Badgoodu

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@badgoodu

Lawyer Delhi High Court & Supreme Court.follow me, I will follow You back

New Delhi, India Katılım Ocak 2010
7.5K Takip Edilen5.9K Takipçiler
Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
@BhimArmyChief जो संस्थाएं छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करेंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। भले ही वो किसी सांसद या विधायक के करीबियों की क्यों न हो।
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ 29 मई को प्रयागराज में हुए छात्रों-छात्राओं के आंदोलन के बाद संस्थानों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई बेहद चिंताजनक और निंदनीय है। संस्थानों पर सरकार की यह दमनकारी कार्यवाही अगर जल्द वापस नही ली गई तो इसके खिलाफ जल्द ही बड़ा आंदोलन प्रयागराज या लखनऊ में किया जाएगा। अध्यापक साथी अपने आप को अकेला ना समझे, भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) हर प्रकार के अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़ी है। #Prayagraj #StudentProtest #PaperLeak
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सारांश कृष्ण जी महाराज || ॐ 📿 ||
मित्रो! जन्मना जायते जातिः, सा तु नित्यं स्थिरा भवेत्। धर्मान्तरं विवाहं वा, कुर्यात् चेत् मानवोऽपि च॥ न जहाति स्वजातिं सः, देहे जीवति यावता। बाबासाहेबकृतं संविधानं अस्मान् एतद् बोधयति। यथा- मनुष्य जन्म से ही अपनी जाति के साथ जन्म लेता है और वह जाति स्थायी होती है। चाहे वह धर्म परिवर्तन कर ले या किसी दूसरे धर्म के स्त्री/पुरुष से विवाह कर ले, फिर भी जीवन भर उसकी मूल जाति नहीं बदलती... बाबा साहेब द्वारा रचित औपनिवेशिक संविधान हमें यह बात समझाता है... जबकि ब्राह्मणों का ग्रन्थ यह बताता है... 👇
सारांश कृष्ण जी महाराज || ॐ 📿 || tweet media
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
@yogi1056 जी स्वामी जी, चरणस्पर्श! संविधान ने जातियों को स्थाई बना दिया है। जबकि हमारे वेदों में वर्णित वर्ण व्यवस्था कर्म आधारित है। वेदों में जाति से पर्याय, एक तरीके से प्रजनित लोगों से है। जैसे मनुष्य जाति, पशु जाति, पक्षी जाति आदि।
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Grok
Grok@grok·
नहीं, यह भगवान महावीर की मूर्ति नहीं है। यह पाल काल (8वीं-12वीं शताब्दी) की बौद्ध मूर्तिकला है जिसमें गौतम बुद्ध को ध्यान मुद्रा में दिखाया गया है। मुख्य चिह्न: उष्णीष (सिर पर गांठ), प्रभामंडल, अलंकृत सिंहासन, हाथों की मुद्रा और समग्र शैली — ये स्पष्ट रूप से बुद्ध की पहचान कराते हैं। जैन तीर्थंकर मूर्तियों (जैसे महावीर) में आधार पर सिंह चिन्ह, अलग सिर बनावट और अक्सर कायोत्सर्ग मुद्रा होती है। पाल काल मुख्यतः बौद्ध कला के लिए जाना जाता है। नमो बुद्धाय 🙏
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
@grok @SavitaK74929291 ठीक से देखो, बुद्ध कबसे सजावटी चीजें धारण करने लगे?
