OBC_Ekta

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@ashokchamp10

शौर्यम..दक्षम..युध्धेय.! बलिदान परम धर्म! ⚔️⚔️⚔️

Katılım Ocak 2022
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कमलेंद्र Kamlendra
महाधिवक्ता @drmohanoffice51 सरकार को गुमराह कर रहा है और सरकार “कोर्ट-कोर्ट” का खेल खेल रही है। मध्यप्रदेश में #OBCReservation बचाने के लिए बंदर की तरह कूदने से कुछ नहीं होगा। यह सिर्फ दिखावा है। अगर मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 और @narendramodi, @AmitShah, @BJP4MP और @BJP4India की नीयत साफ है, तो EWS की तरह संविधान संशोधन करके OBC आरक्षण को कानूनी सुरक्षा दें। सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, ठोस संवैधानिक समाधान चाहिए। #OBC_आरक्षण #27प्रतिशत_आरक्षण #OBC_अधिकार
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Manoj Yadav
Manoj Yadav@Manoj23446Manoj·
OBC परिवार का स्नेहिल निमंत्रण..। मोहन यादव सरकार स्वीकार करे।।
कमलेंद्र Kamlendra@baagi_kamlendra

अब सवाल सिर्फ @drmohanoffice51 सरकार से नहीं है, ये सवाल पूरे सिस्टम से है—क्या हमारे सपनों की कोई कीमत नहीं? जब एक शादी का निमंत्रण पत्र भी दर्द बयान करने लगे, तो समझ लीजिए कि बात अब सिर्फ मांग की नहीं… मजबूरी की है। “13% होल्ड हटाओ, 27% OBC आरक्षण लागू करो” ये कोई नारा नहीं है… ये उन लाखों युवाओं की टूटी उम्मीदों की आवाज़ है, जो हर भर्ती, हर रिजल्ट, हर मौके पर खुद को पीछे छूटता देख रहे हैं। किसी के घर में शादी की खुशियां हैं…लेकिन उसी कार्ड पर अपने हक की लड़ाई लिखनी पड़ रही है। इससे बड़ा दर्द क्या होगा? मध्यप्रदेश का OBC युवा आज भी इंतज़ार में है—कि शायद इस बार न्याय मिलेगा…शायद इस बार उनका भविष्य “होल्ड” पर नहीं रहेगा।

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कमलेंद्र Kamlendra
कमलेंद्र Kamlendra@baagi_kamlendra·
मप्र 27% ओबीसी आरक्षण कानून लागू है. @BJP4MP सरकार @RSSorg की विचारधारा को मानते हुए MP में OBC आरक्षण को 7 वर्षों से रोक कर रखी है 87-13 का फार्मूला किस आधार पर बनाया गया? मप्र में बैठे मनुवादी, षडयंत्रकारी महाधिवक्ता, वकीलों, अफसरों ने ओबीसी आरक्षण को रोकने की कोशिश जारी है
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Sr.Adv.Rameshwar Singh Thakur
👉प्रेस नोट 👉 सुप्रीम कोर्ट द्वारा ओबीसी आरक्षण के प्रकरणों में पारित आदेश दिनांक 19/02/26 में किया महत्वपूर्ण संशोधन 52 प्रकरणों को भी भेजा हाईकोर्ट को बापस ! 👉 ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर रिव्यू याचिका MA/529/2026 मे सुप्रीम कोर्ट ने की स्वीकार पूर्व में पारित आदेश दिनांक 19 फरवरी में किया संशोधन! 👉 आदेश दिनांक 19/2/26 द्वारा ट्रांसफर केसो में से दो प्रकरण सुप्रीम कोर्ट ही करेंगी सुनवाई ! 👉 संशोधित आदेश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ओबीसी आरक्षण के बकाया 52 प्रकरणों को भी किया जबलपुर हाईकोर्ट को ट्रांसफर ! 👉जबलपुर 30/03/2026:-, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर में ओबीसी आरक्षण के बिचाराधीन सभी प्रकरणों को मध्य प्रदेश सरकार (महाधिवक्ता) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराए गए थे, जो दो अलग-अलग बंचो में अलग-अलग खंडपीठ के समक्ष पेंडिंग थे ! जिन में से लगभग एक दर्जन मामले जो जस्टिस नरसिम्हा एवं जस्टिस आलोक आराधे के समक्ष नियत थे तथा जिनमे ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर द्वारा नियमित सुनवाई हेतु आवेदन दाखिल किए हैं थे उनमे सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिनांक 19 फरवरी 2026 को फाइनल आदेश पारित कर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिए गए थे तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति से उक्त समस्त प्रकरणों को विशेष बेंच गठित कर 3 महीने के अंदर निराकृत करने के आदेश पारित किए गए थे ! सुप्रीम