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SATIRIST! Because one had to choose between EXPRESSING and SUFFOCATING! You can call me TAKLA!

Katılım Ağustos 2023
525 Takip Edilen880 Takipçiler
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Hansraj Meena
Hansraj Meena@HansrajMeena·
मुख्यधारा की मीडिया आदिवासियों के इस आंदोलन को कभी नहीं दिखाएगी !
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UnStoryteller@Un_Storyteller·
बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा!🤦‍♂️
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Piyush Rai
Piyush Rai@Benarasiyaa·
And it formally begins. Kanwariyas attacked and vandalised a van over allegations of desecration of kanwar in Muzaffarnagar, UP.
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UnStoryteller@Un_Storyteller·
और जिनका बुद्धि का चोरी हुआ है, बस उसी ने BJP को श्रद्धा से वोट दिया होगा।🤦
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Official PeeingHuman
Official PeeingHuman@thepeeinghuman·
Sonam Wangchuk EXPOSED by “right wing intellectuals”
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Nitish Sharma
Nitish Sharma@nvm_nissss·
Thread: They wanted to copy Zohran Mamdani’s playbook to make Raghav Chadha go viral. I was hired to make it happen. Here’s what I saw from the inside.
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Shyam Meera Singh
Shyam Meera Singh@ShyamMeeraSingh·
अभिजीत दीपके ने फर्स्ट डे से कॉक्रोच आंदोलन से कांग्रेस को जानबूझकर दूर रखा, शुरुआत में ही "नो बीजेपी" के साथ "नो कांग्रेस" प्रचारित किया गया, दीपके राहुल गांधी के विरोध में लिखता ही रहा है। और समय समय पर अपने इंटरव्यू और भाषणों में उसने कांग्रेस को डिसक्रेडिट करने का काम ही किया है जैसे कि विपक्ष निकम्मी है और उस निकम्मी विपक्ष और सरकार से जनता को मुक्ति दिलाने के लिए सर दीपके का उदय हुआ है।ऊपर से दीपके ने अपनी लीडरशिप में एक भी आदमी कांग्रेस विचारधारा से नहीं आने दिया। एक भी लीडर पर ये आरोप नहीं लगे कि वो कांग्रेस से कनेक्टेड है। सब पर सिर्फ़ ये आरोप लगे कि वे आप पार्टी से डायरेक्टली-इनडायरेक्टली कनेक्टेड हैं। देश की अलग अलग विचारधाराओं से आए हुए छात्रों के आंदोलन को fully कंट्रोल करने के लिए जानबूझकर पूरी लीडरशिप एक ही पार्टी (आप) के आसपास से ली गई। वो भी मनोनीत तरीक़े से ना कि लोकतांत्रिक तरीक़े से। जिससे कांग्रेस में अविश्वास की स्थिति पैदा हुई। कांग्रेस के लिए चक्रव्यू की स्थिति हो गई कि क्या वो ऐसे आंदोलन को सपोर्ट करे जिसकी लीडरशिप उसकी विरोधी पार्टी से जुड़ी हुई है। इसलिए कांग्रेस दूर हो गई। जबकि कांग्रेस हर उस आदमी को सपोर्ट करती रही है जो एंटी-एस्टेब्लिशमेंट है। लेकिन इतने बड़े ऑनलाइन आंदोलन से कांग्रेस को छिटका दिया गया। ये अभिजीत दीपके की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण हुआ। उसने इस आंदोलन को व्यापक होने के रास्ते, इस आंदोलन को अपना प्राइवेट लिमिटेड बनाने के चक्कर में बंद कर दिये। अभिजीत दीपके ने कॉक्रोच आंदोलन को पहले दिन से अपने ऊपर केंद्रित कर लिया था। दीपके शुरू से ही मैं मैं मैं मैं मैं करके पूरे आंदोलन पर अकेला बैठ गया। मुझे एयरपोर्ट लेने आओ, मैं पुलिस स्टेशन जाऊँगा, अकेले मैं इंटरव्यू दूँगा, मैं परमिशन माँगूँगा, मैं अकेले आंदोलन घोषित कर दूँगा, और तीन बजे भाग जाऊँगा। कोई कमिटी नहीं, कोई डेमोक्रेसी नहीं। कोई सलाहकार संगठन नहीं। सब मैं मैं मैं मैं। दीपके को पहले दिन लगा वे पहले दिन से ही नेपाल के बालेन शाह बनने वाले हैं। इसलिए उन्होंने अपने ही लोगों को भी सिर्फ़ "यस मैन" भूमिका में रखा। इस आंदोलन को इतना सीमित रखने के लिए कोई और नहीं सिर्फ़ दीपके ज़िम्मेदार है। फिर भी इस हरामी व्यवस्था के ज़िम्मेदार शिक्षा मंत्री को इस्तीफ़ा देना चाहिए। वहीं वांगचुक अपनी मूर्खता का शिकार ख़ुद बने हैं। जो दिल्ली के सभी लिबरल्स और पत्रकारों को दिख रहा था कि दीपके अकेले इस आंदोलन का फूफा बनना चाह रहा है वो वांगचुक को नहीं दिखा। इसलिए उनकी राजनीतिक अज्ञानता पर हंसा जाए कि