राजस्थान के ऐसे नेता का नाम बताइए…
जो कम से कम पन्द्रह साल से राजनीति में हो…
भ्रष्टाचार का एक आरोप तक नहीं लगा हो…
चरित्र हीनता का एक आरोप तक ना लगा हो…
जातिवाद का एक आरोप तक ना लगा हो…
और आज तक कभी भड़काऊ बयानबाज़ी ना की हो…
आजादी के मतवाले, अमर क्रांतिकारी अशफ़ाक़ उल्ला ख़ान जी की जयंती पर शत-शत नमन 🙏
उनका बलिदान हमें याद दिलाता है कि देशभक्ति जाति और धर्म से ऊपर होती है।
#AshfaqullaKhan#Jayanti#FreedomFighter
सच्ची शिक्षा वही है जो इंसान को आत्मनिर्भर बनाए।
सोनम वांगचुक जी ने लद्दाख की कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा, पर्यावरण और नवाचार का ऐसा उदाहरण पेश किया है जो पूरे भारत के लिए प्रेरणा है।
लेकिन जो इंसान पेड़ों, ग्लेशियरों और बच्चों के भविष्य के लिए लड़ा,
वही आज न्याय की लड़ाई लड़ रहा है।
सोनम वांगचुक जी की रिहाई सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि धरती और इंसानियत की जीत होगी। #SonamWangchuk#ReleaseSonamWangchuk#SaveLadakh#JusticeForSonamWangchuk
"अंधेरी बस्ती में एक कैमरा गया, और कहानी लौट आई।"
प्रिय अभिनव पांडे, @Abhinav_Pan
रात ने जब धीरे से 12 बजने की खबर दी तो लोगों ने पटाखों से आसमान भर दिया। व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ‘हैप्पी दिवाली’ की चकाचौंध बिछ गई। रोशनी के बीच कहीं किसी कोने में अंधेरा भी था, और उसी अंधेरे में एक स्क्रीन पर मैंने दो चीज़ें देखीं, एक आपकी टीम का वह जुनून जो पत्रकारिता को फिर से जीवित कर रहा था, जिसमें आपके तुम के लोग किसी गांव के सड़क पर गाड़ी में रात बिता रहे थे, दूसरी मुसहर समुदाय पर वो 54 मिनट की डॉक्यूमेंट्री, जिसने इस जगमगाते त्यौहार की रात में मेरे भीतर कुछ तोड़ दिया।
मुझे नहीं पता आप इस वक्त बिहार की किन गलियों में हैं। हो सकता है आप घर में हो, अपने लोगों के बीच, किसी छत में आप लाइट लगा रहे हो। लेकिन मेरी कल्पना में आप बिहार में ही हैं, उस धरती पर जहाँ इस दिवाली भी कोई बच्चा पटाखे नहीं, चूहे पकड़ने खेत गया होगा।
दोस्त… (हां, मुझे ‘दोस्त’ कहने की आदत है। नेहरू और भगत सिंह को भी ऐसे ही खत में ‘दोस्त’ लिखता हूं। ‘दोस्त’ बोलने से डर टूट जाता है, शब्द खुल जाते हैं, मन बोलने लगता है।)
दोस्त/ भैया, मैं आपको कुंभ मेले के पहले से पहचानता हूं। लेकिन कुंभ मेले के दौरान आपको थोड़ा जान पाया, वो कवरिंग याद है, जिस सच्चाई से आपने भीड़ और आस्था के बीच पत्रकारिता की एक साफ़ लकीर खींची थी। तब लगा था कि कोई है जो शोर और डर के बीच भी फुसफुसाकर सच्चाई कह सकता है।
