Tausif fatema Mir.....'सबा'

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Tausif fatema Mir.....'सबा'

@TausifRefai

एक मौज-ए-खुश्बू सी फैली है बाग़ में जब फूल बन के कली मुस्कुराई है...#सबा https://t.co/8MDTvp7XXc https://t.co/Y7J2AY44OY

Gujarat, India, UK Katılım Şubat 2016
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Tausif fatema Mir.....'सबा'
मोहब्बत और ईबादत बताइ नहीं जाती बस की जाती है!!!
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काव्यरस
काव्यरस@Kavya_Ras·
चाँद के हमराह रात के सफ़र से गुज़र रहे हैं दिले शादाँ की वो हुस्न-ए-नज़र से गुज़र रहे हैं : आसमाँ पे है केहकशाँ ज़मीं पे फूलों की ज़ीनत लगता है माँ की दुआओं के असर से गुज़र रहे हैं #सबा @TausifRefai ↕️ #माँ #Mother (साभार)
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Abid Zaidi
Abid Zaidi@AbidZaidi1·
ये क्या क्या है ? 🤔
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Tausif fatema Mir.....'सबा'
तेरी फुरकत में नीम जाँ हुए बैठे हैं तेरी कुरबत की आस लगाए हुए बैठे हैं #सबा #qurbat #Shair
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Tausif fatema Mir.....'सबा'
کل تک جس کے گرد تھا رقصاں اک انبوہ ستاروں کا آج اسی کو تنہا پا کر میں تو بہت حیران ہوا ~ محسنؔ نقوی कल तक जिस के गिर्द था रक़्साँ इक अम्बोह सितारों का आज उसी को तन्हा पा कर मैं तो बहुत हैरान हुआ ~ मोहसिन नक़वी kal tak jis ke gird tha raqsāñ ik amboh sitāroñ kā aaj usī ko tanhā paa kar maiñ to bahot hairān huā ~ Mohsin Naqvi #बज़्म #बज़्म_काव्य_मंच #कल और आज
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...  सुमन   ‏سُمن
... सुमन ‏سُمن@yejivanhaiisjiv·
#Winters फूल खिला दे शाख़ों पर पेड़ों को फल दे मालिक धरती जितनी प्यासी है उतना तो जल दे मालिक कोहरा कोहरा सर्दी है काँप रहा है पूरा गाँव दिन को तपता सूरज दे रात को कम्बल दे मालिक वक़्त बड़ा दुख-दाइक है पापी है संसार बहुत निर्धन को धनवान बना दुर्बल को बल दे मालिक। #शकील_आज़मी
...  सुमन   ‏سُمن tweet media
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Kuch Mere Alfaaz
Kuch Mere Alfaaz@KuchMere_Alfaaz·
@TausifRefai Arz Kiya hai - रब्त-ए-रूहानी की चाह में दरवेश बहुत आए जो ख़ुद से बिछड़ गए, वो ख़ुदा तक न पहुँच पाए -Kuch Mere Alfaaz @KuchMere_Alfaaz
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Tausif fatema Mir.....'सबा'
तेरे दर पे दरवेश रब्त ए रूहानी में आए हैं खुद से बिछड़ हुए खिज़ा की विरानी में आए हैं #सबा
छोटी कविता@ChhotiKavita

'दर' या 'दस्तक' पर कुछ पंक्तियाँ लिखें―या कोई शायरी अथवा गीत के बोल साझा करें।

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Tausif fatema Mir.....'सबा'
@Officeofbazm मिलते हैं रहगुज़र कई सफर में कहते हैं अलविदा हुस्ने नज़र में #सबा #बज़्म काव्य मंच
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#बज्म ®️
#बज्म ®️@Officeofbazm·
बज़्म काव्यमंच – दैनिक प्रतियोगिता 🗓️ दिनांक – 31/12/2025 ✍️ विषय – #अलविदा मिलते है रहगुज़र कई सफ़र में _____________ शेयर को पूरा करे !! आइए!चाहे कविता हो, ग़ज़ल हो या कहानी ,अपनी कलम से यादों और वर्तमान के संगम, बीते पलों की खुशबू और आज की धड़कन,पुराने एहसासों और नए विचारों के बीच जन्म लेते भावों को शब्द दीजिए।अपने लेखन को एक नई दृष्टि, एक नई रवानी के साथ #बज़्म और #बज़्म_काव्यमंच पर साझा कीजिए। ✍️ 🔗 हमारी कम्युनिटी से जुड़ें:x.com/i/communities/
#बज़्मकाव्यमंच@BazmKavyamanch