कोर्ट के उक्त आदेश दिनांक 19/02/26 में त्रुटि होने के कारण ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा, दीपक कुमार पटेल के नाम से एक रिव्यू याचिका MA/529/26 दाखिल की गई थी,जिस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा खुले न्यायालय में 20 मार्च 2026 को विस्तृत सुनवाई करते हुए पूर्व में पारित अपने आदेश दिनांक 19 फरवरी 2026 में संशोधन कर 52 प्रकरण जो मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ट्रांसफर कराए गए थे उनको भी 20 मार्च के आदेश से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिए गए हैं, तथा दो विशेष अनुमत याचिकाएं जो पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस की गई थी उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने आदेश दिनांक 20/3/26 जो वेवसाइड पर 30/03/26 को अपलोड हुआ हैं !उक्त आदेश मे सुप्रीम कोर्ट ने दो एस.एल.पी. जिनमे दीपक कुमार पटेल विरूध मध्य प्रदेश शासन एवं हरिशंकर बरोदिया विरूध मध्य प्रदेश शासन को अपने समक्ष सुनवाई हेतु बापस रीकाल कर लिए गए हैं शेष आदेश दिनांक 19/02/2026 यथावत रहेगा ! ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा उन समस्त मामलों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट मे दिनांक 02/04/2026 को सुनवाई नियत हैं !
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Prajapati Inder Bajrangi
Prajapati Inder Bajrangi@prajaptiinder·
अनिल मिश्रा (EWS) की फीस - 100 रुपये अनिल निषाद (OBC) की फीस - 300 रुपये
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Prajapati Inder Bajrangi
Prajapati Inder Bajrangi@prajaptiinder·
जहां अनारक्षित में से EWS का 10% दिया जाना था, वहा पूरे 100% में से 10% दिया जा रहा है! जब SC, ST, OBC को EWS में शामिल ही नहीं किया गया है तो क्यों टोटल वेकेंसी का 10% दिया जा रहा था???
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Kamal Nath
Kamal Nath@OfficeOfKNath·
भाजपा के राज में मध्य प्रदेश में सारा शोध और अनुसंधान भर्ती परीक्षा घोटाले में किया जा रहा है। भर्ती घोटाले में विकास इतनी तेज़ी से हो रहा है कि जहाँ व्यापम घोटाले में OMR शीट बदली जाती थी, वहीं अब पुलिस आरक्षक भर्ती घोटाले में हाईटेक तरीक़े से बाहर बैठे व्यक्ति ने परीक्षा कक्ष में बैठे अभ्यर्थी के पेपर सॉल्व कर दिए। जाँच में इस बात की आशंका जतायी गई है कि यह पेपर रिमोट एक्सेस सॉफ़्टवेयर या कंप्यूटर मिररिंग के ज़रिए हल किए गए हैं। अभी तक ऐसे 14 अभ्यर्थी की पहचान हो चुकी है, जिन्होंने 30-40 सेकंड में हल हो सकने वाले सवालों को 3-4 सेकंड में हल कर दिया। सवाल यह उठता है कि यह सारा काम क्या सिर्फ़ कुछ व्यक्तियों द्वारा परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने का है या फिर इसके पीछे बड़ा रैकेट काम कर रहा है जो जानबूझकर परीक्षा प्रक्रिया को हाईजैक कर रहा है। अयोग्य व्यक्तियों को नौकरी दिलाने की साज़िश रच रहा है और योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर रहा है। क्या ऐसा तंत्र सत्ता की भागीदारी के बिना संभव है? प्रदेश की जनता जान चुकी है कि भाजपा नेताओं की सरपरस्ती के बिना इस तरह की परीक्षा चोरी संभव नहीं है। भर्ती परीक्षाओं की चोरी रोकने के लिए भाजपा की सरकार को हटाना ही एकमात्र उपाय बचा है।
Kamal Nath tweet media
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Dr Mohan Yadav
Dr Mohan Yadav@DrMohanYadav51·
सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई।
BJP Madhya Pradesh@BJP4MP

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री @Hkhandelwal1964 जी की सहमति से भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा की जाती है।

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Tribal Army
Tribal Army@TribalArmy·
UPSC इंटरव्यू में एससी, एसटी, ओबीसी वर्गों के छात्रों के साथ भेदभाव होता हैं !
