श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ के अध्यक्ष,
'श्री कैलाश बारेलाल जी' को मध्य प्रदेश सरकार के अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष, " व सरकार में राज्य मंत्री" बनाए जाने पर
आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं 💐🙏
आज से पूरे एक महीने पहले मैंने ए ट्वीट किया था,
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शासन-प्रशासन में अपनी बात मनवाना हमें बखूबी आता है, क्योंकि हमने 'कच्ची गोलियां नहीं खेली हैं'।
आज मध्यप्रदेश सरकार ने एससी आयोग में लंबित नियुक्तियों की घोषणा कर दी,,
शुक्रिया, शानदार,जिंदाबाद 🙏
#MadhyaPradesh#SC_aayog
ग्वालियर में विक्रांत यूनिवर्सिटी से 6 नंबर रूट तक प्रशासन से अनुरोध है कि जो सिटी बसें (GDS) जून में शुरू होने वाली हैं, उन्हें मई की शुरुआत या अंत तक ही चलाने की कोशिश करें ताकि जनता को जल्द राहत मिले। @CollectorGwal@JM_Scindia@CMMadhyaPradesh#Gwalior#CityBus
सपा नेता रामगोपाल यादव जी को समस्या है कि मुसलमान दलितों से भी नीचे क्यों हो गए?
ये कब तय हुआ कि दलित सबसे नीचे रहेंगे?
वे मुसलमानों को समझा रहे हैं कि देखो, तुम तो दलितों से भी नीचे हो गए. मुसलमानों के नीचे होने से समस्या नहीं है. चिंता है कि हाय, दलितों से भी नीचे हो गए.
@AnilYadavmedia1 भारत में दोहरे समाज के 4 सांसद , आप उनमें से एक को जान से मारने की धमकी देंगे, निवास पर जाकर गालियां देंगे, वाह, पत्रकार को लगता है सांसद जी सपा से है तो आप लोग गालियां देते रहोगे,
ये इटावा के पत्रकार असित यादव हैँ
इटावा के सांसद जीतेन्द्र दोहरे ने इनपर फर्जी
Sc/ St एक्ट लगवाकर जेल भिजवा दिया है,
आप लोगों से निवेदन है,
ये सांसद अगला जो भी चुनाव लड़ें,
इनकी ज़मानत जब्त करवाने का काम किया जाए,
समाज सुधारकों को धर्म विरोधी बताना मूर्खता है. वसवन्ना, कबीर से लेकर, नारायणा गुरु, ज्योतिबा फुले, शाहूजी महाराज, यहां तक कि पेरियार भी इस्लाम या ईसाई धर्म की गंदगी या कीचड़ में नहीं गए. न अपने समर्थकों को वहां ले गए. वे भारतीय धर्मों में ही जीए और मरे.
सुधार की कोशिश की, कटु वचन भी बोले, पर रहे घर के अंदर.
इससे धर्मांतरण की साजिशों को धक्का पहुंचा. इसलिए भी भारत आज भी 80% से ज्यादा भारतीय धर्मों में बसता है.
जिनके काफी पुरखे जमींदारी और सरकारी संरक्षण पाने या बचाने के लिए मुसलमान या ईसाई बन गए, वे नहीं समझ पाएंगे.
सुधारकों की भाषा में तीक्ष्णता होती है. लेकिन उद्देश्य सुधार करना ही होता है. वैसे ही जैसे माता-पिता बच्चों को डांटते हैं.
उनकी बातों को संदर्भ के साथ समझना चाहिए. कहीं से दो लाइन उठाकर पूरे व्यक्तित्व को वही समझ लेना मूर्खों के लक्षण हैं.
आंबेडकरवादियों ने यूपी के मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी से मांग की है कि संभल जिले का नाम फिर से ओरिजनल नाम यानी "भीम नगर" कर दिया जाए.
