Vishnu Singh
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Vishnu Singh
@Vishnusinghaz
An admirer of liberal democracy, constitutionalism and humanism. Views are personal.
Katılım Eylül 2017
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उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न को लेकर जो विकल्प दिए गए उन पर हमे कड़ी आपत्ति है ।सरकार ने गंभीरता से संज्ञान में लिया है। किसी भी प्रश्न से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुँचती है तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।
मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों को कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। इस पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं ।संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार सभी समाजों के सम्मान, समानता और संवेदनशीलता के सिद्धांत पर काम करती है। प्रदेश के हर नागरिक की गरिमा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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@sanket बे-ख़ुदी बे-सबब नहीं 'ग़ालिब'
कुछ तो है जिसकी परदादारी है"
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@gauharraza9 बे-ख़ुदी बे-सबब नहीं 'ग़ालिब'
कुछ तो है जिसकी परदादारी है"
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The judgment in the Delhi excise case has come from a lower court. In the past, even the Delhi High Court and the Supreme Court of India have made strong and damning observations in related proceedings. Whether this judgment withstands scrutiny in higher courts remains to be seen. The legal process is far from over.
If Arvind Kejriwal was so honest, why did the Delhi government roll back and alter the policy once irregularities were flagged? Why were multiple phones and SIM cards destroyed? Why was the number of vendors reduced so sharply while commissions were increased from 6% to 12%? These decisions raise serious and legitimate questions. The kickbacks are not a figment of imagination, they are issues placed before the courts and the public.
More importantly, Kejriwal’s “one on one free” scheme harmed families across Delhi. His policies increased liquor prices and hurt households. He deserves the strictest punishment for running what was a morally bankrupt government.
The people of Delhi have already expressed their verdict through the ballot. Now, the judiciary will continue its examination. With further levels of judicial scrutiny pending, the final word is yet to be written.
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आप सब प्रिय जनों की, जिन्होंने मेरे जन्मदिन पर अपनी शुभकामनाएँ भेजी हैं , मैं हृदय से आभारी हूँ ।🙏
Mrinal Pande@MrinalPande1
I turn 80 today. जनतंत्र में घास के सवाल पर होनी चाहिए लंबी एक अखंड बहस शुरुआत के तौर पर मैं घोषित करता हूं कि अगले चुनाव में मैं घास के पक्ष में मतदान करूंगा कोई चुने या न चुने एक छोटी सी पत्ती का बैनर उठाए हुए वह तो हमेशा मैदान में है - केदारनाथ सिंह #GodMorningThursday
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@RebornManish इस जानकारी के बाद अब रॉयल एनफील्ड की सवारी करने वाले देशप्रेमी नहीं माने जाएंगे 😊
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जब भारत मे लोग भाले, तलवार, तीर से लड़ा करते थे..
स्पेन ने मस्केट ईजाद की।
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यह छोटी सी तोप थी। याने लंबी नली, जिसमे सामने से पुड़िया भर बारूद डाला जाता, औऱ फिर एक गोली भरी जाती।
एक लंबी डंडी से खचर खचर उसे ठीक से ठूंसा जाता।
और तब बारूद को बत्ती दिखाते। वो फटता औऱ गोली तेजी से नली से निकलती।
यदि आप गोली बनाने के लिए लेड का इस्तेमाल करें, जो काफी भारी धातु है, तो अपने जड़त्व से वह लक्ष्य के शरीर मे तीर की तरह घुस जाएगी।
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उस नली को खास दिशा में निशाना साधकर बत्ती दिखाते। जब इसी मस्केट के आगे संगीन फिट कर दी जाती, तो यह भाले का काम भी करती।
ऑल इन वन हथियार..
