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Chhatarpur MP india Katılım Haziran 2015
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छतरपुर/पन्ना
10वे दिन आज ढोड़न बांध पर आदिवासियों ने जल सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया।
आदिवासी महिलाओं का कहना है जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होती है तब तक इस धूप में 24 घंटे इसी ढोड़न बांध पर आंदोलन जारी रहेगा।
44000 करोड़ का केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट पर यह बांध बन रहा है इस बांध का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने आए थे।
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ब्रेकिंग न्यूज़
दावा किया जा रहा है कि होर्मुज से बिना अनुमति के गुजरने की कोशिश कर रहे एक और तेल टैंकर को निष्क्रिय कर दिया गया.!🚀🔥
सब कुछ खाक धुआँ और राख, अब ईरान अपने अस्तित्व की लड़ाई वह खूबी लड़ रहा है
#khamenei 2.0
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छतरपुर | ट्रांसफार्मर में लगी आग, किसान बुझाते रहे… बिजली विभाग बोला – ऑफिस से तार ले जाओ और खुद ठीक कर लो
छतरपुर जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के ग्राम गठेवरा में बिजली विभाग की भारी लापरवाही सामने आई है। यहां ट्रांसफार्मर के तार आपस में टकराने से अचानक आग लग गई। आग धीरे-धीरे फैलने लगी और पास के खेतों तक पहुंचने का खतरा पैदा हो गया।
घटना के समय गांव के किसान ही सबसे पहले मौके पर पहुंचे। किसानों ने मिट्टी और पानी की मदद से कड़ी मशक्कत कर आग पर काबू पाया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कुछ देर और हो जाती तो आसपास की खड़ी फसलें जल सकती थीं और किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हो सकता था।
आग लगने की सूचना जब बिजली विभाग के कर्मचारियों को दी गई तो उनका जवाब सुनकर ग्रामीण हैरान रह गए। ग्रामीणों के मुताबिक कर्मचारियों ने कहा — “ऑफिस से तार लेकर जाओ और खुद ही तारों को सही कर लो।”
ग्रामीणों का कहना है कि अगर तार और ट्रांसफार्मर किसानों को ही ठीक करने हैं, तो फिर बिजली विभाग आखिर किस काम के लिए है। गांव वालों का आरोप है कि बिजली के तार लंबे समय से जर्जर हालत में हैं और कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया।
ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली विभाग की इस लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए, क्योंकि अगर समय रहते किसान आग पर काबू नहीं पाते तो यह घटना बड़ी आपदा में बदल सकती थी।
गांव वालों का सवाल भी सीधा है —
जब आग बुझाने से लेकर तार ठीक करने तक सब कुछ किसानों को ही करना है, तो फिर बिजली विभाग आखिर किसके भरोसे चल रहा है? ⚡
@collchhatarpur @CMMadhyaPradesh @jitupatwari
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छतरपुर…
महज 10 किलोमीटर दूर सिमरिया गांव।
गणतंत्र दिवस मनाया गया—
लेकिन संविधान के बिना।
जी हां…
26 जनवरी को,
जिस दिन संविधान लागू हुआ,
उसी दिन उसके शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर मंच से गायब।
सरस्वती माता की फोटो सजी,
भारत माता को माला पहनाई गई—
लेकिन जिसने देश को संविधान दिया,
वह तस्वीर टूट गई बताकर साइड कर दी गई।
वाह!
मतलब तिरंगा फहराना ज़रूरी है,
लेकिन संविधान दिखाना ऑप्शनल?
ग्रामीणों ने सवाल किया—
तो जवाब मिला,
“फोटो टूट गई थी।”
अब कोई इनसे पूछे—
क्या 26 जनवरी अचानक आ गई थी?
क्या कैलेंडर में छुपकर आ गई थी?
या फिर बाबा साहब की फोटो सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही याद आती है?
तैयारी कई दिन पहले,
रिहर्सल कई बार,
चाय-नाश्ता पूरा,
लेकिन संविधान निर्माता की फोटो लाने का टाइम नहीं मिला!
जब शिक्षक चुप हो गए,
तो जनता बोल पड़ी।
ग्रामीण खुद गांव से बाबा साहब की फोटो लेकर आए
और टेबल पर रखवाई।
यानी सरकारी मंच पर सम्मान नहीं,
तो जनता ने खुद जिम्मा उठा लिया।
और मामला यहीं खत्म नहीं होता।
गढ़ी मलहरा के पिड़पा गांव में तो हद ही हो गई।
यहां आरोप है—
डॉ. अंबेडकर की तस्वीर नीचे फेंकी गई,
साथ में जातिसूचक गालियां भी दी गईं।
गणतंत्र दिवस की सुबह,
बच्चों के सामने,
संविधान को पैरों तले कुचलने का आरोप।
पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है—
SC-ST एक्ट की गंभीर धाराएं लगी हैं,
एक आरोपी नामजद है।
अब सवाल सीधा है—
क्या कुछ लोग 26 जनवरी को
सिर्फ झंडा फहराने का दिन मानते हैं?
