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Samyak Vinod Siddharth
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Samyak Vinod Siddharth
@VKSiddharth
Traveling,driving & cooking
222146 Jaunpur, India Katılım Temmuz 2013
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साथियों प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती है..! लखनऊ के पूर्व असपा अध्यक्ष की आपबीती खुद सुन लीजिए...! युवाओं से मेरा कहना है जिस पार्टी मे आक्रोश के चलते आप पर मुकदमें दर्ज होते हो तो आप का भविष्य अंधेरे में चला जायेगा, समय रहते ऐसी पार्टी से नाता तोड लीजिए...! आपका अपना घर #बीएसपी ही है जो महापुरुषों के आदर्शों पर चलने वाली अकेली पार्टी है आओ हम सब मिलकर #बीएसपी रूपी अपने घर को मजबूत करें और परम पूज्य बाबा साहेब के दिए हुए संविधान पर चलने वाली #बीएसपी सरकार बनाएं_ जय भीम 🙏
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बहिनजी साफ कहती हैं कि 2 अप्रैल 2018 के भारत बंद में जितने भी दलितों पर केस हुए है वो वापस लेने होंगे तभी समर्थन दिया जाएगा।
कांग्रेस हां कर देती है, लेकिन वो केस खत्म नहीं करती मध्यप्रदेश,राजस्थान में दोनों जगह सरकार रही। केस खत्म नहीं किए।
लेकिन ये राहुल गांधी अब प्रधानमंत्री को खत लिख रहे 🫣
कांग्रेस बहुत ही धूर्त पार्टी है, राहुल गांधी की तो बात ही ना करो।ऐसे लोग बेवकूफ बनाते हैं, और समाज बनता भी है।
कांग्रेस शासित राज्यों में कितना भी दलितों पर अत्याचार होता रहे, कुछ नहीं बोलना है।
इस कांग्रेस ने केंद्र में रहते ना बाबा साहब को भारत रत्न दिया, ना साहब कांशीराम जी को, लेकिन जब सत्ता में नहीं है तब मांग करते हैं।
आजाद परिंदा

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@ChimaKapase @jitu_rajoriya साधुवाद सर
सही रेफरेंस देने के लिए
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@VKSiddharth @jitu_rajoriya ➡️मान्यवर - कांशीराम जी साहब - ने ऐसे कहा था कि - मिशन कैसे चलाना है यह मैने उत्तर भारत के - चमारो - से सिखा और कैसे बर्बाद करना है - ये मेंने महाराष्ट्र के - महारो - से सिखा - 🧐👍🏻
➡️यह बात आज भी 1 करोड % सही है - मान्यवर कांशीराम जी साहब के दूरदृष्टी को Salute - 🫡🫡
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राजरतन अंबेडकर कुछ दिन पहले अखिलेश यादव से मिले और उन्होंने नारा दिया कि मिले “अंबेडकर और अखिलेश, खुल जाएँगे साधुओं के भेष”
उसके बाद सच्चे बाबा साहेब के अनुयायिओं ने अखिलेश यादव के शासन में हुए बहुजन महापुरुषों के अपमान को याद दिलाया और कहा कि आप ऐसे व्यक्ति के लिए कैसे प्रचार प्रसार कर सकते हैं जिसने ख़ुद महात्मा ज्योतिबा फुले, शाहू जी महाराज, मान्यवर कांशीराम जी के नाम पर बने जिलों के नाम बदल कर उनका अपमान किया उसे कैसे बाबा साहब के चाहने वाले अपना नेता मान लें?
आज राजरतन अंबेडकर सफाई दे रहा है कि मैं तो सिर्फ इफ़्तार पार्टी में शामिल हुआ था मुझे तो मुस्लिम समाज में आमंत्रित किया।
राजरतन अंबेडकर समझ गया कि उत्तर भारत के लोग अब आसानी से गुमराह नहीं हो सकते उन्हें इतिहास पता है कि किसने सच में बहुजन समाज के उत्थान के लिए संघर्ष किया किसने बहुजन महापुरुषों असली सम्मान देने का काम किया इसलिए राजरतन जैसे और भी आ जाए तब भी अंबेडकर जी अनुयायियों को गुमराह नहीं कर सकते हैं।
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BSP ने गहलोत सरकार पर 2 अप्रैल के केस वापस लेने का दवाब बनाया, गहलोत ने वापस लेने की जगह BSP के विधायक के आधी रात में दलबदल करवा दिए.
कोंग्रेस में दरी बिछाने वाले एससी एक बार भी गहलोत से पूछ नही सके की आपने केस वापस क्यों नही लिए.
गुलामी DNA में है, इसलिए नही पूछा.
@Mayawati
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गाजियाबाद,यूपी : एससी वर्ग के प्रोफ़ेसर नितिन कुमार और मुस्लिम वर्ग की मुस्कान दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों ने एक वर्ष पहले प्रेम-विवाह किया।
चूंकि मुस्कान मुस्लिम वर्ग से थी और नितिन कुमार एससी वर्ग से,इसलिए मुस्कान के पिता मेहरुद्दीन और चाचा आसिफ अली को दलित व्यक्ति से शादी बर्दाश्त नहीं हुई और वह मौके के इंतजार कर रहे थे।
प्रोफेसर नितिन कुमार और उसकी पत्नी मुस्कान के बीच सुबह के समय जल्दी उठने को लेकर कुछ कहासुनी हुई,इसके बाद मुस्कान गुस्से में अपने पीहर चली गई। मुस्कान 8 माह की गर्भवती है।
ससुराल पक्ष ने पति-पत्नी के बीच सुलह कराने के लिए धोखे से नितिन को बुलाया और ससुर मेहरुद्दीन,चचिया ससुर आसिफ अली और तीन अन्य लोगों ने मिलकर उसकी निर्मम हत्या कर उसे सड़क पर फेंक दिया।
मैं पिछसे दस वर्षों से लगातार लिख रहा हूँ कि एससी वर्ग के लड़के-लड़कियों को अन्तर्जातीय प्रेम व विवाह और अन्तर्धार्मिक प्रेम व विवाह नहीं करने चाहिए।
यह सत्य यह भी है कि एससी वर्ग के जो लड़के-लड़कियाँ अन्तर्जातीय प्रेम व विवाह और अन्तर्धार्मिक प्रेम व विवाह करते हैं,असल में वो अपनी मौत को न्योता देते हैं।