संभल नाम का जिला था ही नहीं. बहनजी ने जब नया जिला बनाया, तब से जिले का नाम भीम नगर था. तुष्टिकरण के लिए सपा सरकार ने बाबा साहब के नाम पर रखे गए नए जिले का नाम 2012 में मिटा दिया.
एससी-एसटी एक्ट अब पहले से ज्यादा मजबूत है. 35 करोड़ दलित और आदिवासी पहले से ज्यादा संरक्षित हैं.
जब माननीय सुप्रीम कोर्ट के दोषपूर्ण आदेश के कारण एससी-एसटी एक्ट कमजोर पड़ गया था तो यशस्वी पीएम नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ एक्ट को बहाल किया, बल्कि उसे और मजबूत बनाकर वंचितों को संरक्षण दिया. माननीय सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बैंच ने बाद में उस दोषपूर्ण आदेश को खुद वापस ले लिया.
जब तक मोदी हैं, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और तमाम गरीबों के हितों पर आंच नहीं आएगी. "विकसित भारत 2047" में सभी हिस्सेदार बनेंगे. सबका साथ, सबका विकास. यही तो बाबा साहब का सपना है.
(डॉ. आंबेडकर नेशनल मेमोरियल, नई दिल्ली के उद्घाटन पर पीएम मोदी का संबोधन, बाबा साहब से जुड़े सभी 5 स्थलों का विकास मोदी के शासन में ही संभव हुआ. कांग्रेस को ये करने का सौभाग्य नहीं मिला)
मोदी जी ने लोकसभा में बताया कि,
आने वाले दिनों में हमे कोरोना की तरह तैयार रहना पड़ेगा।
इसका साफ मतलब ये है कि -
1- हमे पलायन के लिए तैयार रहना पड़ेगा
2- बेरोजगारी के लिए तैयार रहना पड़ेगा
3- भुखमरी के लिए तैयार रहना पड़ेगा
4- नेता आपदा में अवसर ढूंढेंगे
5- जनता फिर से मारी जाएगी
इस तर्क से तो लोग ये भी कह सकते हैं कि “महात्मा बुद्ध” के द्वारा पत्थरों पर कितने संदेश उकेरे गए? खैर महात्मा बुद्ध का जन्म हिंदू परिवार में हुआ था। दुनियाभर के सच्चे बौद्ध अनुयायी आज भी देवी देवताओं को पूजते हैं। ख़ुद दलाईलामा जी शिव जी का अभिषेक करते हैं।
भारत में नफ़रत फैलाने वाले एक वर्ग को छोड़ दिया जाए तो बौद्ध धर्म के अनुयायी ना पुजारियों पर अभद्र टिप्पणी करते, ना देवी देवताओं पाए अभी कमेंट करते, ना ही हिंदू धर्म पर, ना जबरदस्ती बौध गया में हंगामा कर माहौल ख़राब करते हैं।
बौद्ध धर्म ग्रंथ:- “त्रिपिटक में ही लिखा हुआ है कि बुद्ध का जन्म ब्राह्मण या क्षत्रिय परिवार में ही होगा।” बिना वर्ण व्यवस्था के ये कैसे संभव?
आप अगर ये कहें कि संशोधित मनु स्मृति को लिखने का काम अंग्रेजों द्वारा किया गया, जिसमें कई अन्वांछित पद जोड़े गए, तो इस पर चर्चा हो सकती है। लेकिन मनु स्मृति पर सवाल खड़ा कर देना, ये बता देना कि ये कभी थी ही नहीं, इससे कोई सहमति नहीं।
हालांकि हिंदू धर्म में कभी कट्टरता नहीं रही। दयालुता-करुणा ही इस धर्म की सबसे बड़ी USP रही। इसलिए मनु स्मृति या किसी ग्रंथ को मानने या किसी पर जबरदस्ती थोपने की कभी प्रथा रही ही नहीं। ये सदैव शासनतंत्र के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका में रही। यही कारण है कि त्रेतायुग से लेकर द्वापर तक हर जाति/समाज के लोग राजा बनते रहे हैं।
ये फोटो राजस्थान हाईकोर्ट की है।