
हर रोज सैकड़ों लोगों के आंसुओं को पोछने की कोशिश करता हूं। सक्सेज रेट 10 प्रतिशत भी पार नहीं कर पाता। किसी को फोन/मैसेज करने से नहीं हिचक रहा। सोचता हूं, कोई तो मदद करेगा। लोग करते भी हैं, लेकिन वो जिनकी जिम्मेदारी नहीं है। जिम्मेदार तो सोए हैं। खैर, सबका हिसाब लिया जाएगा।




















