहीं रुके। नाक और छाती पर वार भी किए, नाक से और मुँह से खून बहने लगा , लेकिन राहुल नहीं रुके। हिरासत में लेकर छत्रसाल स्टेडियम ले गए लेकिन राहुल नहीं रुके। बहन प्रियंका को उठाकर ले गई पुलिस लेकिन राहुल नहीं रुके। अगले दिन राहुल फिर नहीं रुके, एक कदम आगे बढ़ाते हुए पीपीटी तैयार कर के ले आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मोदी सरकार की धज्जियाँ उड़ा दी जिसे लाइव एक लाख से अधिक युवा देख रहे थे। इससे अगले दिन राहुल 23 NEET के छात्र जिन्होंने आत्महत्या की, उनको श्रद्धांजलि देने गांधी स्मृति निकल पड़े। पुलिस ने घर में नज़रबंद करने की कोशिश की लेकिन राहुल नहीं रुके। पुलिस ने बैरिकेडिंग करके ब्लॉक करने की कोशिश की लेकिन राहुल नहीं रुके, गांधी स्मृति पहुँचे, छात्रों को श्रद्धांजलि दी। सरकार ने सोचा अब आगे क्या? ख़त्म सब। लेकिन राहुल तो राहुल हैं, वो तमाम सरकारी दावों और मीडिया की चुप्पी को धता बताते हुए उस छात्र को सामने ले आए जिस पर पैलेट गन चली। अमित शाह की पुलिसिया बर्बरता अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह बना चुकी थी क्योंकि राहुल ने ये सुनिश्चित किया कि ये बर्बरता छुपा नहीं सकती सरकार। इस दौरान राहुल ने लगातार ये सुनिश्चित किया कि राज्यसभा और लोकसभा में रोज़ाना सुबह प्रदर्शन हों, विपक्ष प्रधान के इस्तीफे की मांग पर एकजुट रहे। सरकार ने चर्चा में उलझाना चाहा, फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में उलझाना चाहा, किसी बिल में उलझाना चाहा लेकिन राहुल नहीं रुके। राहुल ने साफ़ शब्दों में दो टूक कहा कि पहले इस्तीफ़ा होगा, उसके बाद कोई और बात होगी। अगले दिन भी राहुल नहीं रुके, राहुल उन 5 छात्रों को मीडिया के सामने ले आए, जिन्होंने जंतर मंतर पर अनशन किया। वो छात्र जिन्हें CJP ने मंच नहीं दिया। वो छात्राओं को लेकर सामने आए और मीडिया के सामने मंच सौंपते हुए बोलने का मौक़ा दिया। राहुल को ख़बर लगी कि सरकार मुद्दे से भटकाने के लिए धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने की तैयारी में है। राहुल ने तुरंत मीडिया के सामने साफ़ शब्दों में कहा कि मंत्रालय बदलने से बात नहीं बनेगी। इस्तीफा मतलब इस्तीफ़ा। धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही पड़ेगा। नरेन्द्र मोदी के सामने से तमाम विकल्प राहुल ने एक झटके में खींच डाले। अंततः राहुल नहीं रुके। राहुल की जीत हुई, जीत हुई उन छात्रों की जो राहुल की तरह ही थमे नहीं, दबे नहीं, रुके नहीं। राहुल नहीं रुके, राहुल नहीं रुकेंगे। जय हिन्द। जय कांग्रेस। 🇮🇳 @RahulGandhi


आंदोलन का सच सुनिए, NEET छात्र की जुबानी... ⬇️

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