दुखी हुआ जाए कुछ नहीं कह सकते। कांग्रेस से बाद में सपोर्ट में चाहा गया लेकिन ट्रस्ट दिलाने के लिए कुछ नहीं किया गया। बिना रिप्रेजेंटेंशन एंड बिना चेक्स एंड बैलेंस के देश की सबसे बड़ी पार्टी इन्हें अपना सपोर्ट दे दे। कैसी बात है। जब आंदोलन पूरी तरह फ्लॉप हो गया, जब सौ-दो सौ लोगों से ज़्यादा इकट्ठे नहीं हुए तब वांगचुक की एंट्री करा दी गई। वांगचुक किसी और की नहीं बल्कि अपनी मूर्खता का शिकार ख़ुद बने हैं। जो दिल्ली के सभी लिबरल्स और पत्रकारों को दिख रहा था कि दीपके अकेले इस आंदोलन का फूफा बनना चाह रहा है वो वांगचुक को नहीं दिखा। इसलिए उनकी राजनीतिक अज्ञानता पर हंसा जाए, कि दुखी हुआ जाए, कुछ नहीं कह सकते। आज कांग्रेस के लीडर्स से कहा जा रहा है कि वे कॉक्रोच आंदोलन को सपोर्ट करें। जबकि ये नहीं पूछा जा रहा कि आख़िर इस आंदोलन के दूध में मक्खी का काम किसने किया? आख़िर क्या कारण रहा कि देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी को विश्वास में लेने का काम नहीं किया गया? ना उससे रिप्रेजेंशन लिया गया। कांग्रेस को ट्रस्ट में लेने का काम किसने नहीं किया? किसने कांग्रेस को डिसक्रेडिट किया? कांग्रेस को अपने अंदर लाने के लिए कॉक्रोच आंदोलन की लीडरशिप ने क्या किया? सिवाय पत्र लिखने के? क्या उन्होंने कांग्रेस को कहा कि आप लीडरशिप में आइए? आप लीड करिए? या आपको हम रिप्रजेंटेशन देते हैं? बिना रिप्रजेंटेशन एंड बिना चेक्स एंड बैलेंस के देश की सबसे बड़ी पार्टी का सपोर्ट चाहिए, ये अपील है या सिर्फ़ चालाकी? सच ये है कि ये आंदोलन आज देश में उबाल मार रहा होता। लोग सड़कों पर होते अगर इस आंदोलन में अलग अलग विचार के लोगों को आने दिया गया होता। ख़ासकर एक कमिटी बनाई गई होती। जिसमें हर पार्टी और विचार के लोग होते। जिससे अलग अलग पार्टी से आने वाले लोगों का इस आंदोलन की लीडरशिप में विश्वास क़ायम होता। लेकिन अभिजीत दीपके ने वायसराय बनना चुना। और आंदोलन फ्लॉप हो गया। आज जो भी सपोर्ट आ रहा है वांगचुक की वजह से आ रहा है। दरअसल ह्यूमैनिटी की वजह से आ रहा है कि एक आदमी मर ना जाए। वरना आंदोलन में एक डेमोक्रेटिक लीडरशिप क्रिएट किए बिना जुड़के वांगचुक ने मूर्खता का ही काम किया है। छात्रों और देश के एक बड़े आंदोलन को फ्लॉप करने में दीपके एकमात्र कारण है। उसकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने छात्रों के आंदोलन को "अविश्वास" से भर दिया। फिर भी मेरा मानना है इस हरामी सिस्टम पर बैठे शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की लड़ाई में हम साथ दें। मुझे मालूम है इससे कुछ नहीं होगा इससे अधिक मूर्खतापूर्ण लड़ाई कुछ नहीं है। मगर फिर भी साथ दें। क्योंकि वांगचुक को बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है। वांगचुक ने मूर्खता की मगर उनकी इंटेंशन अच्छी थी। दीपके ने होशियारी की मगर उनकी इंटेंशन घटिया थी। वांगचुक से असहमत होते हुए भी मैं उन्हें सपोर्ट करने के पक्ष में हूँ। हम और आप इस बात को रेखांकित करते हुए कि कॉक्रोच आंदोलन के दीपके ने इस आंदोलन के डेमोक्रेटिक स्वरूप को जन्म लेने नहीं दिया और पूरा अकेले मलाई मारने के चक्कर में इस आंदोलन के प्रति अविश्वास और अश्रद्धा पैदा कर दी इसके बावजूद हम इस आंदोलन को सपोर्ट करते हुए। एक अच्छी इंटेंशन के साथ।
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Parth MN
Parth MN@parthpunter·
"Sita ke pati ka naam leke, Nita ke pati ka kaam kar rahe hai." Kunal Kamra at his biting best
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UnStoryteller@Un_Storyteller·
Delhi HC Steps In: Will Sonam Wangchuk Be Force-Fed?🚨Sonam Wangchuk's Hunger Strike: #SonamWangchuk
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The DeshBhakt 🇮🇳
The DeshBhakt 🇮🇳@TheDeshBhakt·
Nobody wants #Journalism to die. The person who can save this today is @sudhirchaudhary. Convince him to end his farcical show on TV. Take him to Tihar. If Sudhir wants to make a point, he can start by becoming an official party spokesperson but please spare Journalism. Don't turn your profession into political campaign tool.
Sudhir Chaudhary@sudhirchaudhary