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निहारिका मेघवाल की 12 वी छात्रा है, निहारिका मेघवाल ने संघर्ष के बलबूते पर 12 वी ह्युमैनिटीज में 97.80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं।
निहारिका इंग्लिश मीडियम में पढ़ती हैं इनका अगला लक्ष्य यूपीएससी एग्जाम निकालना है।
निहारिका मेघवाल को बहुत बहुत शुभकामनाएँ और कामना करते हैं कि वो अपने लक्ष्य में कामयाब हो।
जय भीम जय संविधान
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2 अप्रैल 2018 का भारत बंद, हाल के दशकों का सबसे व्यापक और प्रभावशाली सामाजिक आंदोलन साबित हुआ। इस एक दिन में देशभर में कम से कम 500 स्थानों पर ट्रेनों को रोका गया, लगभग 25,000 लोग हिरासत में लिए गए और आंदोलन के दौरान हिंसा एवं हमलों में 13 निर्दोष व्यक्ति शहीद हो गए। यह आंदोलन अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया था।
उसी शाम, केंद्र सरकार ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की घोषणा कर दी। यह फैसला आंदोलन की ताकत और दलित-बहुजन समाज की एकजुटता का जीवंत प्रमाण था।
एससी/एसटी एक्ट 1989 एक विशेष कानून है, जिसे इसलिए अस्तित्व में लाया गया था क्योंकि भारतीय दंड संहिता (IPC) की सामान्य धाराएँ जाति-आधारित अत्याचारों को रोकने में अपर्याप्त साबित हो रही थीं। कई मामलों में स्थानीय प्रशासन की जातिगत पूर्वाग्रहों के कारण अपराधी बच निकलते थे और पीड़ित न्याय से वंचित रह जाते थे।
इस कानून में तीन महत्वपूर्ण प्रावधान थे — शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज करना, आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी और अग्रिम जमानत (anticipatory bail) पर पूर्ण प्रतिबंध। इन प्रावधानों का उद्देश्य पीड़ितों को त्वरित न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट की दो-जजों की पीठ (जस्टिस यू.यू. ललित और जस्टिस एके गोयल) ने इन तीनों प्रमुख प्रावधानों को निरस्त कर दिया। अदालत का तर्क था कि इस कानून के कुछ मामलों में दुरुपयोग हुआ है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने भी अदालत में अग्रिम जमानत दिए जाने की संभावना को स्वीकार किया था। हालांकि, इस “दुरुपयोग” के दावे के समर्थन में कोई ठोस आँकड़े या व्यापक आंकड़े पेश नहीं किए गए।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने पूरे देश में गहरा आक्रोश और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी। दलित-बहुजन समाज को लगा कि उनके संवैधानिक अधिकारों पर हमला हो रहा है। 2 अप्रैल 2018 की सुबह, इस आक्रोश ने हजारों गांवों और शहरों में सामूहिक रूप ले लिया। सड़कों पर नीले झंडे और बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें छा गईं। यह एक स्वाभाविक, जन-आधारित आंदोलन था, जिसमें कई व्यापार संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी सक्रिय समर्थन दिया।
इस आंदोलन की ताकत को देखते हुए केंद्र सरकार को तुरंत समझ आ गया कि एक गंभीर भूल हो गई है। संसद ने नए कानून के माध्यम से मूल प्रावधानों को पुनः बहाल कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी नए विधान का सम्मान किया और उसे लागू होने दिया।
इस आंदोलन में 13 निर्दोष लोग शहीद हुए। वे केवल अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे थे। आज जब हम इस घटना को याद करते हैं, तो उन शहीदों को शत-शत नमन है।
मैं स्वयं उस आंदोलन का हिस्सा था। मुझे गर्व है कि मैं उन लाखों लोगों में शामिल था, जिनकी सामूहिक आवाज को अंततः सरकार, संसद और सर्वोच्च न्यायालय — तीनों ने सही माना।
जय भीम
जय भारत

