VISHAL MISHRA
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चलिए अब आपको आज की उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी से जुड़ी दूसरी घटना भी बता देता हूँ — जो सच में उनके व्यक्तित्व को और बड़ा बनाती है। सोशल मीडिया पर आपने “छाती पीटो गैंग” की तमाम पोस्ट देखी होंगी। दावा किया गया कि ब्राह्मण समाज के एक कार्यक्रम में पूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा जी को भारी विरोध का सामना करना पड़ा, और कुछ लोगों ने तो यह तक लिख दिया कि ब्रजेश पाठक जी का भी विरोध हुआ। अब सुनिए सच्चाई। मोहनलालगंज का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उप मुख्यमंत्री जी ने मुझे अपने साथ ही बैठा लिया। वहाँ से उन्हें इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान जाना था। इसी बीच खबर आई कि वहाँ विरोध हुआ है। कई शुभचिंतकों के फोन आने लगे “भाई साहब, आपको उस कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए, हो सकता है आपका भी विरोध हो।” ऐसे समय में जो निर्णय लिया गया, वही उन्हें अलग बनाता है। उप मुख्यमंत्री जी ने अपने सहयोगियों से स्पष्ट कहा “अगर विरोध हुआ तो क्या हुआ? वो अपने ही लोग हैं। मैं सिर्फ विरोध की वजह से अपना कार्यक्रम निरस्त नहीं करूँगा। अगर सवाल करेंगे तो जवाब दूँगा। सरकार हमारी है, लोग भी हमारे हैं। अगर वे नाराज़ हैं तो उनकी नाराज़गी दूर करना हमारी जिम्मेदारी है।” यही लोकतंत्र की असली भावना है। पद से नहीं, व्यवहार से नेतृत्व सिद्ध होता है। वे कार्यक्रम में गए। जिन लोगों के बारे में कहा जा रहा था कि विरोध कर रहे हैं उनकी बात सुनी, संवाद किया, और परिणाम यह हुआ कि वही लोग उन्हें बाहर तक छोड़ने आए। माहौल सकारात्मक हुआ, संवाद बना, और अंत में सबने साथ खड़े होकर सेल्फी ली। 😊 आज के दिन के दो निर्णय एक, कड़कती धूप में किसानों के बीच पहुँचना। दूसरा, संभावित विरोध से डरकर पीछे न हटना। यही वजह है कि मैं कहता हूँ सिर्फ नाम के नहीं, निर्णय और साहस में भी परफेक्ट हैं ब्रजेश पाठक ।

