तो मस्केट क्रांतिकारी अविष्कार था। मुट्ठी भर लोग, बहुत कम ट्रेनिंग से मजबूत सेना बन जाते। इसने अनेक युद्धों के नतीजे बदल दिये। बल्कि दुनिया ही बदल दी।
अगले 300 साल, दुनिया मे उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद इसी मस्केट की नली से निकला।
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अब एक कदम आगे जाना था।
मस्केट, धीमी थी। गोली भरने, खचर खचर करने, निशाना लगाने, फायर करने में समय लगता। दो गोलियों में मिनट भर का गैप होता। ये 60 सेकेंड जानलेवा हो सकते हैं।
फिर मस्केट की गोली, लड्डू की तरह गोल होती थी। हवा में डिफ्लेक्ट हो जाती। तो निशाने में एक्यूरेसी न थी। 1853 में ब्रिटिश ने इसमे नई तकनीक खोजी।
1- गोली का शेप बदला। अब वह लम्बी, पॉइंटेड थी।
2- मस्केट की नली के भीतर, में सर्पिल ग्रूव बनाये। जिससे नली में गोली तेजी से घूमती हुई बाहर जाती, तो हवा में घूर्णन करती। इससे डिफ्लेक्ट नही होती, निशाना सटीक रहता।
3 - चेबर में कारतूस पीछे से डालते। इसमे दूसरी गोली 10 सेकेंड से कम में चलाई जाती।
यह तो युद्ध जीतक अविष्कार था।
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पर एक समस्या थी। गोली बैरल में घूमती, तो तीव्र घर्षण होता।
मस्केट में दो गोली के बीच वक्त होता था। यहां तो खटाखट गोली चलती। लगातार घर्षण से बैरल गर्म होकर फट सकता था। इसका इलाज खोजा गया।
गोलियों में ग्रीस रहेगा। यह चिकनाई, घर्षण घटाती। बन्दूक को अधिक हैंडी, फ़ास्ट, सुरक्षित बनाती। यह बन्दूक एनफील्ड कहलाती थी।
और उसकी गोली को, बुलेट कहते।
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एनफील्ड बुलेट के आते ही आसमान टूट पड़ा। दरअसल, ग्रीस वाली बुलेट,एक मोमिया कागज में लपेटी होती। इन्हें दांत से फाड़कर, बन्दूक में भरना होता।
अफवाह फैली की इस ग्रीस मे गाय और सूअर की चर्बी है। अंग्रेज, सब फौजियों को क्रिश्चियन बनाने के लिए, जान बूझकर, उनका धर्म भ्रष्ट करने का कर षड्यंत्र रहे है।
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तो अपने पण्डिजी, जो 8 साल से खुशी खुशी, साथी हिंदुस्तानियों पर मस्केट की गोलियां धड़ाधड़ बरसा रहे थे। व्हाट्सप पढ़कर गुस्सा हो गए।
अगर आप गांजे और भांग को एक साथ चढ़ा लो, तो आदमी ज्यादा हाई हो जाता है। व्हाट्सप का नशा अलग था.. तो उन्होंने अपने कमांडिंग अफसर को गोली मार दी।
फांसी चढ़े।
भारतीय राष्ट्रवाद के प्रथम शहीद बने।
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गाय सूअर की चर्बी की अफवाह उड़ाने वाला एडमिन, एक वहाबी मौलवी था- अहमदुल्ला खां!!
1857 का क्राफ्ट्समैन।
वह जानता था कि भारत इंटलेक्चुअल्स का देश नही। धर्मांध, भीरू, रीढ़हीनो का देश है। इसे राष्ट्रवाद उद्वेलित नही करता, लेकिन धर्म करता है।
तो उसने क्रांति के लिए धर्म से जुड़ी अफवाह को औजार बनाया। क्रांति तो हुई, मगर असफल रही। क्योकि कि धर्म के आधार पर बनी, उन्ही फाल्ट लाइंस का इस्तेमाल अंग्रेज भी कर गए।
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इक्का दुक्का उदाहरण के अलावे, 1857 एक मुस्लिम क्रांति बनकर रह गयी। फाल्ट लाइन गहरी की गई। शिक्षित सरकारी हिन्दू, आनंद मठ लिखने लगें।
जिसमे दुश्मन अंग्रेज नही,
मुसलमान था।
गांधी ने यह देखा था। तो राजनीतिक सँघर्ष में धर्म से निरपेक्ष रहे। रातोरात क्रांति का खतरा भी वह ठीक से समझते थे। तो 30 साल उन्होंने धीमे धीमे बारूद जमा किया।
सत्य अहिंसा बांचते रहे।
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1905 के आंदोलन से हमे 1909 में नगरपालिकाएं मिल चुकी थी।
1919 के आंदोलन से 1921 में हमे असेम्बली मिली। 1930 के आंदोलन से 1937 में राज्यो की सरकारें मिली। और 1942 के आंदोलन से 1947 में केंद्र में अपनी सरकार आई।
गांधी की आजादी, धीरज से,
इंच दर इंच आयी।
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रॉयल एनफील्ड ने रिबोर्न मॉडल निकाला है।
तो जिस तरह उस देहाती लड़के को, सिंहासन बत्तीसी वाले टीले पर बैठकर तमाम ज्ञान मिला था, एनफील्ड की रिबोर्न बुलेट पर बैठकर मेरे भीतर यह ज्ञान फूट पड़ा।
झरना आपकी ओर मोड़ दिया है।
हैव ए नाइस डे।
❤️

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@chitraaum @narendramodi दुनिया में बहुत सी अच्छी चीजें जिनमें लोकतंत्र, लोकतांत्रिक मूल्य, सिविल सोसाइटी के अधिकार, एक्टिविज्म आदि पश्चिमी दुनिया और यूरोप, विशेष तौर पर फ्रांस से आए ।
वहां ऐसे प्रदर्शन आम होते हैं।
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एक थी कांग्रेस -I (आई)
एक है कांग्रेस- AI ( एंटी इंडिया !)
