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ज़्यादातर भारतवासियों में 6 बड़ी कमियाँ देखने को मिलती हैं
1.Confidence की कमी
इसका मुख्य कारण है पिछली पीढ़ियों में dignity of job की कमी। जब रोज़गार और कामकाज को सम्मान नहीं मिला, तो उसका असर आज की millennial generation पर पड़ा है। आत्मविश्वास तभी आता है जब इंसान को लगे कि उसका काम मूल्यवान और गरिमा से भरा है।
2. Risk लेने की क्षमता की कमी
भारत में बहुत ही कम लोग दूर का सोचकर व्यवसाय शुरू करते हैं। इसी का नतीजा है कि हमें chai-nukkad जैसे छोटे-छोटे कारोबार ज़्यादा दिखाई देते हैं। अगर भारत को मज़बूत बनना है, तो manufacturing सेक्टर में पूरी ताक़त लगानी होगी और हर प्रोडक्ट में हमें net exporter बनने का लक्ष्य रखना होगा। Manufacturing is the gold mine , start mining now.
3. Exercise की कमी
शारीरिक और मानसिक क्षमता पर इसका सीधा असर पड़ता है। व्यायाम केवल स्वास्थ्य के लिए नहीं बल्कि आत्मविश्वास के लिए भी आवश्यक है। जब कोई जिम में मेहनत करता है या दौड़ लगाता है और वह उपलब्धि हासिल करता है, तो दिमाग़ खुद को ये भरोसा दिलाता है कि आप ज़िंदगी के बाकी कामों में भी खुद को push कर सकते हो। you are a winner , just take the first step .
4. Unprofessional होना
भारत के लोग ज़रूरत से ज़्यादा compassionate और empathetic and naive हैं। इतना कि किसी अधिकारी, मंत्री या बॉस से बात करते समय अपने आप ही झुक जाते हैं। इसका नतीजा है कि high chair और common people ya employee के बीच दूरी बहुत बढ़ जाती है। जबकि काम या ज़िम्मेदारी निभाना एक service है, जिसे dignity और accountability के साथ पूरा करना चाहिए, न कि चापलूसी या झुकाव से।
5. जातिवाद
इसका अंत ज़रूरी है। कोई भी देश तभी ताक़तवर बनता है जब उसके लोग कठोर और दूरगामी निर्णय ले पाते हैं। आज की दुनिया capitalism की है, samajwaad की नौटंकी छोड़कर हमें social capitalism की ओर बढ़ना चाहिए। जैसे धर्म संसद ने सती प्रथा को ख़त्म किया था, वैसे ही आज सभी धर्मगुरुओं और शंकराचार्यों को जाति प्रथा समाप्त करने का साहसिक निर्णय लेना चाहिए।
6. इस्लामिक तुष्टिकरण
भारत की डेमोग्राफी बदलने की कोशिश लंबे समय से हो रही है। यहाँ के संसाधनों का बहुत बड़ा हिस्सा 70 सालों तक उन पर खर्च किया गया, जिन्हें हम पहले ही पाकिस्तान के रूप में अलग कर चुके थे। 'इस्लामिक तुष्टिकरण 'भारत के पैरों में बेड़ियाँ हैं। आज का हिन्दू अपने हिंदुस्तान को आगे बढ़ता हुआ देखना चाहता है, न कि आने वाले 500 वर्षों में डेमोग्राफिक बदलाव के कारण इसे इस्लामिक देश बनते हुए। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि ऐसा भविष्य कभी न आए।
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