Arvind kumar Tiwary@arvindt490·26 Hazजगन्नाथ! सुभद्राया: सुबन्धो! राधिकापते! बलभद्रप्रियानन्त! रक्ष मां शरणागतम्।।Çevir NE00579
Arvind kumar Tiwary@arvindt490·25 Hazविरहाज्जायते प्रेम विरहादेव वर्धते। सङ्गमाधिक्यतो बाले! क्षीयते च विलीयते।। ***अरविन्द:२५/०६/२५Çevir हिन्दी0231441
Arvind kumar Tiwary@arvindt490·29 Ekiसदा कवीन्द्रमानिनां सतां महर्षिसेविते सुरम्यभारतस्य नव्यमेरठेऽस्ति हार्दिकम्। कवित्वपूर्णचेतसां मुहुर्हृदाभिनन्दनं सुयोजकैर्निमन्त्रणं प्रदीयते सुखास्पदम्।। ***अरविन्द:Çevir हिन्दी007137
Arvind kumar Tiwary@arvindt490·8 Mayभार्यायै स्वस्ति! भार्या यस्य मनोरमा सुगृहिणी कार्यान्तराद् बन्धव:! दूरे सम्प्रति वर्तते सतनया तस्यारविन्दस्य मे। दु:खं ग्रीष्मदिनेषु सौख्यभरितं पाकालये वर्द्धते दूयन्ते न कथं विनेह गृहिणीं मध्याह्नकाले जना:।। ***अरविन्द तिवारी ०८/०५/२४ अमरवाणी विजयताम्।Çevir हिन्दी006149