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Grok
Grok@grok·
यह प्राचीन भारतीय बौद्ध मूर्तिकला (संभवतः पाल काल, 8वीं-12वीं शताब्दी) की है। ऐतिहासिक गौतम बुद्ध ने साधारण कषाय वस्त्र पहने थे, कोई आभूषण नहीं। लेकिन मूर्तियों में प्रभामंडल (halo) ज्ञान की रोशनी का प्रतीक है, सिंहासन व आधार की सजावट कलाकार की शैली व काल को दर्शाती है। सजावटी तत्व मूर्ति के डिज़ाइन का हिस्सा हैं, बुद्ध द्वारा धारण किए गए नहीं। ध्यान मुद्रा, उष्णीष और मुद्रा स्पष्ट रूप से बुद्ध को दर्शाती है।
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Grok
Grok@grok·
@badgoodu @SavitaK74929291 यह मूर्ति भगवान गौतम बुद्ध की है। प्राचीन पत्थर की बौद्ध मूर्ति है, ध्यान मुद्रा में बैठे हुए, प्रभामंडल और सजावटी तत्वों के साथ।
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Savita Kumari
Savita Kumari@SavitaK74929291·
आपको पुरे इतिहास में कहीं नहीं मिलेगा जिसमें किसी एससी,एसटी,ओबीसी ने बुद्धिज्म का विरोध किया है।इसका मतलब है ये वर्ग बुद्धिज्म के आरंभ से हीं हार्डकोर बुद्धिस्ट रहा है। नमो बुद्धाय🙏🙏🙏
Savita Kumari tweet media
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
@BhimArmyChief आपके अंधभक्तों का मानना है कि मेधा नाम की कोई चीज नहीं होती। उनका कहना है कि मेधा आपके अंधभक्तों को नौकरी नहीं देने का एक बहाना है। तो इस लिहाज से आपका ये राजनीतिक वादा झूठा लगता है।
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
IIT-JEE Advanced 2026 में सफलता प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगलकामनाएँ। जो विद्यार्थी इस बार सफल नहीं हो सके, उनसे कहना चाहता हूँ कि एक परीक्षा आपकी क्षमता, प्रतिभा और भविष्य का अंतिम निर्णय नहीं करती। निराश होने के बजाय नए संकल्प के साथ आगे बढ़िए, क्योंकि मेहनत और लगन का कोई विकल्प नहीं होता। हमारा मानना है कि प्रतिभा को अवसर मिलना चाहिए। इसलिए उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार आने पर IIT में चयनित प्रदेश के प्रत्येक छात्र-छात्रा की पढ़ाई मात्र 1 रुपये में कराई जाएगी, ताकि आर्थिक अभाव किसी भी मेधावी विद्यार्थी के सपनों के आड़े न आए। मेहनत आपकी, जिम्मेदारी हमारी। #ASP_K_Mission2027
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
@AnilYadavmedia1 @grok तु जो लिखना चाहता था, वो शुभम् कुमार को आरक्षित श्रेणी का समझकर लिख दे। मन का भ्रास निकाल ले, नहीं तो बात पेट में रखने के कारण तुझे बवासीर हो जाएगा।
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ANIL
ANIL@AnilYadavmedia1·
Hey @grok ये बता JEE एडवांस परीक्षा 2026 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करने वाले शुभम कुमार Sc, ST, OBC हैँ, या जनरल कास्ट हैँ,
ANIL tweet media
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
@Kanchanyadav000 वैसे ऊपर-ऊपर से देखें तो एक गालिबाज प्रवक्ता जो एक पत्रकार को दो कौड़ी का कह रही हैं, दरअसल वह खुद को ही दो कौड़ी का कह रही हैं।
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Dr. Kanchana Yadav
Dr. Kanchana Yadav@Kanchanyadav000·
वैसे ऊपर-ऊपर से देखें तो एक झालमुड़ी पत्रकार जो यूट्यूब शिक्षकों को दो कौड़ी का कह रही हैं, दरअसल वह खुद को ही दो कौड़ी का कह रही हैं।
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
शिव भक्तनी अहिल्या बाई होलकर जी इतनी महान है कि सिर्फ उनके नाम का एक बोर्ड गिरने से उनका अपमान हो जाए, ये सोचा भी नहीं जा सकता। बी रामजी सकपाल टाईप के लोगों का अपमान एक बोर्ड गिरने से हो सकता है, क्योंकि उसकी। महानता झूठी और बनावटी है। पिछले 40 सालों में झूठ बोल बोल कर उसे महान बनाया गया।
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Chandra Shekhar Aazad
Chandra Shekhar Aazad@BhimArmyChief·
उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद के थाना हाथरस जंक्शन क्षेत्र की पूरा चौकी के बेरगांव में नारी शक्ति, साहस, वीरता और न्याय की अनोखी मिसाल, माता अहिल्याबाई होल्कर जी की जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में लगाए गए बोर्ड को एक पुलिसकर्मी द्वारा लात मारकर गिराने की घटना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। यह केवल एक बोर्ड नहीं, बल्कि भारत की महान विरासत, नारी सम्मान और करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान है। हम @UPGovt से मांग करते हैं कि इस घटना की तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पुलिसकर्मी के विरुद्ध कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए। लोक माता अहिल्याबाई होल्कर जी का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
@yogi1056 जी स्वामी जी चरणस्पर्श ! बिल्कुल सहमत हूं आपसे।
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
आज़ मुझे समझ में आया की ​"महात्मा गांधी का यह कहना कि 'अगर तुम हिंसा का प्रतिकार नहीं करोगे, तो हिंसा करने वालों के मन में तुम्हारे लिए करुणा जाग जाएगी'... आज सोचने पर यह बात पूरी तरह से व्यावहारिक नहीं लगती। इतिहास और क्रूरता का मनोविज्ञान इस बात की गवाही नहीं देता कि केवल सहने से हिंसक व्यक्ति का मन पिघल जाता है।" ​"अगर यह बात सच होती, तो इसके उलट उदाहरण हमें प्रकृति और समाज में क्यों नहीं दिखते? एक सीधा सा उदाहरण देखिए—पिछले 1400 सालों से बकरे काटे जा रहे हैं। उन्होंने कभी कोई प्रतिकार नहीं किया, कभी किसी पर पलटकर वार नहीं किया, वे पूरी तरह अहिंसक रहे। लेकिन क्या इतने सदियों की अहिंसा के बाद भी, काटने वालों के मन में उन बेज़ुबान बकरों के लिए कोई करुणा जागी? ​नहीं जागती। क्योंकि दुनिया केवल आपकी अहिंसा को देखकर नहीं, बल्कि आपकी ताकत और आपके प्रतिकार की क्षमता को देखकर झुकती है। इतिहास की कड़वी सच्चाई यही है कि कमज़ोर की अहिंसा को दुनिया अक्सर उसकी लाचारी समझ लेती है।"
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
जनता को भी वैसा हीं सरकारी घर बना के दिलवा दिजिए। जिसको खाली नहीं करना पड़े। सभी सरकारी नौकरों जिनको सरकार घर देती है, लालू राबड़ी को आदर्श मानते हुए जहां जहां भी ट्रान्सफर हो और सरकारी घर मिले , तो खाली न करें। लालू-राबड़ी जैसे नेताओ को आदर्श मानें और जहां मौका मिले देश को लूट लें। इसमें देश की भलाई हो न हो, पर इसी में आपकी और भारत के दुश्मन देशों की भलाई है।
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Rohini Acharya
Rohini Acharya@RohiniAcharya2·
अगर हिम्मत है तो जबरन बंगला खाली करवाए सरकार .. जनहित के ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक प्रतिशोध की राह पर है सम्राट चौधरी की सरकार l पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती राबड़ी देवी जी को आवास से बेदखल करने का तुगलकी फरमान और आवास पर पुलिस भेजना लोकतंत्र नहीं, सत्ता के अहंकार एवं बेजा दबंगई की निशानी है। अफसोसजनक है कि बेरोज़गारी, महंगाई , भ्रष्टाचार , बढ़ते अपराध के फ्रंट पर पूरी तरह से निष्क्रिय साबित होती सम्राट चौधरी की सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने में पूरी सक्रिय हैl ये शासन का कौन सा मॉडल है ? बेशक शासन का " प्रतिशोध मॉडल " l
Rohini Acharya tweet media
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
शुक्र मानिये कि देश का सामान्य वर्ग समाज देश की तरक्की चाहता है। इसलिए उसने सत्ता के शीर्ष पर रहने के बावजूद जातिवादी संविधान के जातिवादी बंटवारे को ये सोचकर मान लिया कि शायद इसमें देश की भलाई हो, पर जिनको फायदा मिला वो काहिल और महाआलसी निकले। वे पहले भी स्वेच्छा से नहीं बल्कि लात खाकर काम करते थे। घर, पैखाना, राशन, बिजली, नौकरी में सिर्फ किसी खास जाति में जन्म लेने के कारण आरक्षण सब मुफ्त में मिलने के कारण सम्पूर्ण समाज गहरे आलस्य का आदि हो चुका है। कहीं भूले भटके काम करने को तैयार भी हो जाए, तो वहां जाकर वो सिर्फ आराम हीं करना चाहता है। अगर उसको बोला जाए की काम नहीं करोगे तो पैसा नहीं मिलेगा, तो SC/ST ACT में झूठा केस कर देगा। यही संविधान द्वारा बनाए गए तथाकथित SC/ST का जीवन है।
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Dr. Om Sudha
Dr. Om Sudha@dromsudhaa·
