Vanhi वन्ही

9.8K posts

Vanhi वन्ही banner
Vanhi वन्ही

Vanhi वन्ही

@VanhiKalpit

लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं, अगर मैं भी यही सोचूंगी तो फिर लोग क्या सोचेंगे।🤔 No DM 🚫 I left my job 😌 🇮🇳 🚩

Classified Katılım Ağustos 2019
4.4K Takip Edilen6.2K Takipçiler
मासूम बालक 🫂
ये गिफ्ट दे रहे हैँ या जला रहे हैँ.??.. मेड इन इंडिया का प्रचार करना कोई मोदी जी से सीखे... ❤️😊😃........ पारले जी की मेलोडी आउट ऑफ स्टॉक हो चुकी है ऑनलाइन सप्लाई वेबसाइट पर 🤗🤗 एक मेलोडी के पैकेट में मोदीजी ने पप्पू की मौसी ही चुरा ली 😂😂😂 @yagnaja
हिन्दी
3
3
6
74
Vanhi वन्ही retweetledi
मासूम बालक 🫂
भयमुक्त समाज, सुरक्षित बेटियाँ—यही है योगीराज में सुशासन का संकल्प। @SuvenduWB जी। बंगाल में भी ऐसा ही होना चाहिए। जैसे @myogiadityanath जी का खौफ अपराधियों में है ऐसा ही खौफ अब बंगाल में आपका होना चाहिए 💪 #YogiAdityanath #UttarPradesh
हिन्दी
0
2
3
42
Vanhi वन्ही retweetledi
मासूम बालक 🫂
@khanumarfa की बीजी को सड़क पर चलते समय दुबई शेख ने समझा SX सर्विस वाली बोला चल कार में आजा पैसे दूंगा क्या इतनी इज्जत रह गई है भारतीय मुस्लिम महिलाओ की?? भारत के बाहर इन्हे वेश्या क्यो समझा जा रहा है 🤔 इसको भी हिजाब ने नहीं बचाया ?
हिन्दी
0
7
14
229
Vanhi वन्ही retweetledi
मासूम बालक 🫂
उत्तर प्रदेश में @rajkumarbhatisp भाटी ने @yadavakhilesh का सुपड़ा साफ करने में अच्छी खासी बैटिंग कर दी है भाजपा के लिए। अब समझो 2027 में योगीजी @myogiadityanath को 300 पार से कोई नहीं रोक सकता है 🥰🥰 @yagnaja
हिन्दी
1
3
5
26
Vanhi वन्ही retweetledi
मासूम बालक 🫂
अब तक रुमीनाथ कार चोरी के रैकेट वाले केस में बुरी तरह से फंस चुकी थी और उसके बाद उसे पुलिस द्वारा अरेस्ट कर लिया गया। ये थी कहानी एक हिन्दू गृहिणी रूमी नाथ की जो जिहादी अहमद सिद्दीकी के इशारे पर विधायक बनी, फिर अपने पिता, घरवालों, अपने पति अपनी 2 वर्षीय बेटी को बिना बताए बिना डिवोर्स दिए उन्हें त्यागकर, अवैध सम्बन्धों और लव जिहाद में अंधी होकर राबिया सुल्ताना बनी और शांतिदूत ज़ाकिर की बीवी बन अपने घरवालों को छोड़कर बंग्लादेश भाग गई। बाद में उसके उसी प्रेमी जाकिर ने रोज़ उससे उसके पैसे छीनने शुरू किये, सामूहिक ब्लात्कार कराया, प्रतिदिन उसकी पिटाई-कुटाई चालु की, उसके बाद रूमी उससे अलग होकर अपराध की दुनिया में घुस कार चोरी के रैकेट की सदस्य बनी फिर चुनाव भी हारी, घरवालों ने मुंह फेर लिया और आज जेल में है। इस लेख को सोशल मीडिया में हर हिन्दू इतना प्रचारित करे कि हिन्दू समाज की लड़कियों को सच्चाई का पता चले। उनके जीवन की रक्षा करना हर हिन्दू का कर्त्तव्य हैं।
हिन्दी
0
2
4
374
Vanhi वन्ही retweetledi
मासूम बालक 🫂
