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A K Shukla
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@_Sukoon कुछ एहसास लफ्ज़ों में बयां नहीं होते,
जो दिल को छू लें वो कभी यहाँ-वहाँ नहीं होते,
आँखों की नमी में छुपा है चाहत का वो समंदर,
जिसके किनारे कभी भी तन्हा और सुनसान नहीं होते।
हिन्दी

@_Sukoon तमाम उम्र के ग़मों को भुला देता हूँ मैं,
जब तू मुस्कुराती है अपनी मस्त अदाओं में।
दर्द भी मेरे मुस्कुराने लगते हैं,
तेरी उस अमलतासी चमकती छांव में!
हिन्दी

@_Sukoon आँखों में अंतहीन प्रतीक्षा के बजाय,
हर पल चमकती हैं अब खुशियों की नई आस,
होंठों पर महबूब का नाम तो अब भी है...
दर्द से विह्वल धड़कता हुआ दिल अब मुस्कुराया,
खुशियों के सागर में डूबने लगी है रूह,
आलिंगन को तड़पती हुई बाँहें भर गईं,
मिल गया है हमें हमारी चाहतों का सुकून..!!
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@_Sukoon मुस्कुराने की वजह तुम हो तो बात ही अलग है,
वरना इन आंसुओं के समंदर में तो हर कोई अकेला है..
तुम्हारी एक झलक पाकर गम सारे भूल जाते हैं,
तुम्हारी हँसी ही तो है जो हमें हर दर्द में जीना सिखाती है...
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@_Sukoon तू रूह में शामिल है तो धड़कनें मेरी हैं,
तेरे बिना ये ज़िंदगी जैसे वीरानी रातें हैं..
थाम ले जो तू हाथ मेरा एक पल को,
तो मौत भी कहे मुझसे कि अभी कुछ पल और बाकी हैं..
जीते हैं हम सिर्फ तेरे होने के एहसास से,
वरना इस दुनिया में हमारी कोई और हसरत नहीं..
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@_Sukoon एक तरफा मोहब्बत का भी अजीब दस्तूर है,
हम उनके करीब हैं और वो हमसे बहुत दूर हैं..
न वो कभी इज़हार-ए-मुहब्बत करते हैं,
और न ही हम अपनी चाहत का इकरार कर पाते हैं...
ख़ामोश मोहब्बत के भी अलग ही अंदाज़ होते हैं,
यहाँ जज़्बात दिल में ही दफ़न और आबाद होते हैं..!!
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@_Sukoon वो मोहब्बत ही क्या जो हमारे वादों की मोहताज़ निकले,
अगर यक़ीन हमसे ज़्यादा खुद पर था,
तो आंसुओं के ये साज़ क्यूँ निकले..!!
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@_Sukoon रास्ते कहाँ ख़त्म होते हैं ज़िंदगी के सफ़र में,
मंज़िल तो वहाँ है जहाँ ख़्वाहिशें थम जाएँ..!!
भीड़ से अलग होकर चलना ही मेरी पहचान है,
अब किसी के हाथ छोड़ने का डर नहीं, खुद पर गुमान है..!!
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@_Sukoon चुप रहकर उदासी को और हवा मत दो
इस बेज़ुबान दर्द को अपनी रज़ा मत दो
हँसकर गुज़ारो दो पल की ही ज़िंदगी
यूं ख़ामोशी के साए को वफ़ा मत दो..
माना कि लंबा है ख़ामोशी का यह रास्ता
पर अब इससे तोड़ना होगा हमें वास्ता
लफ़्ज़ों को जगाओ, ज़रा खुलकर मुस्कुराओ
उदासी के इस साए को गले से हटाओ..
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@_Sukoon कोई गम में भी मुस्कुराने का हुनर पा लेता है,
कोई महफिल में भी तन्हाइयों का शोर सुन लेता है,
खेल सारा नजरिए का है मेरी जान,
वरना रोने वाला हँसी में भी आंसुओं का सैलाब बहा लेता है...!!
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@_Sukoon तुम्हारी यादों की आदत सी हो गई है हमें,
अब तो दूर जाने पर भी तेरा ही ख्याल आता है..!!
शिकायतें तो बहुत हैं तुझसे ए-हमदम,
पर एक तेरी मुस्कान देख सब गुस्सा पिघल जाता है..!!
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@_Sukoon गुज़र गया जो ज़माना उसे भुला न सके,
तमाम उम्र भी हम लौट कर वहाँ न सके…
हज़ार बार पुकारा जो बीते दिनों को मगर,
बिछड़ के हमसे वो लम्हे कभी वापस न आ सके...
दिल अनजाने में ही करता रहा खताएँ बहुत,
अब ढूँढता है उन खताओं की सजाएँ बहुत..!!
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