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तंवर साहब
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तंवर साहब
@TanwarSahab_
तंवर साहब - नाम नहीं, पहचान है।
Delhi Katılım Ağustos 2009
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मेडिसिन या लूट?
>23 रुपए की दवा पर MRP 104 रुपए में ,
>28 रुपए की दवा पर MRP 132 रुपए में ,
>18 रुपए की दवा पर MRP 65 रुपए में ,
>14.60 रुपए की दवा पर MRP 28 रुपए में ,
>19 रुपए की दवा पर MRP 157 रुपए में ,
>42 रुपए की दवा 156 रुपए में बिक रही है।
आखिर यह खेल किसके संरक्षण में चल रहा है?
सरकार बताए कि दवाओं की कीमतों पर लगाम क्यों नहीं लगाई जा रही?
MRP और असली लागत के बीच इतना बड़ा अंतर किसकी मेहरबानी से है?
क्या मरीजों की जेब से खुली लूट पर जानबूझकर आंखें बंद की जा रही हैं?
या फिर इस पूरे खेल में ऊपर तक सबकी चुप्पी की कोई कीमत तय है?
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रमेश गुप्ता की 2019 में हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। उम्र सिर्फ 54 साल।
उनके पास ₹50 लाख की टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी थी। 11 साल तक एक भी प्रीमियम मिस नहीं किया।
उनकी पत्नी ने क्लेम फाइल किया।
इंश्योरेंस कंपनी बोली: “हमें जांच करनी होगी।”
जांच 3 साल तक चली।
बार-बार नए दस्तावेज मांगे गए।
वह हर बार देती रहीं, और हर बार नई मांग आ जाती।
इस बीच हालात बिगड़ गए—
घर की EMI नहीं भर पाईं,
गाड़ी बेचनी पड़ी,
रिश्तेदारों से उधार लेना पड़ा।
2022 में कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट कर दिया।
कारण बताया “पहले से बीमारी छुपाई गई थी।”
वो “बीमारी” क्या थी?
सिर्फ हल्का ब्लड प्रेशर,
जो 2015 के एक रूटीन चेकअप में नोट हुआ था।
न कोई इलाज, न कोई दवा।
पत्नी ने हार नहीं मानी।
IRDAI और फिर कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट का साफ फैसला आया—
जिस बीमारी का कभी इलाज नहीं हुआ,
जो कभी स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करती,
उसे 11 साल बाद क्लेम रिजेक्ट करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
आदेश दिया गया:
₹50 लाख की पूरी राशि,
2019 से 9% ब्याज के साथ,
और ₹1 लाख मानसिक उत्पीड़न के लिए।
3 साल तक एक विधवा को घुमाया गया।
लेकिन अदालत ने उसका हक वापस दिलाया—पूरा, ब्याज सहित।
याद रखिए:
अगर आपका इंश्योरेंस क्लेम “नॉन-डिस्क्लोज़र” के नाम पर खारिज हो
तो चुप मत बैठिए, लड़िए।
अदालतें बार-बार कह चुकी हैं
छोटी, बिना इलाज वाली स्थितियों को आधार बनाकर क्लेम रिजेक्ट करना गलत है।
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आज की जनता को रेस्टोरेंट में रोज़ पनीर चाहिए , रोज चिकन चाहिए , दाम भी कम चाहिए और quantity भी फुल चाहिए।
प्रकृति कोई factory line तो है नहीं जो लालच के हिसाब से production बढ़ा दे।
तो फिर market ने अपना जुगाड़ निकाल लिया ...
पनीर नकली बना दो,
मुर्गों को injections ठोक दो ,
धीरे-धीरे chemical experiment खिलाया जा रहा है।
जनता taste खा रही है,
व्यापारी profit कमा रहे हैं,
और FSSAI के अधिकारी FIR -FIR खेल रहे है।


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मैं पिछले 6 महीने से नकली पनीर , घी, मिठाइयां , पॉम ऑयल, जहरीली सब्जियां, मिलावटी मसाले, डिटर्जेंट वाला दूध, महंगी दवाइयां और सरकारी अस्पतालों की जर्जर हालत के खिलाफ आवाज उठा रहा हूं।
मैं सिर्फ अपने लिए नहीं बोल रहा,
मैं उन करोड़ों लोगों के लिए बोल रहा हूं
जिनकी थाली में जहर परोसा जा रहा है,
जिनकी जेब इलाज के नाम पर लूटी जा रही है,
और जिनकी जिंदगी सिस्टम की लापरवाही के भरोसे छोड़ दी गई है।
लेकिन बदले में मुझे क्या मिला?