लव जेहाद में फंसी विधायक रूमी नेत्री की हालत आज आपको असम की विधायक रूमी नाथ की कहानी बताते हैं। असम में एक बड़े प्रतिष्ठित डॉक्टर थे राकेश कुमार सिंह इलाके के लोग उनका बहुत सम्मान करते थे क्योंकि वह क्षमतानुसार सब की सहायता करते थे। डॉक्टर साहब की पत्नी थी रूमी नाथ जिससे उन्हें 2 वर्ष की बेटी थी। उन दिनों असम के एक मंत्री अहमद सिद्दीकी का डॉक्टर साहब से जान पहचान हुई और अहमद सिद्दीकी का डॉक्टर साहब के घर आना जाना शुरु हुआ। अहमद सिद्दीकी ने डॉक्टर साहब की प्रतिष्ठा का राजनितिक लाभ उठाने हेतु उनकी पत्नी रूमी नाथ को टिकट दिलवाकर MLA का चुनाव लड़वाने का सुझाव दिया। अहमद सिद्दीकी यह जानता था की महिला होने के कारण और डॉ राकेश सिंह की प्रतिष्ठा और सम्मान के कारण क्षेत्र के अधिकांश वोट डॉक्टर राकेश सिंह की पत्नी रूमी नाथ को ही मिलेंगे और महिला उम्मीदवार होने के नाते महिला वोट तो रूमी नाथ को मिलने ही थे, और जब चुनाव परिणाम आया तो आशानुरूप रूमी नाथ चुनाव जीत गई। लव जेहादी अहमद सिद्दीकी का असली रूप अब सामने आया। अब अहमद सिद्दीकी का रूमी नाथ से प्रतिदिन से मिलना होता और धीरे धीरे अहमद सिद्दीकी ने रूमी नाथ का ब्रेनवाश करना शुरू किया। अहमद सिद्दीकी ने रुमि का परिचय एक बांग्लादेशी मुस्लिम युवक जैकी ज़ाकिर से करवाया और उस युवक से रुमी को प्रेम जाल में फसाने को कहा। अब ज़ाकिर ने रोज़ रूमी से मिलने-जुलने का सिलसिला शुरू किया। कुछ समय बाद रूमी नाथ पूरी तरह से अहमद सिद्दीकी और जैकी ज़ाकिर के लव जेहाद के चंगुल में फंस गई। इसके बाद अहमद सिद्दीकी ने एक दिन रूमी नाथ को अपने बंगले पर बुलाया और वहां पानी में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाने के बाद उसका सामूहिक ब्लात्कार किया, वीडियो बनवाया और उसी को दिखाकर ब्लैकमेल कर धर्म परिवर्तन करवा कर उसे इस्लाम कबूल करवाया और उसका नया नाम रखा गया रबिया सुल्ताना। रूमी नाथ ने बिना डॉक्टर राकेश सिंह को कुछ बताये, बिना अपनी 2 वर्ष कि बेटी की चिंता किए, बिना डिवोर्स लिए उस बांग्लादेशी युवक ज़ाकिर से निकाह कर लिया। अहमद सिद्दीकी जानता था कि मामला संवेदनशील है अतः उसने रूमी नाथ और और उस बांग्लादेशी युवक ज़ाकिर को बांग्लादेश भिजवा दिया। रूमी नाथ के पिता और पति दोनों प्रतिष्ठित व्यक्ति थे उन्होंने इस विषय को उठाया भी किंतु रूमी नाथ खुद एक विधायक थी, अतः कुछ ना हो सका। रूमीनाथ के पिता और उसके पति डॉ राकेश सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अहमद सिद्दीकी का नाम लिया और लोगों से अपने बच्चों बहु बेटियों को जिहादियों से दूर रखने को कहा। कुछ दिनों बाद अहमद सिद्दीकी ने बांग्लादेश स्थित भारतीय दूतावास को चिट्ठी लिखकर जैकी जाकिर को वीजा देने को कहा, जिसके बाद रूमीनाथ से रुबिया सुल्ताना बनी रूमी अपने नए मुस्लिम बंगलादेशी शौहर को साथ लेकर वापस भारत आ गई और अपने क्षेत्र में अलग घर लेकर रहने लगी। डॉ राकेश सिंह इस अपमान को सहन नहीं कर पाए और अपनी 2 साल की बच्ची को लेकर उत्तर प्रदेश के