Vishal Mishra
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Vishal Mishra
@Vishal_31dec
Truth ✌️||Engineer||Socialist||Vegan|| Coordinating with Left and Right brain||Love Politics with Zero Political knowledge||













" शुक्रिया मोदी भाई जान " अभियान की शुरुआत आज दो बजे होगी लखनऊ में।

एक दम सधा विनम्रता पूर्ण जवाब! प्रधानमंत्री पद का फेस बनाइए फर्क पड़ेगा!! @yadavakhilesh @dimpleyadav


मित्रों, आप मेरे शुभचिंतक हैं, परामर्श दे रहे हैं या निंदा कर रहे हैं, बहुत बहुत आभार। •कोई मित्र मुझे राज्यसभा दे रहा है, कोई UPSC दे रहा है •कोई BJP जॉइन करने की सलाह दे रहा है। •कोई पुरानी फाइल खुलने, ED,CBI के डर की बात कर रहा है। •कोई पैसे के लालच में फँसने की बात कर रहा है। कोई दुर्भावना नहीं लेकिन मुझे इस सब पर कई बार हंसी आती है और आश्चर्य भी। लेकिन लिखने वालों का भी दोष नहीं क्यों कि वे शायद मुझे अच्छे से जानते नहीं। अगर उपरोक्त पद में से कुछ भी चाहता तो चाटुकारिता करके कभी का पा लिया होता। और इन सब पदों से बड़े पदों पर तो मैं पूर्व में रहा ही हूँ। अपनी प्रशंसा करने से आदमी छोटा लगता है इसलिए आजतक लिखा नहीं। मैंने तीनों उच्च सेवाओं IAS,IPS व IFS पास कीं। ईश्वर की बड़ी कृपा रही है। समय से पूर्व IAS जैसी बड़ी नौकरी सिद्धांतों के ख़ातिर छोड़ दी। बड़े बड़े पदों पर रहा तो अब पद की क्या लालच? मैं TN शेषन का OSD रहा, उनसे बहुत कुछ सीखा कि निष्ठा से कैसे काम किया जाता है। अमेरिका की मशहूर मिशिगन यूनिवर्सिटी से MBA, PhD और फिर CPA किया। 18 किताबें लिखीं। 28 रिसर्च पेपर्स हैं, 6 पेटेंट्स हैं। अमेरिका जैसे देश में इतनी इज्जत मिली और भगवान से मैं क्या माँगूँ। इतने लंबे जीवन में तो मुझे किसी ने डराया नहीं, लालच देने की हिम्मत नहीं हुई तो अब क्या कोई ख़ाक डरायेगा या लालच देगा? योगी सरकार के पूर्व कार्यकाल में मेरे विरुद्ध 8 FIR हुई। मुझे झुकना होता तो तभी झुक जाता। हाँ, उस समय आप मित्रों ने मेरा साथ दिया लेकिन कोई विपक्षी दल मेरे साथ खड़ा दिखाई नहीं दिया। पिछले 9 सालों में विपक्ष को मेरी बातें अच्छी लगती थीं क्यों कि वे उनके पक्ष में थीं और आज बुरा लग रहा कि मैंने सिक्के को थोड़ा TILT कर दूसरा पहल क्यों देख लिया? मैंने अपनी इतनी लंबी नौकरी बिना झुके और बिना बिके, बड़ी शान से की है। जितने ज़िलों में कलेक्टर रहा हूँ, जाकर पूछ लो, अपने बड़े बुजुर्गों से, शायद बता दें। और हाँ, मैं कोई पार्टी जॉइन नहीं करूँगा, ऐसा कभी इरादा भी नहीं। ईश्वर के सिवाय,आज तक किसी से कुछ माँगने नहीं गया तो अब क्या माँगूँगा? लेकिन आपने ही मुझे अच्छा भी बोला है तो बुरा भी मुझे स्वीकार करना होगा, इस लिये आपकी कृतज्ञता। कमियाँ हर इंसान में होती हैं, मेरे में भी हैं, मैं स्वीकार करता हूँ। मैं भी आपकी ही तरह सिक्के का एक ही पहलू देख रहा था और एकतरफ़ा नफ़रत के जाल में फँस गया। राम जी की कृपा से मुक्त हुआ हूँ। कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं, चाहे कोई बड़ा राजनीतिज्ञ ही क्यों न हो। सत्ता के साथ अहंकार आता है, ये सही बात है। आज की राजनीति में सिक्के के दोनों पहलू देखने की ज़रूरत है। सत्ता विरोध में किसी ‘व्यक्ति विशेष’ से नितांत नफ़रत के दलदल में नहीं फँसना है, कुछ पॉजिटिव, चाहे थोड़ा ही सही, उसे भी तो देखना चाहिए। रामभक्ति सांप्रदायिक कैसे हो सकती है? जो अल्लाह या ईशा मसीह को मानते है क्या वे सांप्रदायिक हैं? मैं मानता हूँ कि राजनीति में धर्म नहीं आना चाहिए तो क्या विपक्ष जाति धर्म की राजनीति नहीं करता? जब हमाम में सभी नहाये हैं तो एक पक्ष को दोष क्यों? अंत में फिर से कहूँगा, राम मेरे आराध्य हैं उनकी आलोचना स्वीकार नहीं और अब न राममंदिर की। मैं फ़ैज़ाबाद का कमिश्नर रहा हूँ, अयोध्या की गलियों में घुमा हूँ जो मुझसे बन सका, मैंने किया जैसे फ़ैज़ाबाद बाईपास, गुप्तारघाट का जीर्णोद्धार आदि। उस समय सरकार जैसा बजट देती थी,वैसा किया। रामजन्म भूमि का प्रशासक भी रहा हूँ, कई बार राम जी को बरसात में भीगते देखा है। अंत में मेरी इतनी लंबी बातों को सुनने के लिए आपका पुनः आभार।🙏