लगातार reports, account suspend कराने की कोशिश, और सच बोलने की सजा।
तो मैं देश से पूछना चाहता हूं कि
क्या जहर के खिलाफ आवाज उठाना अपराध है?
क्या मिलावट, लूट और लापरवाही के खिलाफ बोलना गुनाह है?
अगर यही अपराध है, तो हां ... मैं यह अपराध हर रोज करूंगा।
क्योंकि यह लड़ाई किसी एक account की नहीं है ,
यह लड़ाई देश के हर परिवार की सेहत की है,
हर बच्चे की सुरक्षा की है ,
और उस भारत की है जहां लोगों को खाना, दवा और इलाज के नाम पर जहर न दिया जाए।
मेरा account suspend हो जाए ,
मेरी आवाज दबाने की कोशिश हो जाए ,
फिर भी मैं रुकूंगा नहीं।
क्योंकि देशभक्ति सिर्फ झंडा लगाने से नहीं होती ,
देशभक्ति तब होती है जब आप अपने देशवासियों की जिंदगी बचाने के लिए सिस्टम से टकराने का साहस रखते हैं।
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देशहित और जनहित में किए काम की वजह से हमारे ऊपर आज FIR हुई ,
आप सब जो मुझे पर्सनली नहीं जानते, सबने आज मेरा बहुत साथ दिया , मुझे कई लोगों के मैसेजेस आए , कई लोगों ने फंड देने की बात कही , कई वकील भाइयों और बहनों ने लीगल हेल्प करने के बात कही ,
आप सभी लोगों का हृदय की गहराई से बहुत बहुत धन्यवाद , आज मुझे ऐसा महसूस हुआ कि हमने आप लोगों को कमाया है , हमें किसी प्रकार के फंड की जरूरत नहीं है, जो काम हम कर रहे हैं वो कोई भी एक मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन से कर सकता है,
हमारी FSSAI और उनके अधिकारियों से कहना चाहते हैं कि हम किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही के लिए तैयार हैं , आप लोगों ने पिछले कई वर्षों में इतनी गलतियां की हैं ,आज देश में बढ़ते कैंसर , डायबिटीज, हार्ट अटैक जैसी बीमारियों के लिए आप लोग जिम्मेदार हैं ,
आप लोगों ने FIR में ये कहीं नहीं लिखा कि आरोप गलत हैं, आप लोगों को चिंता इस बात की है कि डॉक्यूमेंट्स कैसे लीक हो गए , अगर आप लोगों में दम है तो पब्लिक के सामने आकर बताइए कि आरोप गलत हैं,
वरना अगले कुछ दिनों में हम स्टेट फूड डिपार्टमेंट और FSSAI की पोल खोलते रहेंगे और मुकदमा लड़ते रहेंगे।जय हिंद जय भारत । BEST OF LUCK FSSAI
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हर दौर में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए जीते हैं। @Ravinder_ASPK जी उन्हीं नामों में से एक हैं एक ऐसा चेहरा, जो संघर्ष से घबराता नहीं, बल्कि हर चुनौती को समाज की ताकत में बदलना जानता है
जब-जब गुर्जर समाज पर मुश्किलें आईं, जब-जब हक और सम्मान की लड़ाई लड़ने की जरूरत पड़ी तब रविंदर भाटी सड़कों पर सबसे आगे खड़े नजर आए। उन्होंने कभी हालात से समझौता नहीं किया, बल्कि हर बार आवाज उठाकर यह साबित किया कि सच्चा नेतृत्व वही है जो अपने लोगों के साथ खड़ा रहे, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।
उनका संघर्ष सिर्फ विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को जोड़ने, जागरूक करने और हक दिलाने का एक निरंतर प्रयास रहा है। उन्होंने युवाओं में जोश भरा, बुजुर्गों को भरोसा दिया और पूरे समाज को एक दिशा देने का काम किया।