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OBC MADHYA PRADESH TEAM
OBC MADHYA PRADESH TEAM@Surawatjeevan·
जो भारतीय जनता पार्टी जो ओबीसी वर्ग के युवा के साथ झूठ दिखावा कर रही उस का आने वाले चुनाव में परिणाम झेलना पड़ सकता हे ओबीसी के युवा को चयनित होने के बाद भी युवा को वंचित किया जा रहा हे! जब ओबीसी के वोट लेने की बारी आती बीजेपी को ओबीसी की जनसंख्या दिख जाती ओर तो ओर पंचायत चुनाव में सरकार आरक्षण लेने के लिए ट्रिपल टेस्ट भी करा लेती तो अब क्यों नहीं ओबीसी के युवा ने बीजेपी सरकार को वोट नहीं दिया होगा क्या ! #mp_ओबीसी_13_प्रतिशत_अनहोल्ड_करो म.प्र.महाधिवक्ता_हटाओ 13प्रतिशत_ओबीसी_होल्ड_हटाओ @DrMohanYadav51 @narendramodi @RahulGandhi @jitupatwari @YadavArunesh x.com/i/status/20301…
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Radha Vishwakarma
Radha Vishwakarma@RamsakhiVi79064·
24 मार्च 2026 — जबलपुर चलो मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण लागू न होना बहुजन समाज अब चुप नहीं बैठेगा। महाधिवक्ता निवास का घेराव होगा। 27% ओबीसी आरक्षण हर हाल में लागू कराना होगा। ✊ जबलपुर चलो — अधिकार लेकर रहेंगे। #महाधिवक्ता_हटाओ_27_प्रतिशत_लागू_करो
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OBC MADHYA PRADESH TEAM
OBC MADHYA PRADESH TEAM@Surawatjeevan·
मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर जो घटनाक्रम सामने आया है, वह केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। मुझे हैरानी है कि हमारी कांग्रेस सरकार ने ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण देने की प्रक्रिया पूरी कर दी थी, और 27% आरक्षण प्रदेश में लागू भी हो गया था, लेकिन कुछ लोगों ने छल करते हुए इसे रोकने का काम किया, नतीजतन आज तक हमारे ओबीसी समाज को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। आखिर यह कैसी व्यवस्था है, जिसमें एक सरकार अधिकार देती है, तो दूसरे दल की सरकार इसे लागू नहीं करने को अपनी उपलब्धि मानती है। हाईकोर्ट से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। प्रदेश के युवाओं को उम्मीद थी कि अब शीर्ष अदालत में ठोस तैयारी के साथ सरकार अपना पक्ष रखेगी और वर्षों से लटका विवाद सुलझेगा। लेकिन जो खबरें सामने आईं, वे चौंकाने वाली हैं। कभी सरकार के वकील अधूरी तैयारी के साथ पहुँचे, तो कभी समय पर उपस्थित ही नहीं हुए। क्या यह संवेदनशील मुद्दा इतनी लापरवाही से निपटाने लायक था? क्या सरकार को अंदाज़ा नहीं कि इस फैसले पर लाखों भर्तियाँ, हजारों परिवारों की उम्मीदें और पूरे समाज का विश्वास टिका हुआ है? अब सुप्रीम कोर्ट ने मामला वापस हाईकोर्ट को भेज दिया है और विशेष पीठ बनाकर तीन महीने में निर्णय लेने को कहा है। सवाल यह है कि यदि शुरुआत से ही गंभीरता दिखाई जाती, तो क्या यह स्थिति बनती? क्या युवाओं को वर्षों तक असमंजस में रखा जाना चाहिए था? 2019 से शुरू हुआ यह विवाद आज 2026 तक खिंच चुका है। कितनी पीढ़ियाँ इस इंतज़ार में अपनी आयु सीमा पार कर चुकीं, कितनी भर्तियाँ अटक गईं, इसका हिसाब कौन देगा? सरकार बार-बार दावा करती है कि वह पिछड़े वर्ग के साथ खड़ी है। लेकिन यदि 27% आरक्षण का लाभ वास्तविक रूप से लागू ही नहीं हो पा रहा, तो यह समर्थन केवल भाषणों तक सीमित क्यों दिखाई देता है? यदि नीति सही थी, तो उसकी कानूनी तैयारी पुख्ता क्यों नहीं थी? यदि सामाजिक न्याय का संकल्प था, तो अदालत में पक्ष मजबूती से क्यों नहीं रखा गया? क्या हमारे देश में न्याय मिलना इतना कठिन हो गया है? या फिर न्याय की राह में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी सबसे बड़ी बाधा बन रही है? प्रदेश का ओबीसी वर्ग जवाब चाहता है। युवा जानना चाहते हैं कि उनका अधिकार कब तक अदालतों की तारीखों में उलझा रहेगा। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि वह केवल घोषणा करती है या वास्तव में उसे लागू कराने की क्षमता और गंभीरता भी रखती है। अब समय आ गया है कि सरकार राजनीतिक बयानबाज़ी से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई दिखाए। सामाजिक न्याय केवल घोषणा से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, कानूनी तैयारी और जवाबदेही से स्थापित होता है। मध्यप्रदेश का ओबीसी समाज अब प्रतीक्षा नहीं, परिणाम चाहता है। #ओबीसीMP_13अनहोल्ड_करे ओबीसी युवा को न्याय दीजिए 7 साल से 13 प्रतिशत होल्ड बच्चे को न्याय दिजिए