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इस मंदिर का मुख्य पुजारी लक्ष्मण यादव होंगे??
Akhilesh Yadav@yadavakhilesh
निर्माणाधीन श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर, इटावा।
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IAS पद से इस्तीफा देने वाले रिंकू सिंह का घर देखिए कैसा है जबकि कलेक्टर एसपी के मकान तो आलीशान होते हैं करोड़ों रुपए की लागत से उनके बंगले तैयार होते हैं।
परंतु आज भी रिंकू सिंह के को देखिए जस का तस हैं। अभी मकान की पुताई तक नहीं करवाई योगी सरकार ने रिंकू सिंह जी को इतना प्रताड़ित किया कि उन्होंने इस्तीफा देना पड़ा अपने पद से।
IAS रिंकू सिंह का घर देखिए!
आप खुद पूर्व IAS रिंकू सिंह जी के पिता जी का दर्द देखिए! रिंकू सिंह की हिम्मत, संघर्ष और ईमानदारी देखिए!
सरकार और सिस्टम की बेईमानी और नीचता देखिए!👎
#IAS
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2 अप्रैल में शहीद सपूतों को भावपूर्ण नमन है ऐसे सपूतों को जो अपनी जान की परवाह तक नहीं की और सामाजिक आंदोलन में कूद पड़े 🙏💐😰
यह सिर्फ बलिदान ही नहीं लाखों लोगों के हक अधिकार की लड़ाई थी !!
अगर भविष्य में ऐसी नीति दोबारा आती है तो आपका "बहुजन सेना" सबसे आगे मिलेगा !!
आपका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी महापुरुषों का सम्मान सर्वोच्च रहेगा !!
#Málaga #ditjenpas

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भ्रष्टाचार के दौर में जिस व्यक्ति ने 100 करोड़ रुपये घोटाले का पर्दाफाश किया हो जिस व्यक्ति ने अपने काम के प्रति ईमानदार बने रहकर शरीर पर गोलियां खाई हो उस व्यक्ति की सिस्टम को लेकर उम्मीद हार जाना बहुत दुखद है।
आप दलित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने कहा कि मैं बैठकर वेतन लेना नहीं चाहता मुझे काम चाहिए लेकिन काम मिला नहीं इसलिए सिस्टम के आगे कान पकड़े और इस्तीफ़ा दे दिया।
आज के समय में कौन ऐसा होगा जो बैठकर मिल रहे पैसों को ठुकराएगा? रिंकू से ने ठुकराए और इसलिए ही आज आईएएस रिंकू सिंह राही के घर की जर्जर दीवारें गवाही दे रही हैं कि उन्होंने जीवन में सिर्फ ईमान का पैसा कमाया है।
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ऐसी ही जातिवादी और सामंतवादी
मानसिकता रखने वाले गुण्डों के लिए हमनें नारा दिया था -
''चढ़ गुण्डों की छाती पर,बटन दबेगा हाथी पर''
प्रिय @bihar_police मामले को संज्ञान में लें और दुराचारी मानसिकता के इस गुण्डे को जेल में डालें।
ऐसे गुण्डे स्वच्छ समाज के लिए बहुत खतरनाक हैं।

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