Ruby Arun रूबी अरुण

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@arunruby08

Geopolitical Investigative https://t.co/NPWsKpdoVn World.Voice Of America.EuroNews.Channel7.Zee News.NewsNation Hindustan.Indian constitutionalist 🇮🇳 ॐ

Global Katılım Ağustos 2009
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Ruby Arun रूबी अरुण
दोनों हाथों से कोको पावडर और चीनी मिलाओ फिर उसे मशीन में डाल कर गोल गोल घुमाओ. इस तरह से मेलोडी , चॉकलेटी बन जाएगी.... भाई कैबिनेट की स्पेशल मीटिंग है. पर #Mute क्यों है? #Mic किसने ऑफ कर दिया है? जनता भी तो सुने कि इस #संकटकाल में प्रधानमंत्री क्या विमर्श कर रहे हैं.समाधान और राहत के किन उपायों पर चर्चा कर रहे हैं. अब ये इनकी भाव भंगिमा से हम क्या ही समझें 😔
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वफ़ा ना रास आई, तुझे ओ हरजाई #टॉफी मेरी, तूने खाई फूल किसी और से ले आई पप्पी झप्पी भी कर आई ओ हरजाई... खी 😭खी 😭 खी 😭
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मोदी जी का तो पता नहीं पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल 🥭 🥭 🥭 काट कर नहीं, चूस कर खाते हैं... 😂 #AkahayKumar
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subhash Kumar sharma,
subhash Kumar sharma,@sharmass27·
वे इस देश के मतदाता और नागरिक हैं. उन्हें अपने अधिकारों की मांग कानूनी दायरे में रहकर, तथ्यों और आंकड़ों के साथ,संगठित होकर, बुलंद आवाज में जमीन पर करनी होगी. शारीरिक और मानसिक निवेश करना होगा, तब जाकर स्थितियां बदलेंगी. @arunruby08 का सटीक आकलन
subhash Kumar sharma, tweet media
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subhash Kumar sharma,
subhash Kumar sharma,@sharmass27·
"विदेशी सर्वर पर किसी ऐप का ग्राफ ऊपर बढ़ाने से भारत की जमीन पर फैक्ट्रियां नहीं खुलतीं" युवाओं को यह कड़वा सच समझना होगा कि वे इस डिजिटल चक्रव्यूह में व्यवस्था के खिलाफ नहीं लड़ रहे, बल्कि वे किसी और के #कॉकरोच बिजनेस और #Cockroach पॉलिटिकल मॉडल का 'फ्री कंटेंट' बन रहे हैं.
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सिस्टम में बदलाव लाना है तो जमीन पर उतरो. सोशल मीडिया पर किसी पेज या हैंडल पर 😡 का बटन दबाने भर से हालात नहीं बदलेंगे... NEET पेपर लीक मामले में राजस्थान के जयपुर में NSUI का जबरदस्त विरोध प्रदर्शन ...
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"Boosting the traffic graph of an app on a foreign server does not build factories on Indian soil." The youth must grasp this bitter truth: they are not fighting the system within this digital labyrinth; instead, they are merely becoming 'free content' for someone else's #Cockroach business and political model. Unemployment, students dying by suicide due to paper leaks, and indefinitely stalled recruitment drives—these are deeply serious and sensitive grassroots issues. When these critical struggles are wrapped in a comical, satirical tone like the "Cockroach Party," their gravity is completely diluted. The administration dismisses it as a temporary online joke and relegates the actual problem to the back burner. Today's youth must understand that prolonged unemployment is not just caused by a scarcity of jobs, but also by the systemic erosion of their consciousness. When young people exhaust their energy converting their frustration into 'free content' inside a screen, they leave themselves stripped of the capability to fight the actual establishment. Harbored under the illusion that flicking fingers on a screen