Nobody wants #SonamWangchuk to die. The person who can save his life today is Abhijit Dipte. Convince him to end his hunger strike. Take him to a hospital. If Abhijit wants to make a point, he can start a hunger strike himself but spare Sonam. Don’t turn an old man’s life into a political campaign.

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वरुण 🇮🇳
वरुण 🇮🇳@varungrover·
Nirma ne khud hi kaha tha - “Doodh si safedi, Nirma se aaye”.
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Piyush Rai
Piyush Rai@Benarasiyaa·
Headline 🔥
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UnStoryteller@Un_Storyteller·
@AnupamPKher और बिना रीढ़ की हड्डी का आदमी सीधा खड़ा नहीं हो सकता!
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Anupam Kher
Anupam Kher@AnupamPKher·
सच्चाई!! 😍
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Abhisar Sharma
Abhisar Sharma@abhisar_sharma·
बेशर्म-ढीठ आदमी... बेइज्जती से नहीं डरता! आपकी कायरता दुनिया देख चुकी है..जब 2014 से पहले सभी मुद्दों पर आप बोलते थे और अब अव्वल दर्जे के छुट भैय्या propagandist बन चुके हैं आप. यही आपकी विरासत है अनुपम जी....
Anupam Kher@AnupamPKher

सच्चाई!! 😍

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UnStoryteller@Un_Storyteller·
@Sachingupta @madanmohansoni ये तो बहुत बढ़िया बात है... अब कृपया इसी को अमरनाथ मान कर हमारे पहाड़ों को अकेला छोड़ दो यार! 🙏
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Sachin Gupta
Sachin Gupta@Sachingupta·
उत्तर प्रदेश : आगरा में एक घर में फ्रिज के अंदर "शिवलिंग" जैसी आकृति बन गई है। लोग इसे अमरनाथ के पवित्र हिमलिंग जैसी आकृति से जोड़ रहे हैं। पूजा–पाठ शुरू हो गई है। चढ़ावा आना शुरू हो गया है। @madanmohansoni
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