अपने गांव गोरखपुर चले गए और रूमी नाथ के घर वालों ने उससे सारे संबंध तोड़ लिए। रूमीनाथ और जाकिर 2 साल तक साथ रहे जिससे रूमी को एक लड़की हुई और फिर जैसा कि हमेशा से होता है शांतिदूत जाकीर ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। रुमी के साथ रोज मार पिटाई होती, उसे प्रताड़ित किया जाता, शांतिदूत उसके साथ सामूहिक ब्लात्कार करते और जाकिर उससे उसके सारे पैसे छीन लेता। जिससे त्रस्त होकर रूमी नाथ ने ज़ाकिर के खिलाफ पुलिस में शिकायत करी और उसके बाद वो जाकिर से अलग हो गई। अब रुमी को अपनी विधायकी और छवि का ख्याल आया और उसने इस्लाम को त्याग कर पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया। किंतु अब तक उसे जिहादियों की संगत में नशा, अपराध और सभी गलत कामों की लत लग चुकी थी। कभी वो सीधी साधी गृहणी रुमिनाथ अब पूरे भारत में सक्रिय एक अंतर्राष्ट्रीय कार चोरी करने वाले रैकेट की एक्टिव सदस्य बन चुकी थी। जो पूरे भारत से चोरी की जा रही महंगी गाड़ियां को अवैध रूप से असम में बेचने का गोरखधंधा चलाती थी। इस सबके बीच चुनाव आए और क्योंकि इस बार रूमी के साथ उसके पहले पति डॉ राकेश सिंह की प्रतिष्ठा नहीं थी और अपने पहले पति और 2 वर्षीय बेटी को छोड़कर इस्लाम कुबूल करने, जाकिर से निकाह कर उसके साथ भागने के कारण जिन लोगों ने उसे पिछली बार वोट देकर उसे विजयी बनाया थथा उन लोगों ने इस बार उससे अपना समर्थन वापस ले लिया और परिणाम स्वरुप रूमीनाथ बुरी तरह से चुनाव हार गई। रूमी नाथ अब ज़ाकिर से पैदा हुई अपनी बेटी को लेकर अपने पिता और घर वालों के पास गयी किंतु उन्होंने उसे स्वीकारने से मना कर दिया। @SouleFacts
मासूम बालक 🫂 tweet media
हिन्दी
8
30
45
2.7K
Vanhi वन्ही retweetledi
मासूम बालक 🫂
मार्कण्डेय ने उत्तर दिया, "मैं गिन रहा हूँ कि इन चींटियों ने कितनी बार स्वर्ग के राजा का पद प्राप्त किया है।" इंद्र ने सिर झुका लिया। मार्कण्डेय बोले, "इंद्र, पद मिलने से आत्मा बड़ी नहीं होती। आत्मा बड़ी होती है सेवा से। तुमने वृत्र को मारा, ये तुम्हारा कर्तव्य था, अहसान नहीं। कर्तव्य पर घमंड मत करो।" उस रात इंद्र महल में नहीं सोया। वह लोमश ऋषि की कुटिया में गया। पूछा, "ऋषिवर, इस चक्र से निकलने का उपाय क्या है? 72 बार इंद्र बनकर भी चींटी बनना पड़े, तो इस पद का सुख क्या?" लोमश हँसे। "सुख पद में नहीं, नाम में है।" "किसका नाम?" "उसका जो न बनता है, न बिगड़ता है।" बालक विष्णु ने अपना रूप दिखाया। चार भुजाएँ, शंख चक्र। इंद्र ने दंडवत किया। विष्णु बोले, "इंद्र, तुम देवताओं के राजा हो, पर राजा भी सेवक है। जब तक तुम 'मैं इंद्र हूँ' कहोगे, तब तक गिरोगे। जिस दिन तुम 'मैं दास हूँ' कहोगे, उस दिन उठोगे।" इंद्र ने उसी दिन से अमरावती में एक नियम बनाया। हर पूर्णिमा को वह स्वयं द्वार पर खड़ा होकर ऋषियों के चरण धोता। हर यज्ञ में वह पहला आहुति नहीं, अंतिम आहुति डालता। और