जब पूरी दुनिया भारत की ग्लोबल लीडरशिप इनोवेशन और टेक्नोलॉजी विजन की तारीफ कर रही है, ठीक उसी समय भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी देश की छवि धूमिल करने में लग गई है. @narendramodi का विरोध करते-करते देश विरोधी एजेंडे को अंजाम दिया जा रहा है. यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिस बेशर्मी और जहालत का प्रदर्शन किया है वो राष्ट्रीय शर्म का विषय बन चुका है.
दुनिया भारत की तारीफ़ कर रही है. लेकिन कांग्रेस Opposition का रोल निभाने की बजाय frustration दिखाने लगी?
पहले गलगोटिया यूनिवर्सिटी के कारण बदनामी और अब यूथ कांग्रेस का “अर्धनग्न प्रदर्शन” सवाल ये है कि क्या जानबूझकर AI समिट को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की साज़िश रची गई?
पूरे मामले की जाँच होनी चाहिये कि देश का नमक खाकर देश के ख़िलाफ़ ग़द्दारी करने वाली ताक़तें कौन सी है?
उनका चेहरा बेनक़ाब हो,
पार्टियाँ आएंगी-जाएंगी… लेकिन
भारत की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है, उसको चोट पहुँचाने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो और जाँच हो “नंगेपन के नाच” के पीछे देश को बदनाम करने वाली ताक़तें कौन सी हैं ?
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@AmanChopra_ AI indicates that we should look forward to the future, not the past.
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क्योंकि भगवान बुद्ध सबके हैं। मोदी जी के गांव वडनगर की खुदाई में बुद्ध और स्तूप मिले। बुद्ध करुणा के सागर हैं। वे भारतीय परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। दुनिया भारत का सम्मान करती है कि हमने उन्हें बुद्ध दिया। बुद्ध हमें दुनिया के पचासों देशों के लोगों से जोड़ते हैं। नमो बुद्धाय।
Sanjay Dixit ಸಂಜಯ್ ದೀಕ್ಷಿತ್ संजय दीक्षित@Sanjay_Dixit
Why does @narendramodi keep glorifying Buddha so much? Doesn’t he know that the neo Buddhists have nothing to do with Buddha.
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@Profdilipmandal इस देश को अब अपमान सम्मान। से ऊपर उठकर काम की बात करनी होगी .
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कांग्रेस ने सब्जी बेचने वाली औरतों का मजाक उड़ाया था कि वो डिजिटल पेमेंट कैसे ले पाएगी. जन धन खाता कैसे चलाएगी? उन करोड़ों औरतों ने कांग्रेस को गलत साबित किया. आज एआई को लेकर कहा जा रहा है कि गांव का आदमी उसका प्रयोग कैसे कर पाएगा. गांव का आदमी कांग्रेस को फिर गलत साबित करेगा. जनता नई टेक्नोलॉजी और उसके इस्तेमाल को लेकर ज्यादा सहज है. वह कर लेगी.
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@Baliyan_x ये लोग झींगा लाला देखने नहीं आए हैं।
इन समिट्स में हाई लेवल के डेलीगेट्स आते हैं। हर मिनट कीमती होता है।इसको बेस्ट पॉसिबल वे में यूटिलाइज करना चाहिए जिससे देश और दुनिया का भला हो और तरक्की आए।
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PM मोदी के साथ और पीछे ये जो लाइन लगाकर चल
रहे है ना, ये कोई भाजपा के नेता नहीं है।
दुनिया के बीस देशों से भी अधिक के Head है जो भारत की सांस्कृतिक विरासत और टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट से अभिभूत है।
ईमानदारी से बताना दो साल पहले G20 के अलावा आपने इस लेवल का Global Summit भारत में कब देखा था??
सरकार ने AI पर सिर्फ बात नहीं की, उसे धरातल पर उतारने की रणनीतियाँ भी तैयार की है।
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@pankajjha_ जौनपुर जनपद से शायद सबसे ज्यादा IAS,IPS, PCS ऑफिसर और सरकारी सेवाओं में लोग हैं फिर भी जौनपुर की पर कैपिटा इनकम देख लीजिए।यह मामला भी कुछ उसी तरह का है।दिमाग लगाइए 🤨

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@chitraaum ये खुराफात वहाँ के उच्च पदस्थ लोगों ने की होगी।
इसमें वहाँ के आम छात्रों की क्या गलती है?
मान्यता रद्द करने जैसी सलाह देना मूर्खतापूर्ण है।
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