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Tarun Kumar Sharma
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Tarun Kumar Sharma
@TarunkSharma83
New Delhi, India Katılım Temmuz 2020
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पहले मोदी सरकार ने नैरेटिव चलवाया कि जनता तैयार है, 15 रुपए बढ़ाने पर भी कोई असर नहीं होगा.
गोदी मीडिया को भेजकर ऐसे क्लिप निकलवाए गए, जिसमें लोग कहते पाए गए- मोदी जी, I LOVE U. आप 20 रुपए बढ़ा दो, हम आपके लिए जान दे देंगे.
लेकिन 5 रुपए में ही ये नैरेटिव टूट गया. जनता पेट्रोल-डीजल के बढ़ने से भयंकर परेशान है और खुलकर सरकार के खिलाफ बोल रही है.
हालांकि, जनता कितना भी परेशान हो जाए, जब तक EVM है मोदी सरकार का कुछ नहीं बिगड़ने वाला.
ये बात सरकार भी जानती है. इसलिए तो बेखौफ चाबुक चलाए जा रही है.
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बंगाल के चुनाव आयोग ने जारी किए आंकड़े.. पकड़ी गई चोरी !
मुस्लिम 97% वोटबैंक, BJP को ट्रांसफर !
ज्ञानेश कुमार ने बड़ी चूक कर दी, हड़कंप !
@Editor_SanjayS @boltipriyanka
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न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पीएम केयर्स फंड को लेकर दायर की गई जनहित याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने याचिका की मंशा पर सवाल उठाते हुए याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई और अपमानजनक टिप्पणी की।
याचिकाकर्ता को कहा गया कि वह ......“लुधियाना वापस जाकर दो-तीन और स्वेटर बेचें”
माय लॉर्ड यही तो याचिकाकर्ता भी और यह देश भी जानना चाहता है कि "पीएम केयर्स फंड" की जानकरी छुपाने के पीछे की आखिर मंशा क्या है ?
पीएम केयर्स फंड में कब, किससे, कितने पैसे आए और उसे कब, कहां, कितना, कैसे खर्च किया गया? इतनी साधारण सी बात जाहिर न करने के पीछे सरकार की आखिर मंशा क्या है?
लोकमान्य सच और अनुभवजन्य सच तो यही कहता है कि जहां गड़बड़ घोटाला होता है, वहीं परदादारी की जाती है, इतनी सी छोटी बात न समझने वाली अदालत की आखिर मंशा क्या है ?
अदालत का कर्तव्य नागरिक अधिकार और संविधान का संरक्षण है न कि सरकार का कवच बनना।
माय लॉर्ड क्या आपको नहीं लगता कि जो अदालत अपना डर और अपनी झेंप छुपाने के लिए याचिकाकर्ता को अपमानित करने पर उतर आए उसकी मंशा पर देश को सवाल उठाना चाहिए ?

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31 महीने जेल, कंपनी हाथ से गई, और अंत में अदालत ने कहा—सबूत नहीं थे। अगर आरोप साबित ही नहीं हुए, तो एक कारोबारी की ₹3300 करोड़ की कंपनी किस आधार पर बिक गई? सवाल सिर्फ एक कंपनी का नहीं, सिस्टम की निष्पक्षता और जवाबदेही का है।
Video by - @Geet_reports
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आदमी, आदमी में फर्क होता है और CM, CM में भी फर्क होता है.
तमिलनाडु के Coimbatore में एक 10 साल की बच्ची गायब होती है..अगले दिन उसकी लाश बुरी हालत में मिलती है.
कार्तिक और मोहनराज नाम के दो दरिंदे उसके साथ दरिंदगी करते हैँ.
पुलिस के साथ साथ Cm विजय भी एक्शन लेते हैँ.. इस मुद्दे पर पुलिस को तुरंत एक्शन के लिए अलर्ट करते हैँ.
पोस्ट करके परिवार को सांत्वना देते हैँ और भरोसा दिलाते हैँ कि बच्ची को न्याय मिलेगा.
सवाल ये है कि क्या किसी बच्ची या महिला के लिए बीजेपी के किसी CM को पोस्ट करते देखा है???
ना हाथरस, ना उन्नाव, ना महाराष्ट्र कोल्हापुर में
ना बीजेपी अन्य शासित राज्य के Cm ने ऐसे हौसला दिया हो ऐसे केस में किसी को???
अपराध हर राज्य में होते हैँ, पर CM डायरेक्ट एक्शन लेते इन्वॉल्व होते पहली बार देखा..


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दाम बढ़े चार ही दिन हुए कि मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीज़ल के दाम फिर बढ़ा दिए।
पूरी भूमिका बनाकर, बचत का उपदेश देकर
अपनी नाकामियों का बोझ जनता पर डालने का कार्य प्रगति पर है।
“आम जनता की लूट और अडानी को अमरीका से छूट” ये है मोदी जी का Compromised Model
विश्वगुरु का झूठा दंभ भरने वाले मोदी जी ने अमरीका से हाथ-पैर जोड़कर रूसी तेल ख़रीदने की “permission” का एक महीने का Extenstion लिया है। हर बार ऐसा करके वो 140 करोड़ भारतीयों के स्वाभिमान को ठेस पहुँचाते हैं। ऐसा पहला किसी पिछली सरकार ने नहीं किया है।
अब सवाल है कि जब सरकार के हिसाब से हमें ये “allow” हो गया है तो फिर आम जनता पर पेट्रोल-डीज़ल के दामों का बोझ क्यों?
मैं एक बार फिर दोहराता हूँ — भाजपा में दूरदर्शिता और Leadership की कमी है।
जब Crisis आई, तब चुनावों में व्यस्त रहे,
फिर चिकनी-चुपड़ी बातें कर लूट का प्लान बनाया
इसी बीच अपने परम मित्र को भी छुड़वा लिया !
केवल विदेशों में प्रायोजित PR करने से “विश्वगुरु” नहीं बना जाता… मोदी जी, जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करनी पड़ती है।
असली सवालों से मत भागिए… इन्हें आप “आम कैसे खाते हैं” और “टॉनिक कौन सा पीते हैं”, उनसे कोई मतलब नहीं है।
अगर जवाब देंगे कि Crisis के लिए खुद क्या कर रहें हैं तभी जनता के असली “प्रधान सेवक” कहलाएँगे, वरना महज़ “प्रचारक” बनकर ही रह जाएंगे।
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