
यह बिल्कुल अजीब और विरोधाभासी लगता है कि कांग्रेस, जो कभी हिंदू विरोधी रही है, आज भारत में बदलते हुए माहौल में भाजपा की नकल कर रही है—केवल वोट बैंक के लिए।
जिस पार्टी ने दशकों तक हिंदू भावनाओं को नजरअंदाज किया, मंदिर-मस्जिद विवाद में एक तरफा रुख अपनाया, हिंदू संगठनों को संदिग्ध नजर से देखा और "धर्मनिरपेक्षता" के नाम पर हिंदू पहचान को कमजोर करने की कोशिश की, वही आज राम मंदिर की पूजा, हिंदू त्योहारों का जश्न, सनातन संस्कृति की बातें और राष्ट्रवाद की भाषा बोलने लगी है।
ये कोई सच्चा परिवर्तन नहीं है, बल्कि एक सस्ता नाटक है। जब जनता का मूड बदला और हिंदू जागरण हुआ, तो कांग्रेस को लगा कि पुरानी राह पर चलते रहने से वोट बैंक सूख जाएगा। इसलिए अब वो भाजपा की नकल उतार रही है—राम भक्ति दिखा रही है, हिंदू कार्ड खेल रही है, लेकिन अंदर से वही पुरानी सोच है।
ये सिर्फ वोटों की भूख है, सिद्धांतों का नहीं। आज जो हिंदू विरोधी था, कल वो हिंदू भक्त बनने का ढोंग कर रहा है। असल में कांग्रेस ने हिंदू विरोध को अपना राजनीतिक पूंजी बनाया था, अब जब वो पूंजी घाटे में पड़ गई तो वो नकली हिंदुत्व का चोला ओढ़ रही है।
हिन्दी



























