dil_ka_tukda
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@brahmandkabaap1
Kaafi middle class
India Katılım Temmuz 2020
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मैं माननीय राज्यसभा सभापति को एक पत्र प्रस्तुत करूँगा, जिसमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के कारण राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की जाएगी, क्योंकि यह संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता त्यागने के समान है।
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Today, exercising the provisions of the Constitution of India, more than two-thirds of the AAP MPs in the Rajya Sabha have merged with the BJP.
Seven MPs have signed the document, which was submitted to the Hon’ble Chairman of the Rajya Sabha.
I, along with two other MPs, personally handed over the signed documents.
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हमारे देश की अर्थव्यवस्था गिरकर अब छठे स्थान पर आ गई है, रुपया लगातार कमज़ोर हो रहा, लोगों के काम-धंधे बंद हो रहे.. बेरोजगारी बढ़ रही, लेकिन मोदी सरकार के पास विपक्ष के नेताओं के घर ED भेजने से फ़ुर्सत नहीं...
ऐसे आगे बढ़ेगा देश?
ABP News@ABPNews
भारत 2025 में दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत एक स्थान नीचे खिसक गया है, जबकि इससे पहले 2024 में भारत पांचवें स्थान पर था. उस समय भारत की अर्थव्यवस्था करीब 3.76 ट्रिलियन डॉलर की थी. इस लिस्ट में भारत से आगे जापान, जर्मनी, चीन और सबसे ऊपर अमेरिका था. 2025 में भारत की अर्थव्यवस्था बढ़कर लगभग 3.92 ट्रिलियन डॉलर हो गई है, लेकिन इसके बावजूद ब्रिटेन (करीब 4 ट्रिलियन डॉलर) भारत से आगे निकल गया है. #IMF #EconomicGrowth #IndianEconomy #GDP #ABPNews
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कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आख़िरी चीख़ थी - जिसकी हर आवाज़ को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।
नोएडा में काम करने वाले एक मज़दूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह,₹4,000-7,000 किराया। जब तक ₹300 की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक ₹500 सालाना किराया बढ़ा देता है।
तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई ज़िंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज़ की गहराई में डुबा देती है - यही है “विकसित भारत” का सच।
एक महिला मज़दूर ने कहा - “गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं।” इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 का भी सिलेंडर खरीदा होगा।
यह सिर्फ़ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ़ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं - पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है।
मगर, अमेरिका के टैरिफ़ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन - इसका बोझ Modi जी के “मित्र” उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मज़दूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज़ खाता है।
वो मज़दूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई - जिसने बस काम किया। चुपचाप। बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार।
एक और ज़रूरी मुद्दा - मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाज़ी में बिना संवाद नवंबर, 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया।
जो मज़दूर हर रोज़ 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फ़ीस क़र्ज़ लेकर भरता है - क्या उसकी मांग ग़ैरवाजिब है? और जो उसका हक़ हर रोज़ मार रहा है - वो “विकास” कर रहा है?
नोएडा का मज़दूर ₹20,000 माँग रहा है। यह कोई लालच नहीं - यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है।
मैं हर उस मज़दूर के साथ हूं - जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।
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@narendramodi Sir aapne jo video bnaya h mobile m, wo ham dekhna chahte h😐
Eesti
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मेडिसिन या लूट?
>23 रुपए की दवा पर MRP 104 रुपए में ,
>28 रुपए की दवा पर MRP 132 रुपए में ,
>18 रुपए की दवा पर MRP 65 रुपए में ,
>14.60 रुपए की दवा पर MRP 28 रुपए में ,
>19 रुपए की दवा पर MRP 157 रुपए में ,
>42 रुपए की दवा 156 रुपए में बिक रही है।
आखिर यह खेल किसके संरक्षण में चल रहा है?
सरकार बताए कि दवाओं की कीमतों पर लगाम क्यों नहीं लगाई जा रही?
MRP और असली लागत के बीच इतना बड़ा अंतर किसकी मेहरबानी से है?
क्या मरीजों की जेब से खुली लूट पर जानबूझकर आंखें बंद की जा रही हैं?
या फिर इस पूरे खेल में ऊपर तक सबकी चुप्पी की कोई कीमत तय है?
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~50 रुपए दवा 500 MRP में बिक रही है,
~7 रुपए का इंजेक्शन 700 में बिक रहा है,
~कही ब्लड टेस्ट 200 का है, तो कहीं 2000 का,
~कहीं MRI 3500 रुपए की है, तो कहीं 7000 की,
~कहीं CT स्कैन 2000 रुपए का है, तो कंही 4000 का,
~लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष का ध्यान है कि कौन सी मूवी अच्छी है कौन सी खराब।
विडंबना
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