अब वक्त बदलने का है। अब लड़ाई सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आज जरूरत है कि समाज की आवाज सत्ता के सबसे बड़े मंच—विधानसभा—तक पहुंचे। और यह तभी संभव है जब रविंदर भाटी जैसे जमीनी, ईमानदार और संघर्षशील नेता को हम सब मिलकर मजबूत बनाएं।
सोचिए, जब वही नेता जो आज सड़कों पर आपके लिए लड़ रहा है, कल विधानसभा में आपकी आवाज बनेगा—तब फैसले भी आपके हक में होंगे और नीतियाँ भी आपके भविष्य को मजबूत करेंगी।
यह सिर्फ एक व्यक्ति को आगे बढ़ाने की बात नहीं है, यह पूरे समाज के सम्मान, अधिकार और पहचान को नई ऊंचाई देने का अवसर है।
आइए, एकजुट हों।
आइए, अपने हक की आवाज को और बुलंद करें।
आइए, ऐसे नेतृत्व को आगे लाएं जो हमारे दर्द को समझता है और हमारे लिए लड़ना जानता है।
अब समय है बदलाव का।
अब समय है मजबूत प्रतिनिधित्व का।
अब समय है रविंदर भाटी को विधानसभा तक पहुंचाने का
क्योंकि जब नेता सच्चा हो, तो समाज की ताकत अपने आप बढ़ जाती है।

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बेटा FSSAI मत कर लाला मत कर,
वरना डायरेक्टर का एक्सपीरियंस लेटर चेक होगा , जिसमें कुछ आउट ऑफ द बॉक्स जाकर फेवर दिए गए हैं ,
गुजरात की जिस कंपनी को कैंसर बढ़ाने वाली टेक्सटाइल की डाई को गुड़ की प्रोसेसिंग में यूज़ करने का लाइसेंस दिया गया है और भी तमाम लाइसेंस ,
हायरिंग प्रोसेस में जो धांधली चल रही ,
स्टेट फूड डिपार्टमेंट का सब खेल लायेंगे ,तब तक कुछ तो करो बेटा ।
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रात दो बजे गुजरात पुलिस ने इस ट्वीट पर एक और नोटिस भेजा है ,
बात राजस्थान की हो रही और पेट में दर्द गुजरात पुलिस के हो रहा हैं ?
अरे गुजरात के डीजीपी साहब आप बताइए जब सब कुछ ठीक था तो जल शक्ति मंत्रालय का CTR पोर्टल बंद क्यों किया गया ? जिनकी जांच होनी चाहिए उनको अवॉर्ड मिल रहे , जो एक्सपोज कर रहे उनको नोटिस मिल रहे ,
आप JSJB CTR पोर्टल पब्लिक कर दीजिए हम जमीन पर हुए काम देखना चाहते हैं।

खुरपेंच@khurpenchh
टीना डाबी की बहन को कुछ दिन पहले अपनी बहन के साथ राष्ट्रपति जी से जल संचय और जल भागीदारी अवार्ड मिला , जब हमने जांच पड़ताल की तो पाया कि रिया डाबी ने ब्लॉक गोगुंडा के गांव कुकारा खेड़ा में जो नदी निर्माण संबंधी जो काम किया है उसकी फोटो की जगह शादी का कार्ड अपलोड किया गया है , ऐसे ही टीना डाबी जी के कार्यक्षेत्र में एक हो फोटो को कई बार अपलोड किया गया है ,जिससे ज्यादा से ज्यादा काम दिखाया जा सके , अब कुछ हराम खोर इसको डाटा मैनिपुलेशन से जोड़ेंगे और कहेंगे कि ऐसे ही करके अवार्ड ले लिया । बाकी आप लोग बने रहिए पिक्चर बाकी है ।
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वीर दुल्ला भाटी गुर्जर की शहादत और त्याग की स्मृति में मनाया जाने वाला यह पर्व,
साहस, स्वाभिमान और बेटियों की रक्षा का संदेश देता है।
अग्नि की लौ के साथ
दुख-दर्द जलें,
और जीवन में सुख-समृद्धि आए 🌾
आप सभी को लोहड़ी की हार्दिक बधाई 🙏
#HappyLohri
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