फिर आपके ट्वीट्स आए, छोटी-छोटी बातों में बड़े-बड़े सिस्टमों को आईना दिखाते। लेकिन सच कहूं, कल जो देखा… वो कभी "द वायर" और "बीबीसी" में देखता था। आप कैमरा और माइक लेकर उस अंधेरे में उतरे थे जहां मुसहर रहते हैं, वो लोग जिन्हें देश ने अपनी जाति व्यवस्था की तंग गलियों में धकेलकर भुला दिया। वो बच्चा जो अपने हाथों से मिट्टी खुरचता है, वो बूढ़ी औरत जो कहती है, “हम तो अछूत हैं।"
पत्रकारिता के इतिहास में कुछ लोग सिर्फ खबरें नहीं दिखाते, दिशा दिखाते हैं। सौरभ द्विवेदी ने जब ‘लल्लनटॉप’ की लकीर खींची थी तो लगा था बस, यही है वो रास्ता जो भीड़ से अलग है। लेकिन फिर आप आए। आप उस लकीर को लेकर आगे निकले, जैसे गांधी का कोई उतराधिकारी नेहरू निकला। ओर यहां मैं कोई उपमा नहीं दे रहा, न सौरभ को गांधी कह रहा, न आपको नेहरू। मैं बस उत्तराधिकारी की बात कर रहा हूं – भीड़ से कुछ अलग करने के उत्तराधिकारी की।
आप चाहते तो, बाकी चैनल्स की तरह चुनाव कवर कर सकते थे। चमकते स्टूडियो में बैठ सकते थे। लेकिन आपने उस बस्ती को चुना जहाँ कोई पत्रकार कैमरा लेकर नहीं जाता। आपने पटाखों से भरे आसमान में उन आंखों की नमी खोजी जिनकी दिवाली सदियों से अंधेरी है। आपने वही किया जो पत्रकारिता का असली काम है, भीड़ से अलग खड़ा होना।
जब मैं आप जैसे पत्रकारों को देखता हूं तो यकीन होता है, इस मुल्क को सिर्फ नेता नहीं, कुछ सच्चे कहानीकार भी बदल सकते हैं। मुसहरों की वह डॉक्यूमेंट्री महज़ एक रिपोर्ट नहीं थी, वो इस समाज के सीने पर लिखा गया एक ‘मौन चीख’ था। और आपने उसे आवाज़ दी।
दोस्त,
काश इस मुल्क में हर न्यूज़ रूम से कोई नया लड़का निकल कर अभिनव पांडे हो जाता। काश पत्रकारिता फिर से वैसी हो जाती जैसी किताबों में पढ़ी थी, स्याही में लिपटी हुई, सत्ता के सामने खड़ी हुई। काश वो बच्चा जो चूहे पकड़ता है, किसी दिन कलम पकड़ सके… और उसकी कहानी पटाखों की आवाज़ में दब न जाए।
बस इतना ही दोस्त, भावुक हो गया हूं। हैप्पी दिवाली।
ख़त लिखने वाला लड़का।
चाय इश्क़ और राजनीति।
कल रात जेएनयू में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस की बर्बरता पूर्ण मारपीट की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। छात्रों के साथ इस तरह का रवैया बेहद निंदनीय है। दर्जनों छात्रों को गंभीर चोट आई है। SPS काउंसलर अभिषेक कुमार गंभीर रूप से घायल हुए है। छात्र सूरज के हाथ में फ्रैक्चर आया है।
दिल्ली पुलिस से मांग करते है कि उस समय ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए और जेएनयू परिसर में लगातार गुंडागर्दी कर रहे एबीवीपी के सामंती गुंडों पर तुरंत FIR दर्ज करें।
#jnusfi#SFIDELHI@SfiDelhi@SFI_CEC@aishe_ghosh@AmraRamMPSikar@Ajaypal1947
ये होती है साधगी, सरलता, साधा जीवन
सीकर सांसद कॉमरेड अमराराम जी और पूर्व विधायक कॉमरेड पेमाराम जी ने सीकर डिपो से जयपुर तक का सफर रोडवेज बस से किया।♥️✊
@AmraRamMPSikar
#अमराराम #Amraram#CPIM