will change the system is exactly like winning a war in a video game and crowning oneself the Alexander of the real world. In this digital tsunami, the greatest loss is being suffered by the very unemployed youth in whose name this entire 'shop' has been set up. Under the guise of this movement, over 1.6 lakh youth have already registered on the Cockroach website, handing over sensitive personal data including their names, emails, phone numbers, and cities. Where is this data sitting? With a private PR strategist sitting in America. In the future, this data can easily be exploited by any political party for targeted messaging, micro-targeting, or commercial advertisements. For a PR student sitting in the US, what could be a bigger live project than this? A young user falsely believes that by arguing in comment sections or hitting the 'angry emoji' (\text{😡}), they are waging a war against the system. In reality, they are doing nothing more than driving up the engagement metrics and traffic graphs of an app running on a foreign server. The profits line the pockets of admins sitting abroad, while the waste of precious time, energy, and future belongs entirely to India's unemployed youth. The youth must realize that they are not just 'data points' or a digital crowd for an app. They are the voters and citizens of this country. They must demand their rights within the legal and constitutional framework, armed with hard facts and data, by organizing cohesively and raising their voices loud and clear on the ground. Only when they commit their physical and mental investment to the real world will the ground reality begin to shift. #CockroachJantaParty
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"विदेशी सर्वर पर किसी ऐप का ग्राफ ऊपर बढ़ाने से भारत की जमीन पर फैक्ट्रियां नहीं खुलतीं" युवाओं को यह कड़वा सच समझना होगा कि वे इस डिजिटल चक्रव्यूह में व्यवस्था के खिलाफ नहीं लड़ रहे, बल्कि वे किसी और के #कॉकरोच बिजनेस और #Cockroach पॉलिटिकल मॉडल का 'फ्री कंटेंट' बन रहे हैं. बेरोजगारी, पेपर लीक के कारण आत्महत्या करते छात्र और लटकी हुई भर्तियां—ये बेहद गंभीर और संवेदनशील जमीनी मुद्दे हैं. जब इन मुद्दों को "कॉकरोच पार्टी" जैसे कॉमिक और मजाकिया लहजे में लपेट दिया जाता है, तो इन मुद्दों की गंभीरता खत्म हो जाती है.व्यवस्था इसे युवाओं का एक 'अस्थायी ऑनलाइन मजाक' मानकर ठंडे बस्ते में डाल देती है. इस डिजिटल सुनामी में सबसे ज्यादा नुकसान उसी बेरोजगार युवा का हो रहा है जिसके नाम पर यह पूरी 'दुकान' खड़ी की गई है: @ranvijaylive इस आंदोलन के नाम पर अब तक 1.6 लाख से ज्यादा युवाओं ने वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करा लिया है, जहां उनका नाम, ईमेल, फोन नंबर और शहर का डेटा लिया गया है. यह डेटा किसके पास है? अमेरिका में बैठे एक प्राइवेट पीआर स्ट्रेटेजिस्ट के पास.भविष्य में इस डेटा का इस्तेमाल किसी भी राजनीतिक दल द्वारा 'टारगेटेड मैसेजिंग' या विज्ञापनों के लिए किया जा सकता है. अमेरिका में बैठे एक पीआर छात्र के लिए इससे बड़ा लाइव प्रोजेक्ट और क्या होगा? युवा सोचता है कि वह सोशल मीडिया पर कमेंट्स में बहस करके या 'एंग्री इमोजी' {😡}) दबाकर व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहा है. जबकि हकीकत में वह सिर्फ किसी विदेशी सर्वर पर चल रहे ऐप के ट्रैफिक ग्राफ को ऊपर बढ़ा रहा होता है.मुनाफा विदेश में बैठे एडमिन्स का होता है और समय और भविष्य की बर्बादी भारत के बेरोजगार युवा की होती है.
Ranvijay Singh@ranvijaylive

