अज्ञेय
8.5K posts

अज्ञेय
@agyey01
लगाव ही पीड़ा हैं.. 😌🙂 Down to Earth

Priyansh arya's girlfriend. 👀❤️

एक चीज जो महसूस की। शादी के बाद भी ज्यादातर औरतें अपनी सुंदरता फिगर को लेकर सचेत रहती हैं। कोशिश करती हैं कि अच्छी दिखें लगें और लगती भी हैं। ये स्वाभाविक है, औरतों की प्रकृति में है। कुछ बुरा भी नहीं। वहीं फैशन इंडस्ट्री ग्लैमर इंडस्ट्री के पुरुषों को छोड़ दें तो 95 प्रतिशत पुरुष अपने अपीरियंस को 30 साल की उम्र के बाद बहुत भाव नहीं देते। वो बस अच्छे कपड़े पहन के साफ सुथरे दिखते हैं सार्वजनिक जगहों पर और जिम फिटनेस वगैरह शौकिया। क्योंकि अगर अच्छा कमा रहे हैं तो टाइम नहीं मिलेगा और काम के बाद जो टाइम बचेगा वो आदमी अपने परिवार के या दोस्तों के साथ गुजारना चाहता है। अचानक आप किसी के घर भी पहुंचे तो महिलाएं सुव्यवस्थित दिखेंगी वहीं आदमी कभी अंडरवियर में, लुंगी में या बहुत पॉश होगा तो शॉर्ट्स में मिलेगा। बेतरतीब चीजें फैलाते हुए। ये बहुत बेसिक चीज है जो भारतीय समाज में नॉर्मल है। सबने अपने घर में ही देखा होगा। हाय अंजू दीदी हेलो अंकल वाला एक हेयर डाई का विज्ञापन भी आपको याद होगा। पर पिछले कुछ सालों से भारतीय महिलाओं में ये चाह अचानक बहुत बढ़ी कि उनके पति या ब्वॉयफ्रेंड भी फिल्मी हीरोज की तरह हैंडसम और फिट बॉडी वाले दिखें। प्रैक्टिकल तौर पर ये संभव नहीं। कैमरे के आगे फोटोजेनिक दिखने वाले मर्द भी अक्सर आकर्षक नहीं होते और मैने पहले ही कहा कि अच्छा कमाने वाले लोगों के पास जिम जाने का वक्त नहीं रहता (मिडिल क्लास और अपर मिडिल क्लास विशेष तौर पर) इस वजह से जाने कितने रिश्ते बन नहीं पाते और जाने कितने टिक नहीं पाते क्योंकि लड़कियों औरतों को अब सिर्फ पैसे नहीं सुंदर और बॉडी बिल्डर टाइप लड़के ही चाहिए जो इंस्टाग्राम यूट्यूब पर बहुतायत से मौजूद हैं पर वास्तविक समाज में नहीं। मेरा ये लिखना आपको पागलपन महसूस हो रहा होगा पर मैंने जिम इंस्ट्रक्टर, सोशल मीडिया इन्फुएंल्सर वगैरह छपरी टाइप लड़कों के चक्कर में पड़ कर अच्छी खासी शादीशुदा जिंदगी बर्बाद करते औरतों को देखा है। पहले सिनेमा लक्जरी था और टीवी भी चौबीस घंटे नहीं चलता था पर अब स्मार्टफोन पर 24 घंटे रील देख सकते हैं और नेट सस्ता है। भारतीय समाज का नैतिक पतन होता ही जा रहा है और इसमें आदमियों से ज्यादा औरतों की गलती है। नहीं मानते तो आसपास देखना।




सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं को ये समाज, यह रिश्तेदार इस तरीके से देखते हैं मानो यह कोई बड़ा गुनाह कर रहे हो यदि कोई विद्यार्थी चार-पांच साल से तैयारी कर रहा है और यदि वह असफल हो रहा है सबसे पहले परिवार के लोग और रिश्तेदार उसको इतने ताने देते हैं उस पर ऐसे टूट के पड़ते हैं उसको भी लगता है कि शायद में कुछ गलत कर रहा हूं एक बेरोजगार युवा जो मेहनत कर रहा है उसकी तुम मेहनत को ना समझ कर उसको ताने मार रहे हो उसके साथ खड़ा होने की बजाय उसे छोड़ने को मजबूर कर रहे हो जो भी विद्यार्थी असफल हो रहा है उनसे यही कहूंगा कि आप मेहनत करते रहे खुद पर विश्वास रखें यही लोग जिस दिन तुम्हारा सिलेक्शन होगा पूरे गांव में और रिश्तेदारों में हल्ला करेंगे


// कुमार अम्बुज : जन्मदिन //