शुक्र मानिये कि देश का SC-ST-OBC समाज समानता चाहता है। बदला नहीं।।
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
@dromsudhaa @INCIndia @RahulGandhi @sampitroda @gurdeepsappal ये सनातन धर्म के ब्रह्माण्ड को छोड़ कर नीलचट्टा मत की नाली को अपना लिया। इसलिए इसके घर वालों ने इस नालायक को त्याग दिया। इसी कारण से इसको अपने दादाजी के मूर्ति के अनावरण केलिए नहीं बुलाया गया और इसी कारण इसका नाम वहां नहीं लिखा है।
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Dr. Om Sudha
Dr. Om Sudha@dromsudhaa·
मेरे दादा स्वतंत्रता सेनानी अगरजीत पासवान। जिनके नेतृत्व में बिहार, मुंगेर जिले के घोरघट गांव में महात्मा गांधी को लाठी भेंट कि गयी थी। हमारा गांव लाठियों के व्यापार के लिए जाना जाता था। @INCIndia @RahulGandhi @sampitroda @gurdeepsappal
Dr. Om Sudha tweet media
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
@AnilYadavmedia1 सही बात है भाई, गुण्डे- मवालियों से मकान खाली कराना कोई आसान काम थोड़े ही है।
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ANIL
ANIL@AnilYadavmedia1·
बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री और आयरन लेडी श्रीमति राबड़ी देवी जी ने एलान कर दिया है कि सरकार में हिम्मत है तो आवास खाली करके दिखाए,
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
नमाज हर दिन 5 बार होती है, और शिफ्ट में कम से कम आधा घंटा समय सड़क पर नमाज पढ़ने में लगे, तो हर दिन लगभग 0.5x5=2.5 घंटे सड़क जाम रहेगी । ओवैसी अल तकैया कर रहा है कि सिर्फ ईद या बक़रीद पर लोग सड़कों पर नमाज पढ़ते हैं। योगी से पहले के यू पी और सुधांशु से पहले के बंगाल में जाकर सैम्पल ले लिजिए। आप पाएंगे की नमाज के कारण घंटों सड़कें जाम रहतीं थीं। कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी। अगर कोई महिला वहां से गुजरे, तो उसका बलात्कार या मोलेस्टेशन आम बात थी। आस पड़ोस के लोग डरे हुए होते थे। उस दौरान नमाज वाले इलाके में चोरी छिनतई बढ़ जाती थी। भूतकाल में उत्पन्न ऐसी स्थिति के कारण हीं सरकारों ने सीख लेकर सड़क पे नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी।
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Dainik Jagran
Dainik Jagran@JagranNews·
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को कहा कि अगर सड़कों पर नमाज पढ़ना गलत है तो सभी धर्मों की धार्मिक गतिविधियों पर भी समान रूप से पाबंदियां लागू होनी चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला दिया, जो धर्म की स्वतंत्रता और अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने और उसे मानने के अधिकार की गारंटी देता है। 'ईद मिलाप' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने तर्क दिया कि नमाज पर लोगों की आपत्तियां एक 'दोहरे मापदंड' (double standard) को दर्शाती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य समुदायों द्वारा आयोजित धार्मिक जुलूसों और सभाओं पर इसी तरह की चिंताएं क्यों नहीं उठाई जातीं? ओवैसी ने कहा, "अनुच्छेद 25 याद रखें। अगर सड़क पर नमाज पढ़ना गलत है तो हर धर्म के त्योहार के मौके पर सड़क पर निकलना भी गलत है। अगर आप कहते हैं कि किसी के त्योहार के दौरान मांस की दुकानें बंद होनी चाहिए तो रमजान के 30 दिनों के लिए शराब की दुकानें भी बंद कर दें। 30 दिनों के लिए शराब की दुकानें बंद करें।" दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए ओवैसी ने कहा कि लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों पर कोई आपत्ति नहीं होती लेकिन वे अजान और नमाज पर आपत्ति जताते हैं। उन्होंने हिंदू त्योहारों के दौरान अंडे, मांस और चिकन की बिक्री पर लगाई गई पाबंदियों पर भी सवाल उठाते हुए पूछा, "यह किस तरह का कानून है?" उन्होंने कहा, "आपकी नफरत सिर्फ मुसलमानों के लिए है। और आपकी नफरत साफ दिखाती है कि आप इस धर्म को मानने वालों को दबाना और उन्हें हाशिए पर धकेलना चाहते हैं। आप उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाना चाहते हैं।" एआईएमआईएम अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जब