इसे कहते हैं- नाखून कटाकर शहीद होना भाई अमेरिका में बैठकर इंस्ट्राग्राम पर 'रिस्क' ले रहा है. गजब ही है. यहां भारत में लोग सरकार की खराब नीतियों के खिलाफ बोल रहे, FIR झेल रहे, जेल जा रहे, लेकिन कभी इसका प्रचार नहीं किया. आत्ममुग्धता एक वायरस है, तेजी से दिमाग में घर करता है.

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Ruby Arun रूबी अरुण
भारत लौटते ही साहब की हंसी गायब हो जाती है. विदेशों में तो इनकी खिखीखिखिलखिलाहट रूकती ही नहीं...
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Ruby Arun रूबी अरुण
राहुल गांधी कह रहे हैं कि "मोदी जी, आपका Melody Reel हर भारतीय का - और उसके दर्द का - अपमान है" राहुल गांधी ने शायद वो देसी कहावत नहीं सुनी है जो भारतीय घरों में उन नालायक बच्चों या निठल्ले वयस्कों को कही जाती है जो कुछ करते धरते नहीं. बस हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं. दिखावा और नवाबी करते हैं...उनसे नाराज़ होकर माता पिता या परिजन ताना देते हैं कि– तुमसे कुछ होना जाना तो है नहीं, जाओ जाओ, जाकर टॉफी चूसो...😉
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Manjeetkaur
Manjeetkaur@manjeetkaur_·
@arunruby08 Bilkul sahi kaha aap ne ...unka farz tha usi waqt jaane ka jab beti ne awaaz lagayi thi
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भोपाल की ट्विशा शर्मा की हत्या/आत्महत्या के बारे में उनके माता पिता, भाई बहनों के जो भी आरोप, ससुराल वालों पर हैं– उनको सही मान लेते हैं. मुझे वैसे भी सास गिरिबाला के हाव भाव, शब्द, लहज़ा क्रूर और बहुत निम्नस्तरीय लग रहा है. पर एक बात का जवाब ट्विशा के मायके वाले दे दें की जब उनकी बेटी खुद के साथ हो रहे अत्याचार और नाइंसाफी के बारे में रो रो कर तड़प तड़प कर उन्हें बता रही थी. गिड़गिड़ाकर फरियाद कर रही थी कि मां अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता. मुझे आकर ले जाओ. सीधी ट्रेन आती है भोपाल. मां तुम उसमें बैठकर आ जाओ. तो ट्वीशा के घरवाले उसे क्यों नहीं तुरंत ले गए. क्यों जल्लादों के हाथों अपनी बेटी को मारने छोड़ दिया. क्यों ट्विशा की मां ने ये कहा कि अम्मा (सास) से बात करो. जब 5 दिन पहले उनकी बेटी ने खुद के हार जाने की बात कर दी थी तो मायके वाले किस बात के इंतजार में थे. अगर अपनी बिटिया के दर्द को उन्होंने समझा होता, साथ दिया होता. भरोसा दिया होता कि बेटी तुम अकेली नहीं हो. हम हैं. तो क्या ट्विशा आज जिंदा नहीं होती?
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टोटका है ये टोटका... 😉 समंदर किनारे कूड़ा बिनना याद है ना..😂 ज्योतिष और लाल किताब के अनुसार जब कोई पुरुष किसी महिला मित्र को गहरे रंग की मीठी चीज़ जैसे डार्क चॉकलेट ,टॉफी या गुलाबजामुन वगैरह देता है, तो यह उसके शनि और राहु के दोषों को शांत करने का एक माध्यम बनता है. लाल किताब के अनुसार, पुरुषों के लिए यह एक टोटके की तरह होता है. जब वे अपने हाथ से महिलाओं को इन रंगों की मीठी वस्तुएं देते हैं तो जीवन में अचानक आने वाली बाधाएं, मानसिक भ्रम या 'राहु जनित' तनाव कम होने में मदद होती है😉😉
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"आग लगे बस्ती में, हम तो अपनी मस्ती में" का परफेक्ट एग्जांपल.... साहब, मेलोडी की क्रीमी मिठास में उलझे हैं, पारले जी का शेयर ऊपर उठ गया है... उधर मुंबई के बांद्रा ईस्ट रेलवे स्टेशन के पास 'गरीब नगर' पर चले बुलडोजर से 500 परिवार बर्बाद होकर सड़क पर आ गए हैं. हालांकि यह बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाए जाने के आदेश के बाद हुआ है. पर मुश्किल ये है की झुग्गी वालों को बिना कोई नोटिस दिए ही ये कार्रवाई अचानक कर दी गई है. जबकि हाईकोर्ट ने 2021 के सर्वे में चिन्हित पात्र परिवारों को पुनर्वास घर भी मुहैया कराए जाने के भी आदेश दिए थे. यह बस्ती करीब 40 साल पुरानी थी.
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Ruby Arun रूबी अरुण
क्या हुआ जो हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री, जो विश्व के सबसे लोकप्रिय और शक्तिशाल नेता हैं, ने देश हो या विदेश, 0 0 प्रेस कांफ्रेंस किया है.. लेकिन नरेंद्र मोदी को अब तक यानी मई 2026 तक, 31 अंतर्राष्ट्रीय और विदेशी नागरिक सम्मान मिल चुके हैं. इनमें से 24 से अधिक देशों ने उन्हें अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया है. तो क्या हुआ कि जिम्मेदारी जवाबदेही शून्य है, डंका तो मोदी जी का ही बज रहा है ना मितरों...मोदी मोदी मोदी.... अब नजर डालिए 1947 से 2026 तक भारत के विभिन्न प्रधानमंत्रियों द्वारा देश और विदेश में किए गए प्रेस कॉन्फ्रेंसेज की संख्या पर :— पंडित जवाहरलाल नेहरू (विदेश: 35+, भारत: 100+) श्री लाल बहादुर शास्त्री (विदेश: 5+, भारत: 30+) श्रीमती इन्दिरा गांधी (विदेश: 20+, भारत: 30+) श्री मोरारजी देसाई (विदेश: 5+, भारत: 10+) श्री राजीव गांधी (विदेश: 10+, भारत: 30+) श्री वी.पी. सिंह (विदेश: 3+, भारत: 7+) श्री पी.वी. नरसिम्हा राव (विदेश: 5+, भारत: 5+) श्री अटल बिहारी वाजपेयी (विदेश: 10+, भारत: 25+) श्री मनमोहन सिंह (विदेश: 72, भारत: 45) क्योंकि ये भारत की जनता के प्रति जिम्मेदार , देश के प्रति जवाबदेह, राष्ट्र की तरक्की के लिए समर्पित, हिंदुस्तान को विश्व पटल पर मान सम्मान दिलाने वाले विद्वान, दूरदर्शी, तार्किक , उदार, संवैधानिक, स्वाभिमानी और लोकतांत्रिक लोग थे.
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