हर बार जब वह सिंहासन पर बैठता, तो सिंहासन के नीचे चींटियों के लिए शक्कर रखता। देवता हँसते। इंद्र कहता, "ये मेरे पूर्वज हैं।" लोग पूछते हैं, क्या सच में एक चींटी 72 बार इंद्र बनती है? ऋषि कहते हैं, संख्या मत गिनो। बात समझो। इंद्र का पद पुण्य से मिलता है, पर पुण्य अहंकार से जल जाता है। अहंकार से जीव नीचे गिरता है। नीचे गिरकर भी यदि उसमें थोड़ी भी सेवा बची हो, तो वह फिर उठता है। यही संसार का चक्र है। 72 कोई जादू की संख्या नहीं। 72 का अर्थ है बहुत बार। इतनी बार कि गिनती थक जाए। इसलिए जब भी तुम्हें लगे कि तुम सबसे ऊपर हो, तो जमीन पर चलती चींटियों को देखो। हो सकता है उनमें से कोई तुमसे भी ज्यादा बार राजा रह चुका हो। और जब लगे कि तुम सबसे छोटे हो, तो भी चींटियों को देखो। वे भी एक दिन इंद्र बन सकती हैं, यदि उनके कर्म में निष्काम सेवा हो। लोमश ऋषि आज भी तप करते हैं। कहते हैं उनके हर रोम के झरने पर एक इंद्र बदलता है। और वह चींटी? वह अब भी कहीं चल रही होगी, अनाज का दाना लेकर। शायद इस बार वह इंद्र बनने नहीं, मुक्त होने के लिए चल रही हो।☝️🚩🚩 जय श्री नारायण हरि 🙏🚩 हर हर महादेव 🕉️🙏🚩
हिन्दी
0
1
1
59
Vanhi वन्ही retweetledi
मासूम बालक 🫂
वह चींटी जो 72 बार इंद्र बनी थी...... ये कथा पुराणों में आती है। कहते हैं इसे सुनने से बड़े से बड़ा अहंकार भी धूल हो जाता है। यह उस इंद्र की कथा है जिसने वृत्रासुर को मारा था, और उस चींटी की कथा है जो 72 बार स्वर्ग के सिंहासन पर बैठ चुकी थी। बात उस समय की है जब देवराज इंद्र ने अभी-अभी वृत्र को हराया था। तीनों लोकों में जय-जयकार थी। ऋषि यज्ञ कर रहे थे, अप्सराएँ नाच रही थीं, और अमरावती में इंद्र ने विश्वकर्मा को बुलाकर कहा, "मेरे लिए ऐसा महल बनाओ जैसा आज तक किसी इंद्र ने नहीं बनवाया।" विश्वकर्मा ने महल बनाया। सोने के कंगूरे, हीरों के झरोखे, मणियों के फर्श। इंद्र ने देखा तो छाती फूल गई। उसने कहा, "और बड़ा करो।" विश्वकर्मा ने और बड़ा किया। इंद्र ने फिर कहा, "और।" विश्वकर्मा थक गया। वह ब्रह्मा के पास गया। बोला, "प्रभु, इंद्र रुकता नहीं। हर बार महल तोड़कर नया बनवाता है।" ब्रह्मा ने कहा, "ये मेरे वश का नहीं।" दोनों विष्णु के पास गए। विष्णु मुस्कुराए। बोले, "अहंकार का इलाज हथौड़े से नहीं, आईने से होता है।" अगले दिन इंद्र अपने नए महल के सिंहासन पर बैठा था। द्वारपाल ने आकर कहा, "एक बालक आया है। हाथ में कुशा है, उम्र दस साल की लगती है, पर आँखें बहुत पुरानी।" इंद्र ने हँसकर कहा, "भेजो।" बालक आया। नंगे पाँव, माथे पर धूल। इंद्र ने पूछा, "कौन हो?" बालक ने कहा, "मैं वही हूँ जो आता है जब राजा अपने को भगवान समझने लगता है।" इंद्र को क्रोध आया, पर तभी बालक ने जमीन की तरफ इशारा किया। संगमरमर के फर्श पर चींटियों की एक लंबी कतार चल रही थी। काली-भूरी चींटियाँ, एक के पीछे एक, अनाज का टुकड़ा ले जाती हुई। इंद्र हँसा, "तुम मुझे