भी रमजान या बकरीद जैसे बड़े मुस्लिम त्योहार नजदीक आते हैं तो अजान और नमाज से जुड़े मुद्दे जान-बूझकर उठाए जाते हैं। उन्होंने पूछा, "अजान से दिक्कत, नमाज से दिक्कत। आखिर आप लोगों को हो क्या गया है?" ओवैसी की ये टिप्पणी सार्वजनिक जगहों पर प्रार्थनाओं को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और कई राज्यों के अधिकारियों के हालिया निर्देशों के बीच आई है। इन निर्देशों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक सभाओं से ट्रैफिक या लोगों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए। ओवैसी ने धार्मिक यात्राओं और जुलूसों से तुलना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों के दौरान अक्सर सड़कों पर कब्जा कर लिया जाता है, जबकि इस पर वैसी आपत्ति नहीं होती। सड़कों पर नमाज पढ़े जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ शुक्रवार की नमाज या ईद के लिए होता है, हर दिन नहीं। उन्होंने कहा, "भारत में हर धर्म के त्योहार सड़कों पर ही मनाए जाते हैं, है ना? आप उन्हें नहीं देखते आप उनके प्रति आंखें मूंद लेते हैं।" हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नमाज एक तय तरीके से पढ़ी जानी चाहिए और अगर जरूरत हो तो लोगों को होने वाली परेशानी से बचने के लिए इसे कई शिफ्टों में किया जा सकता है। वहीं, सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के रेड रोड पर पारंपरिक ईद की जमात की इजाजत न देने का फैसला किया और प्रार्थनाओं को सार्वजनिक सड़कों पर फैलने से रोकने के लिए जमात को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शिफ्ट कर दिया। #AsaduddinOwaisi #DainikJagran
Dainik Jagran tweet media
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
@RajuSharmajour1 बिल्कुल ठीक काम किया। पुलिस वाले भी कमजोर को देखते ही बिना अधिकार के थप्पड़ जड़ते हैं।
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Raju Sharma journalist
Raju Sharma journalist@RajuSharmajour1·
'पुलिस कर्मी पर गुंडों ने की थप्पड़ों की बरसात' झांसी में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी को गुंडों ने बीच सड़क पर घेरकर पीट दिया. गुंडे लगातार थप्पड़ों की बरसात करते रहे. भीड़ तमाशबीन बनी रहीं. पुलिसकर्मी खुद को छोड़ देने की गुहार लगाता रहा. लेकिन बेरहम गुंडों का दिल नहीं पसीजा.
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
खाली कर दो भाई। वैसे भी न आप बिहार के लिए कुछ कर पा रहे हैं, न हीं आपके राजा और रानी बिहार केलिए कुछ कर पाए। उल्टा उन्होंने बिहार को बर्बाद ही किया। और आपके राजा और रानी बिहार को इतना लूट चुके हैं कि वो जो घर खाली करवाया जाएगा उससे काफी बढ़िया घर में रह सकते हैं। इसी कारण से बिहार सरकार की कुछ बचत होगी।
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Dr Gautam Krishna Ex-BDO
Dr Gautam Krishna Ex-BDO@DrGautamKrishna·
पूर्व मुख्यमंत्री राजमाता श्रीमती राबड़ी देवी और गरीब के मसीहा आदरणीय श्री लालू प्रसाद यादव का आवास यदि👉पुलिस द्वारा जबरन खाली करवाया गया तो मैं भी अपना सरकारी आवास खाली कर दूंगा।लालू-राबड़ी का अपमान नहीं सहेगा बिहार! @ABPNews @firstbiharnews
Dr Gautam Krishna Ex-BDO tweet media
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Badgoodu
Badgoodu@badgoodu·
मुसलमान को कुत्ता काट सकता है, पर मुसलमान कुत्ते को काट कर नहीं खाता। वो बकरों की तड़पा तड़पा कर हत्या करता है और फिर उसे खा जाता है। साथ हीं जहां बकरे काटे जाते हैं, वहां गंदगी, प्रदुषण, मक्खियां, खुन, बदबू, बीमारी स्वतः आ जाती है और लोगों का रहना मुश्किल हो जाता है। इससे सोसाइटी का बाजार मैथ्यू गीर जाता है।
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Karishma Aziz
Karishma Aziz@KarishmaAziz_·
“सोसायटी में साल भर कुत्ता रख सकते हैं पर सिर्फ एक दिन बकरा नहीं” तुम्हारी नफ़रत हम समझते हैं, तुम्हारी हुकूमत में तुम्हारी संकीर्ण सोच को समझते हैं। youtu.be/mrAHMLWkHIM?si…
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