#बज़्म_काव्य_मंच में आज 31/12/2025 का दैनिक विषय - #अलविदा कवितायें, कहानियाँ, शेर, ग़ज़ल, गीत, नज़्म कुछ भी लिखा जा सकता है ।। #बज़्म 👈 लगाना अनिवार्य है ।।

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Tausif fatema Mir.....'सबा'
@ChhotiKavita घर तो बनता है मोहब्बतों से दौलत का तो सिर्फ नाम होता है बिखरती है खुश्बू प्यार के फूलों से गुलशन का तो सिर्फ नाम होता है !! #सबा
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छोटी कविता
छोटी कविता@ChhotiKavita·
इस तस्वीर के आधार पर अगर आप कुछ उपयुक्त लिख सकें...
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#बज्म ®️
#बज्म ®️@Officeofbazm·
ये लफ्ज़ों की दुनियां है कुछ उदास, कुछ मुरझाई सी कभी खुशमिज़ाज सी... यहां बारिश से देह नहीं भीगते यहां शाम होती है पर सुरज नहीं ढलता ये पन्नों पर विरान से गांव जहां होती गुलाबों की भीड़ पर कहीं से उसके देह सी खुशबू नहीं आती, मैंने आधी किताब इक दिन यहां... इक पगडंडी बनाई थी उसके घर की तरफ.... जाते होंगे ना जाने कितने मुसाफ़िर मेरे लिए तो फ़िर... वहां कोई रेल क्यों नहीं जाती???? हम हैरत में रहें सदा मेरी उदासी की गुंज टकराती रही विरानों से... पत्थरों से... दीवारों से गमलों से... गलियारों से... मंदिरों से... ईदगाहों से.. मुझे अपना दुःख अकेले जीना पड़ा, और मेरी किताबें औरों का दुःख सुनाती रह गई। गर्ग #बज़्म
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#बज़्म_काव्य_मंच में आज 29/12/2025 का दैनिक विषय - #कैप्शन कवितायें, कहानियाँ, शेर, ग़ज़ल, गीत, नज़्म कुछ भी लिखा जा सकता है ।। #बज़्म 👈 लगाना अनिवार्य है ।।

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Tausif fatema Mir.....'सबा'
#बज़्म #बज़्म_#बज़्म_काव्य_मंच
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#बज्म ®️@Officeofbazm

ये लफ्ज़ों की दुनियां है कुछ उदास, कुछ मुरझाई सी कभी खुशमिज़ाज सी... यहां बारिश से देह नहीं भीगते यहां शाम होती है पर सुरज नहीं ढलता ये पन्नों पर विरान से गांव जहां होती गुलाबों की भीड़ पर कहीं से उसके देह सी खुशबू नहीं आती, मैंने आधी किताब इक दिन यहां... इक पगडंडी बनाई थी उसके घर की तरफ.... जाते होंगे ना जाने कितने मुसाफ़िर मेरे लिए तो फ़िर... वहां कोई रेल क्यों नहीं जाती???? हम हैरत में रहें सदा मेरी उदासी की गुंज टकराती रही विरानों से... पत्थरों से... दीवारों से गमलों से... गलियारों से... मंदिरों से... ईदगाहों से.. मुझे अपना दुःख अकेले जीना पड़ा, और मेरी किताबें औरों का दुःख सुनाती रह गई। गर्ग #बज़्म

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Tausif fatema Mir.....'सबा'
@ChhotiKavita ये मौजों की रवानी, ये साहिल की बेताबी ,ये समंदर का जोश ये मन्ज़र, ये नज़ारा उडा देता है दिलों के अंदर का होश #सबा
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छोटी कविता
छोटी कविता@ChhotiKavita·
'दरिया', 'सागर', 'समुद्र' या 'समुंदर' पर कुछ पंक्तियाँ लिखें, या कोई शायरी अथवा गीत के बोल साझा करें।
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#बज्म ®️
#बज्म ®️@Officeofbazm·
बज़्म काव्यमंच – दैनिक प्रतियोगिता 🗓️ दिनांक – 2812/2025 ✍️ विषय यादें चाहे कविता हो, ग़ज़ल हो या कहानी, अपनी कलम से इस इंतज़ार को जीवन दीजिए और साझा कीजिए #बज़्म, #बज़्म_काव्यमंच के साथ। ✍️🌹 🔗 हमारी कम्युनिटी से जुड़ें: x.com/i/communities/
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#बज़्म_काव्य_मंच में आज 28/12/2025 का दैनिक विषय - #यादें कवितायें, कहानियाँ, शेर, ग़ज़ल, गीत, नज़्म कुछ भी लिखा जा सकता है ।। #बज़्म 👈 लगाना अनिवार्य है ।।

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