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Sr.Adv.Rameshwar Singh Thakur
👉 20/2/2026 •ओ.बी.सी. आरक्षण के समस्त केस सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट जबलपुर को किए बापिस, तथा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश तीन माह के भीतर विशेष बैंच गठित कर मामलो का वरीयता पर करे निराकरण | •हाईकोर्ट द्वारा बिभिन्न मामलो में पारित अंतरिम आदेशो का अवलोकन कर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा 27% के कानून पर नही है रोक, सरकार चाहे तो छत्तीसगढ़ के मामलो में पारित अंतरिम आदेश दिनांक 01.05.2023 के अनुसार ओ.बी.सी. का 27% आरक्षण याचिकाओ के अधीन कर सकती है लागू | •सर्वोच्च न्यायालय ने माना हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश दिनाक 19/03/2019 का प्रभाव अध्यादेश पर था लेकिन अध्यादेश समाप्त होने के बाद संशोशन कानून लागू होने के बाबजूद भी उक्त अंतरिम आदेश पारित किया जाता रहा नई याचिकाओं में | •सरकार द्वारा दायर अंतरिम आवेदनों को कंसीडर करने हेतु सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को दिए निर्देश | जबलपुर 20/02/2026 :- ओ.बी.सी. आरक्षण के समस्त मामले जबलपुर हाईकोर्ट को विशेष निर्देशों के साथ सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 19.02.26 को विस्तृत आदेश पारित कर प्रत्यावर्तित कर दिए गए है | सर्वोच्च न्याया. द्वारा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देशित किया गया है की ओ.बी.सी. आरक्षण के मामलो की सुनवाई हेतु स्पेशल बैंच गठित कर तीन माह के भीतर निराकृत करने का आग्रह किया गया है | सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश में स्पष्ट किया गया है की छत्तीसगढ़ राज्य के मामलो में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिनांक 01.05.2023 को पारित अंतरिम आदेश जिसमे सर्वोच्च न्यायालय 50% की सीमा से ज्यादा छत्तीसगढ़ राज्य के अनुरोध पर 68% आरक्षण लागू करने की अनुमति प्रदान की गई है | मध्य प्रदेश सरकार चाहे तो उसी अंतरिम आदेश की अवधारणा के अनुक्रम में लागू कर सकती है | सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश में अप्ष्ट किया गया है की याचिका क्रमांक 5901/2019 में दिनांक 19/03/2019 को आर्डिनेंस (अध्यादेश) दिनांक 08/03/19 के प्रभाव पर अंतरिम आदेश पारित किया गया है जबकि विधायिका द्वारा दिनांक 14/07/2019 को विधिवत कानून बनाकर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 अधिनियम बनाया उक्त 1994 अधिनियम की धारा 4(क) और (ख) में सभी पदों पर सार्वजनिक रोजगार में “अन्य पिछड़ा वर्ग” के लिए 27% आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए क्रमशः 16% और 20% आरक्षण का प्रावधान है । लेकिन हाईकोर्ट द्वारा पारित बिभिन्न अंतरिम आदेशो में याचिका क्रमांक 5901/2019 में दिनांक 19/03/2019 का आदेश नियमित किया जाता रहा है | सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में रेखांकित किया गया की मध्य प्रदेश राज्य में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण को अन्य राज्यों के समान 27% तक बढ़ाने की लगातार मांग रही है, हालांकि, 50% की आरक्षण सीमा के कारण, इस मांग को लंबे समय तक विधायी स्वीकृति नहीं मिली तत्सम्वंध में सर्वोच्च न्यायालय में इस मुद्दे पर एसएलपी (सी) संख्या 21195/2015 दायर की गई जिसमे चाही गई राहत को ट्रांसफर याचिकाओ में आधार बनाया गया जो कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है । सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेश में कहा गया की आरक्षण की मांग और राज्यों द्वारा सकारात्मक कार्रवाई के प्रावधान हेतु अपनाए जाने वाले मापदंड, प्रत्येक राज्य में अलग-अलग होंते है एवं राज्य के सामाजिक ताने-बाने पर निर्भर करते है । सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कहा गया की आरक्षण एक संवैधानिक दायित्व और राज्य नीति के विशेषाधिकार हैं, लेकिन संबंधित राज्य का उच्च न्यायालय ऐसी नीतिगत निर्णयों को चुनौती देने एवं वैधता और अधिकारिता की जांच करने के लिए सर्वोपरि है । सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कहा गया की छत्तीसगढ़ राज्य में जो स्थिति थी, तत्सम्वंध में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा लिया गया निर्णय को मध्य प्रदेश राज्य की सामाजिक तथा भूगोलिक स्थिति के संवंध में मार्गदर्शक सिद्धांत नहीं हो सकता तथा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय राज्य के लिए सकारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता और वैधता का समग्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए सर्वोत्तम स्थिति में होगा । उच्च न्यायालय के निर्णय के बिना, अनुच्छेद 32 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए, इन मुद्दों की स्वतंत्र रूप से जांच करना अनुचित होगा | उक्त मामलो में ओ.बी.सी. वर्ग की और से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, वरुण ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह ने पक्ष रखा |
