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Manda Prabhakar BSP
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Manda Prabhakar BSP
@bsp_prabhakar
Hyderabad 500088, TG Katılım Mayıs 2021
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उत्तर प्रदेश विधानसभा का आज से शुरू हो रहा मानसून सत्र, संक्षिप्त होने के बावजूद केवल औपचारिकता पूर्ति वाला नहीं हो, बल्कि इसको सही से प्रदेश व जनहित में उपयोगी बनाना ज़रूरी है, जिसकेे लिए सरकार एवं विपक्ष दोनों को अपने-अपने राजनीतिक स्वार्थ, द्वेष व कटूता आदि को त्याग कर आगे बढ़ना होगा।
इसके अलावा, संसद का जो अभी मानसून सत्र चल रहा है उसके भी पूरी तरह शान्तिपूर्ण तरीके से नहीं चलने से वह जन अपेक्षा के अनुसार सही से कार्य नहीं कर पा रहा है। इस कारण जनता व देश के ज्वलन्त मुद्दों पर पूरी गंभीरता से चर्चा नहीं हो पाने से लोगों में चिन्ता स्वाभाविक है।
वैसे भी भारतीय व्यापार पर भारी अमेरिकी टैरिफ के कारण देश की अर्थव्यवस्था व विकास पर जो बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका है उसकी चर्चा व्यापक रूप से हर जगह गर्म है, जिसपर ख़ास तौर से संसद में सही से चिन्तन-मनन करने की ज़रूरत है, क्योंकि यह देश के ’अच्छे दिन’ से जुड़ा देशहित का ख़ास मुद्दा है तथा जिसे हल्के में लेकर देश के भविष्य को दाव पर नहीं लगाया जा सकता है। सरकार व विपक्ष दोनों इस पर उचित व समुचित ध्यान दें।
साथ ही, चाहे वोटर व वोटर सूची तथा उसके रिवीज़न एवं ईवीएम आदि से सम्बंधित देश, जनहित एवं लोकतंत्र से जुड़े मामलों में जो किस्म-किस्म की बातें देश में चल रही हैं उन संदेहों को अवश्य ही यथाशीघ्र दूर किया जाए तो यह बेहतर होगा।
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ब्रिक्स देश ब्राज़ील की तरह ही भारत पर भी कुल मिलाकर 50 प्रतिशत का भारी भरकम टैरिफ (शुल्क) लगाकर अमेरिका ने जो भारत को आघात पहुँचाने का प्रयास किया है, उसे भारत सरकार ने अपने संयमित बयान में ’अनुचित, अन्यायपूर्ण व अविवेकी’ बताया है, किन्तु देश की जनता डोनाल्ड ट्रम्प का ’मित्र’ देश भारत के प्रति इसे प्रथम दृष्टया विश्वासघाती एवं देश को कमज़ोर करने वाला कदम ज़्यादा मानती है, जिससे निपटने के लिए सभी को पूरी परिपक्वता दिखाते हुये राजनीतिक स्वार्थ, संकीर्णता, मतभेद एवं द्वेष आदि से ऊपर उठकर, दीर्घकालीन रणनीति के तहत्, देश में पूरे अमन-चैन और कानून व्यवस्था के अच्छे माहौल के साथ पूरी मुस्तैदी से कार्य करना ज़रूरी है।
देश के सामने आई इस बड़ी चुनौती पर गंभीर चिन्तन के लिए सम्बंधित विषय पर वर्तमान संसद सत्र में चर्चा हो तो यह जन व देशहित में बेहतर होगा, किन्तु केन्द्र व राज्य सरकारें अगर आन्तरिक संकीर्ण मुद्दों में ही अधिकतर उलझी रहेंगी तो यह कैसे संभव हो पायेगा?
