UP PROSECUTION
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UP PROSECUTION
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Official Twitter Account of DIRECTORATE OF PROSECUTION, Uttar Pradesh.
Uttar Pradesh, India Katılım Eylül 2016
11 Takip Edilen1.4K Takipçiler

विधि स्नातक के छात्रों को गृह विभाग/अभियोजन निदेशालय में वर्ष 2026 हेतु इंटर्नशिप के लिये संलग्न प्रारूप पर ऑनलाइन (upprosecution.up.gov.in) आवेदन पत्र आमन्त्रित किये जा रहे है।
Direct link to fill form - forms.gle/u5S2qrNADi89E7…



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उत्तर प्रदेश में नकल एवं पेपर लीक रोके जाने को लेकर सख्त निर्णय लिया गया है। इस उद्देश्य से 'उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024' लाया गया है।
➡️ इसके अंतर्गत छात्र प्रस्तावित कानून में कारावास या जुर्माने के दण्ड की परिधि में नहीं होंगे। उनका परीक्षा परिणाम रोककर उन्हें एक वर्ष के लिए अगली परीक्षा में हिस्सा लेने से रोक दिया जाएगा।
➡️ नकल, पेपर लीक जैसे अपराधों के अलावा फर्जी वेबसाइट बनाना, फर्जी परीक्षा आयोजित करना, फर्जी प्रवेश पत्र जारी करना, फर्जी प्रश्नपत्र को वास्तविक प्रश्नपत्र के रूप में संबंधित परीक्षा से पूर्व प्रसारित करना भी अपराध होगा।
➡️ परीक्षाओं से जुड़ी किसी भी तरह की गड़बड़ी में सम्मिलित होने वालों को कठोर सजा मिलेगी, जिसमें अधिकतम सजा आजीवन कारावास और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना भी है।
➡️ यदि पेपर लीक व नकल सहित परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों में परीक्षा संस्थान या परीक्षा कराने वाली एजेंसी संलिप्त पाई जाती है तो उससे उस परीक्षा का पूरा खर्च वसूला जाएगा। साथ ही उसकी संपत्ति भी कुर्क और जब्त की जा सकती है।



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उत्तर प्रदेश में धर्म संपरिवर्तन संबंधी घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोकने और ऐसे अपराध करने वाले अभियुक्तों को कड़ी सजा दिलाने की दृष्टि से 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक-2024' लाया गया है।
➡️ नाबालिग, दिव्यांग, मानसिक रूप से दुर्बल व्यक्ति, महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति के अवैध मतांतरण में न्यूनतम 5 वर्ष या अधिकतम 14 वर्ष तक की कठोर कारावास और न्यूनतम ₹1 लाख के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
➡️ सामूहिक अवैध मतांतरण में न्यूनतम 7 वर्ष, अधिकतम 14 वर्ष तक के कठोर कारावास और न्यूनतम ₹1 लाख के जुर्माने का प्रावधान है।
➡️ यदि कोई व्यक्ति धर्म संपरिवर्तन करने के आशय से किसी व्यक्ति को उसके जीवन या संपत्ति के भय में डालता है, हमला करता है या विवाह या यौन संबंध स्थापित करता है या महिलाओं की तस्करी करता है तो न्यूनतम 20 वर्ष तथा अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
➡️ गंभीर अपराधों के तरह अब कोई भी व्यक्ति अवैध मतांतरण की एफआईआर भी दर्ज करा सकेगा। ऐसे मामलों में न्यायालय पीड़ित के इलाज और पुनर्वास की धनराशि जुर्माने के रूप में तय करेगा।


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उत्तर प्रदेश राज्य में अधिकाधिक अभियोजन साक्षियों की गवाही वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से कराई जा रही है जिसके बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
@homeupgov @UPGovt

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अंग्रेजों द्वारा बनाए गए इण्डियन पीनल कोड-1860, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड-1898, 1973 और इण्डियन एवीडेंस एक्ट-1872 कानून अंग्रेजी शासन को मजबूत करने व उसकी रक्षा करने के लिए बनाए गए थे।
इनका उद्देश्य दण्ड देना था, न कि न्याय। जबकि भारतीय लोकतंत्र न्याय की अवधारणा वाला है: मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज

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