चींटी दिखाने आए हो?" बालक बोला, "गिनो।" इंद्र ने कहा, "क्या गिनूं?" बालक ने कहा कि इनमें से कितनी बार तुम इंद्र बन चुके हो।" उसी समय सभा में एक और ऋषि प्रवेश हुए। लंबी दाढ़ी, शरीर पर रोम ही रोम। ये थे लोमश ऋषि। उनके छाती पर बालों का जंगल था। हर साँस पर एक बाल झरता, फिर नया उग आता। इंद्र ने प्रणाम किया। लोमश हँसे। इंद्र ने पूछा, "ऋषिवर, ये बालक क्या कह रहा है?" लोमश ने चींटियों को देखा और बोले, "ये सच कह रहा है।" लोमश ने एक चींटी को उंगली पर उठाया। बोले, "इसे देखो। ये अभी चींटी है। पर इससे पूछो तो ये बताएगी कि ये 72 बार इंद्र रह चुकी है।" इंद्र चौंका। "ऋषि, परिहास मत करो। इंद्र तो मैं हूँ।" लोमश बोले, "तुम आज हो। कल कोई और था। परसों कोई और होगा।" तब बालक, जो विष्णु थे, बोले, "इंद्र, तुम्हें लगता है स्वर्ग सदा तुम्हारा है। सुनो। ब्रह्मा का एक दिन हमारे 1000 चतुर्युग के बराबर होता है। उसके दिन में 14 इंद्र बदलते हैं। ब्रह्मा की आयु 100 साल है। अब तक कितने ब्रह्मा आए और गए, गिन नहीं सकते। हर ब्रह्मा के हर दिन में 14 इंद्र। सोचो, कितने इंद्र हो चुके।" लोमश ने अपनी छाती दिखाई। "मेरा एक रोम एक इंद्र की आयु में झरता है। जब सारे रोम झर जाएँ, मेरी मृत्यु होती है। फिर नए रोम के साथ मैं फिर जन्म लेता हूँ। अब तक मेरे कितने जन्म हो चुके, मुझे भी याद नहीं।" इंद्र का घमंड हिल गया। उसने पूछा, "तो ये चींटी?" लोमश बोले, "यही तो कथा है।" बहुत पहले, पहले कल्प में, एक राजा था, नाम था सत्यव्रत। उसने तप किया, पुण्य कमाया, और इंद्र बना। इंद्र बनते ही उसने सोचा, अब मैं अमर हूँ। उसने यज्ञ बंद कराए, ऋषियों को अपमानित किया, अपने महल को और ऊँचा कराया। जब उसकी आयु पूरी हुई, तो वह गिरा। पुण्य क्षीण। अगला जन्म हाथी का मिला। फिर घमंड के कारण शेर बना, फिर सियार, फिर कुत्ता, फिर चींटी। चींटी बनकर भी उसका अहंकार नहीं गया। वह अनाज चुराती, अपने बिल को सबसे बड़ा बनाती। एक दिन वर्षा में बिल बह गया। चींटी मरी। पर क्योंकि उसने कभी इंद्र रहते हुए एक बार अनजाने में एक भूखे ऋषि को जल दिया था, वह पुण्य बचा रह गया। अगले कल्प में वह फिर मनुष्य बनी, फिर तप किया, फिर इंद्र बनी। और फिर वही चक्र। इंद्र बनो, अहंकार करो, गिरो, 84 लाख योनियों में भटको, फिर पुण्य से उठो। लोमश ने कहा, "मैंने इस चींटी को गिना है। ये 72 बार इंद्र बन चुकी है। हर बार गिरी, हर बार उठी।" इंद्र ने चींटियों की कतार को देखा। अब वे उसे छोटी नहीं लगीं। वे उसे अपना अतीत लगीं। बालक विष्णु ने पूछा, "अब बताओ, तुम्हारा महल कितना बड़ा होना चाहिए?" इंद्र सिंहासन से उठा। उसने विश्वकर्मा को बुलाया। कहा, "महल तोड़ दो।" विश्वकर्मा चौंका। "क्यों देवराज?" इंद्र बोला, "क्योंकि ये महल मेरा नहीं है। मैं यहाँ किरायेदार हूँ। किरायेदार घर पर नाम नहीं लिखवाते।" उसी सभा में मार्कण्डेय ऋषि भी बैठे थे। वे चुपचाप चींटियों को देख रहे थे। इंद्र ने उनसे पूछा, "ऋषिवर, आप इतने ध्यान से क्या देख रहे हैं?" 👇
