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एक बेनाम सी चाहत के लिए आई थी !
आप लोगों से मुहब्बत के लिए आई थी !
मैं बड़े-बूढ़ों की ख़िदमत के लिए आई थी !
कौन कहता है कि मैं हुक़ूमत के लिए आई थी !
शजर-ए-रंग-ओ-बू को नहीं देखा जाता !
शक की नज़रों से बहू को नहीं देखा जाता !
सोनिया गांधी ।।
@RahulGandhi

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