Sanat Shukla
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> एक बार सासंद बन जाओ। > एक बार विधायक बन जाओ। > एक बार एमएलसी बन जाओ। सबकी पेंशन लो, लेकिन इस देश का मजदूर वर्ग जो 10 घंटे गधे घोड़े की तरह मजदूरी करे उसे 12 हजार रुपए दिहाड़ी मजदूरी मिलेगी। सरकारी कर्मचारियों को 40 हजार से 80 हजार मिलेंगे एक धेला भरे का काम नहीं? लेकिन जो इस देश का मजदूर वर्ग है उसे 400 रुपए दिहाड़ी यह तो अन्याय है? ओवरटाइम भी दो गुनी या तीन गुनी मांग कर रहे हैं तो ग़लत क्या और ओवरटाइम के लिए जबरदस्ती भी क्यों? अगर नोएडा में मजदूरी बढाने के लिए और 20 हजार की वेतन मांग कर रहे तो इसमें अन्याय क्या है? गांव घर परिवार छोड़ कर यदि बच्चा कमाने के लिए बाहर पड़ा है तो 20 हजार रुपए उसके जायज है होना तो 30 हजार चाहिए। देश का 70 फीसदी वर्ग मज़दूर है और न्यूनतम मजदूरी पर पूरे देश मे कानून बनना चाहिए ताकि लोगों को 20 हजार कम से कम वेतन मिल सके। हम सभी अपने युवा भाईयो के साथ हैं।




नोएडा में छोटी–बड़ी हजारों फैक्ट्रियां हैं। शिफ्टवार ड्यूटी चलती है। यहां मजदूरों को औसत वेतन 10–15 हजार रुपए मिलता है। इसके सापेक्ष NCR में घर बनाने वाले मजदूर को 700 रुपए रोजाना मिलते हैं। यानि महीने का 21 हजार रुपया। फैक्ट्री मजदूर कई दिन से प्रोटेस्ट कर रहे थे। आज हिंसक हो गया। कई गाड़ियां जला दी गई हैं। कई कंपनियों के बाहर तोड़फोड़ हुई है। मजदूर चाहते हैं कि उन्हें न्यूनतम सैलरी 20 हजार रुपया मिले।



छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदूओं के सबसे बड़े महापुरुषों और नायकों में से एक हैं। पर ये उत्तर भारत के महाराष्ट्रीकरण का प्रोजेक्ट है। शिवाजी महाराज स्वयं इसे पसंद ना करते। उन्होंने स्वयं राजा छत्रसाल को बुंदेलखंड के नायक के रूप में स्थापित किया था। बिहार में बहुत से हिन्दू नायक हुए हैं। उनकी प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए।