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Naveen Kumar Nandan
Naveen Kumar Nandan@NkNandanLive·
ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी लंबित मामलों को संबंधित हाईकोर्ट में वापस भेजते हुए स्पष्ट किया है कि कानून की संवैधानिक वैधता तय करने की जिम्मेदारी अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की होगी। साथ ही पूर्व में जारी सभी अंतरिम आदेशों को शून्य प्रभावी मानते हुए प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। यह निर्णय प्रशासनिक और संवैधानिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब “अनहोल्ड” पदों पर भर्ती और 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने का मुद्दा सीधे तौर पर राज्य सरकार की नीयत और पहल पर निर्भर करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने अनावश्यक देरी पर सरकार के आचरण को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की है, जो यह संकेत देती है कि सामाजिक न्याय के मुद्दों पर गंभीरता और पारदर्शिता अपेक्षित है। आज आवश्यकता है कि संविधान की मूल भावना — समानता, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय — को प्राथमिकता दी जाए, ताकि ओबीसी वर्ग के अधिकारों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। #socialjustice #OBCReservation #Supremecourt
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Bhopal Samachar
Bhopal Samachar@BhopalSamachar·
OBC Reservation: What Happened in the Supreme Court, Advocate Varun Thakur Explained 👉 The Supreme Court has sent back all OBC reservation cases to the High Court! 👉 Treating all interim orders as null and void, the Supreme Court has returned the OBC reservation matters to the High Court! 👉 For deciding the constitutional validity of the law, the Supreme Court has transferred all cases to the High Court! 👉 Unholding the posts and implementing 27% reservation depends on the government's intention! 👉 The Supreme Court strongly criticized the government's conduct for causing unnecessary delays in the cases! 👉 In the Supreme Court, the side of the OBC community was presented by senior advocates Rameshwar Singh Thakur and Varun Thakur! (This appears to be a summary shared by Advocate Varun Thakur regarding ongoing Madhya Pradesh OBC reservation matters, where the Supreme Court has remanded/transferred cases back to the High Court, vacated interim stays, and pulled up the government on delays.) #bhopalsamachar #mpnews #madhyapradesh #latestnews #bhopal_samaachar #madhyapradeshnews #madhyapradeshnewshindi
English
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Sr.Adv.Rameshwar Singh Thakur
MP ओबीसी आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट से ब्रेकिंग न्यूज़, समस्त अंतरिम आदेश प्रभाव शून्य #MadhyaPradesh - में ओबीसी आरक्षण के बारे में सुप्रीम कोर्ट से आज ब्रेकिंग न्यूज़ आई है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ओबीसी आरक्षण से संबंधित समस्त अंतरिम आदेश प्रभाव शून्य मानते हुए, 13% पदों को अनहोल्ड करने के लिए सरकार को स्वतंत्र कर दिया। इससे बड़ी बात... bhopalsamachar.com/2026/02/mp_19.…
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OBC Kranti sena
OBC Kranti sena@ArakshanObc·
25 को — भोपाल में निर्णायक हुंकार! जब सुनवाई होती है — तो सॉलिसिटर जनरल और एडवोकेट जनरल उपस्थित क्यों नहीं होते? 7 साल से 27% ओबीसी आरक्षण अटका है। 13% “अनहोल्ड” पर लटका है। अगर सरकार गंभीर है, तो अदालत में मजबूत, समयबद्ध पैरवी क्यों नहीं? SC में बार-बार समय माँगना समाधान नहीं है
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