मासूम बालक 🫂 tweet media
हिन्दी
1
3
2
43
Vanhi वन्ही retweetledi
मासूम बालक 🫂
ॐ शं शनैश्चराय नमः शनि जयंती की सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। न्याय एवं कर्मफल के देवता, भगवान शनिदेव की कृपा से सभी को सुख, समृद्धि एवं आरोग्यता की प्राप्ति हो, यही मंगलकामना है। 🙏 #ॐ_शं_शनैश्चराय_नमः 🙏🚩
मासूम बालक 🫂 tweet media
हिन्दी
2
3
7
107
Vanhi वन्ही retweetledi
मासूम बालक 🫂
2002 में भी योगीजी बाहुबली थे। योगी जी के तेवर पहले से ही अलग हैं 💪💪💪 आप बंगाल को धमकी दे सकते हो हमें नहीं..💪💪 @myogiadityanath 🥰🥰🥰
हिन्दी
2
5
9
102
Vanhi वन्ही
Vanhi वन्ही@VanhiKalpit·
बहुमत से ज्यादा सीट लाकर क्या कीजियेगा😎😎😎 ..... कुमार - यूट्यूबर (कौन जात वाले) #electionresult2026
Vanhi वन्ही tweet media
हिन्दी
0
0
1
78
बबली R.C.Verma🚩
👉🏾पवन खेड़ा को जमानत, सुप्रीम कोर्ट के जजों का एक निर्लज्ज फैसला 🔥😡 Personal Liberty का मतलब बता दिया, जालसाजी करो, किसी का भी चरित्र हनन करो पर गिरफ़्तारी नहीं होगी 🔥 जब पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में गुवाहाटी हाई कोर्ट के खिलाफ अपील की, तो मैंने समझ लिया था कि अब उसे जमानत मिल जाएगी और आज वही हुआ। सवाल इस बात है कि फिर सुप्रीम कोर्ट को उसे हाई कोर्ट भेजने की जरूरत ही क्या थी.? उसी दिन ही खुद बेल दे देते, सुप्रीम कोर्ट के जजों से बेहतर और उचित तो हाई कोर्ट के जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया थे जिन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते तो political overtones हो सकता था लेकिन खेड़ा ने एक निर्दोष महिला पर दोषारोपण किया सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और AS Chandurkar ने घिनौना तर्क देकर कहा कि यह मामला Political Rivalry का लगता है जिस वजह से उसकी गिरफ़्तारी पर रोक लगनी चाहिए। सम ही नहीं विधान तो कैसा संविधान 😘 आग लगे ऐसे संविधान को 🔥🔥 सुप्रीम कोर्ट नहीं कोठा है। जिसमें सत्ता किसी की हो, सच कितना भी हो पर सिस्टम कांग्रेस का ही चलता है। 🐉🐷😡
हिन्दी
19
126
259
2.6K
Vanhi वन्ही
Vanhi वन्ही@VanhiKalpit·
@BablieVG @Zawwzq मैं तो पहले ही समझ गई थी… वरना न कोलेजियम सिस्टम पर भरोसा रहता, और न ही पैसों पर यकीन बचता।😌
हिन्दी
1
2
4
49
Vanhi वन्ही retweetledi
The Brain Yogi | Dr Vikaas
The Brain Yogi | Dr Vikaas@thebrainyogi·
रांची–दिल्ली एयर एंबुलेंस दुर्घटना से संबंधित समाचार में जिन डॉ. विकास कुमार का उल्लेख है, वे मैं नहीं हूँ। वे एनेस्थीसिया विभाग के दूसरे डॉक्टर थे। इस दुखद घटना में दिवंगत सभी लोगों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। मेरे प्रति आप सभी के स्नेह, चिंता और शुभकामनाओं के लिए हृदय से धन्यवाद। 🙏
हिन्दी
38
49
576
31.9K