या फिर संविधान से उन्हें आज भी डर लगता है?
अगर बाबा साहब की तस्वीर टूट सकती है,
तो सोचिए—
सम्मान कितनी आसानी से टूटता होगा।
सिमरिया और पिड़पा ने एक बात साफ कर दी है—
संविधान सिर्फ किताब में नहीं,
जनता के सवालों में ज़िंदा है।
अब देखना ये है—
जिम्मेदारी कौन लेगा?
या हर बार की तरह
“फोटो टूट गई थी” कहकर
मामला भी तोड़ दिया जाएगा?
#26january2026
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छतरपुर | नगर सरकार की ‘विंटर स्कीम’
छतरपुर नगर पालिका की ‘गर्म’ कमाई!
सड़क किनारे दुकानों की परमिशन के बदले जैकेट और नकदी का खेल
ठंड बढ़ते ही शहर की सड़कों पर गर्म कपड़ों की दुकानें सज गईं, लेकिन उससे भी ज्यादा गर्म हो गया नगर पालिका का परमिशन सिस्टम। आरोप है कि सड़क किनारे अस्थायी दुकानों की अनुमति नियमों से नहीं, बल्कि जैकेट और नकदी की डील से मिली।
रसीद ठंडी, वसूली गरम
दुकानदारों का कहना है कि नगर पालिका की ओर से 1800 से 4000 रुपए तक की आधिकारिक रसीद काटी गई, लेकिन इसके ऊपर 30 से 40 हजार रुपए प्रति दुकान ‘ऊपरी कमाई’ के नाम पर वसूले गए।
एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया—चार दुकानों से कुल 1 लाख 30 हजार रुपए लिए गए, रसीद बस औपचारिकता रही।
‘जैकेट भी दो, कैश भी’
नकदी के साथ-साथ अधिकारियों के लिए मुफ्त जैकेट देना भी लगभग अनिवार्य बताया जा रहा है। सवाल पूछने वाले दुकानदारों को दुकान हटाने की धमकी—यानी परमिशन नहीं, ‘पैकेज डील’।
राजभवन का रास्ता, नियमों का चौराहा
इन्हीं दुकानों के पास महाराजा छत्रसाल यूनिवर्सिटी में मध्य प्रदेश के राज्यपाल का आगमन प्रस्तावित है। आसपास के दुकानदारों से कहा गया—“सबकी दुकानें हटेंगी, आपकी बस उस दिन बंद रहेगी।”
मतलब नियम भी लचीले, कार्रवाई भी चयनात्मक।
सड़कें सिकुड़ीं, सिस्टम फूला
एक तरफ ट्रैफिक और पैदल चलने वालों की मुसीबत, दूसरी तरफ कुछ जिम्मेदारों की जेबें गरम। सवाल सीधा है—जब रसीद 1800–4000 की है, तो बाकी रकम किस मद में और किसके आदेश से?
नगर पालिका की चुप्पी
अब तक जिम्मेदार अधिकारी खामोश हैं। न वसूली पर सफाई, न परमिशन के स्पष्ट नियम।
सबसे बड़ा सवाल
क्या नगर पालिका राजस्व बढ़ा रही है या
ठंड में ‘गर्म कपड़ों’ की आड़ में ‘गर्म वसूली’ चल रही है?
अगर आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ अवैध वसूली नहीं—सिस्टम की सर्द रातों में गरमाई गई जेबों की कहानी है।
@KailashOfficeBJP @DrMohanYadav51 @CMMadhyaPradesh
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चोटी उखाड़ने का आरोप, जातिगत अपमान का मामला गरमाया
रीवा के मझिगवां गांव में ओबीसी युवक से मारपीट और अपमान का दावा, जांच शुरू
रीवा।
रीवा जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के मझिगवां गांव में एक ओबीसी युवक के साथ कथित जातिगत अपमान और मारपीट का मामला सामने आया है। पीड़ित रोहित यादव ने आरोप लगाया है कि गांव के ही दीपक पांडे नामक युवक ने उसकी चोटी (शिखा) जबरन उखाड़ दी और जाति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की।
रोहित के अनुसार, उसने धार्मिक आस्था और हनुमान जी की उपासना के कारण चोटी रखी थी। आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद दीपक पांडे ने उसे अपमानित करते हुए चोटी उखाड़ दी और मारपीट की। पीड़ित का कहना है कि घटना से उसे शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचा है।
मामले की जानकारी मिलने पर स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया। सामाजिक संगठनों ने इसे जातिगत भेदभाव से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी धार्मिक आस्था और पहनावे को लेकर निशाना बनाना संविधान और कानून के खिलाफ है।
पुलिस का कहना
बैकुंठपुर थाना प्रभारी के अनुसार, शिकायत प्राप्त हो चुकी है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मामले की जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शांति बनी रहे, इसके लिए निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई ज़रूरी है। घटना ने एक बार फिर सामाजिक समरसता और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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