वैसे इस बारे में यहाँ उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी. की राजनीति हमेशा से देश के मानवतावादी संविधान की मंशा के मुताबिक ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की रही है, किन्तु यहाँ देश में केन्द्र व राज्य सरकारों के बीच आपसी अविश्वस के कारण जो राजनीतिक टकराव और खींचतान आदि लगातार बनी हुई है वह अब समाप्त होना चाहिए, यही व्यापक जन व देशहित में है।
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जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) ना तो बीजेपी के एनडीए गठबंधन के साथ है और ना ही कांग्रेस के इण्डिया समूह (गठबंधन) के साथ है, तथा, ना ही अन्य किसी और भी फ्रन्ट के साथ है, बल्कि इन दोनों व अन्य और किसी भी जातिवादी गठबंधनों से अलग अपनी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के अम्बेडकरवादी सिद्धान्त व नीति पर चलने वाली पार्टी है।
लेकिन इसके बावजूद भी ख़ासकर दलित, आदिवासी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विरोधी तथा इन वर्गों के प्रति जातिवादी मानसिकता रखने वाले कुछ मीडिया बी.एस.पी. की इमेज को बीच-बीच में धूमिल करने व राजनीतिक नुक़सान पहुँचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं, जिसको लेकर पार्टी को लगातार अपने लोगों को इनसे सतर्क करते रहने की ज़रूरत पड़ती रहती है।
इस क्रम में अभी हाल में ’भारत समाचार’ ने अपने यूट्यूब चैनल में ’’बीजेपी के साथ आ गयी मायावती कर दिया बड़ा ऐलान?’’ इस शीर्षक से गलत, तथ्यहीन व विषैली ख़बर चलायी है, जबकि उसके भीतर न्यूज़ में कुछ और है।
इस प्रकार से भारत समाचार चैनल द्वारा पार्टी की इमेज को ख़ासकर चुनाव के पूर्व इस प्रकार का आघात पहुँचाने का जो यह घिनौना प्रयास किया गया है उसकी जितनी भी निन्दा व भर्त्सना की जाये, वह कम है। चैनल को इसके लिए माफी भी ज़रूर माँगनी चाहिये।
साथ ही, पार्टी के लोगों से यह विशेष आग्रह है कि वे राजनीतिक षडयंत्र के तहत् मीडिया के इस प्रकार के घिनौने हथकण्डों से हमेशा ज़रूर सावधान रहें और किसी के भी बहकावे में ना आये, क्योंकि जातिवादी तत्व अपने अम्बेडकरवादी कारवाँ को कमज़ोर करने के घिनौने षडयंत्र में हमेशा किसी ना किसी रूप में लगे रहते हैं।
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झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक एवं आदिवासी समाज के जाने-माने दिग्गज नेता श्री शिबू सोरेन का आज इलाज के दौरान निधन हो जाने की ख़बर अति-दुखद। उनके पुत्र तथा वर्तमान में झारखण्ड के मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन व उनके परिवार के साथ-साथ उनके समस्त समर्थकों एवं अनुयाइयों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कु़दरत उन सबको इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।
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BSP రాష్ట్ర కార్యవర్గ సభ్యులు గౌరవ బొల్లంపల్లి సారయ్య గారు గత మూడు వారాల క్రితం కోమాలోకి వెళ్లి కిమ్స్ హాస్పటల్లో చికిత్స పొందుతూ గత రాత్రి 12 గంటల సమయములో తుది శ్వాస విడిచారని తెలుపుటకు చింతిస్తున్నాను. ఈ దుఃఖ సమయంలో వారి సతీమణికి మరియు కుటుంబ సభ్యులకు నా యొక్క ప్రగాఢ సంతాపం తెలియజేస్తున్నాను. కీ.శే.సారయ్య గారు లేని లోటును తట్టుకునే శక్తి ప్రకృతి వారి కుటుంబ సభ్యులకు ప్రసాదిస్తుంది అని మనసారా ఆకాంక్షిస్తున్నాను.

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा यह स्वीकार करना कि देश के विशाल आबादी वाले अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) समाज के लोगों की राजनीतिक व आर्थिक आशा, आकांक्षा व आरक्षण सहित उन्हें उनका संवैधानिक हक़ दिलाने के मामलों में कांग्रेस पार्टी खरी व विश्वासपात्र नहीं रही है कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह दिल में कुछ व जुबान पर कुछ और जैसी स्वार्थ की राजनीति ज़्यादा लगती है।
वास्तव में उनका यह बयान उसी तरह से जगज़ाहिर है जैसाकि देश के करोड़ों शोषित, वंचित व उपेक्षित एससी/एसटी समाज के प्रति कांग्रेस पार्टी का ऐसा ही दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण रवैया लगातार रहा है और जिस कारण ही इन वर्गों के लोगों को फिर अन्ततः अपने आत्म-सम्मान व स्वाभिमान तथा अपने पैरों पर खड़े होने की ललक के कारण अलग से अपनी पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) यहाँ बनानी पड़ी है।
कुल मिलाकर इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी यूपी सहित देश के प्रमुख राज्यों की सत्ता से लगातार बाहर है और अब सत्ता गंवाने के बाद इन्हें इन वर्गों की याद आने लगी है जिसे इनकी नीयत व नीति में हमेशा खोट रहने की वजह से घड़ियाली आँसू नहीं तो और क्या कहा जाएगा, जबकि वर्तमान हालात में बीजेपी के एनडीए का भी इन वर्गों के प्रति दोहरे चरित्र वाला यही चाल-ढाल लगता है।
वैसे भी एससी/एसटी वर्गों को आरक्षण का सही से लाभ व संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को भारतरत्न की उपाधि से सम्मानित नहीं करने तथा देश की आज़ादी के बाद लगभग 40 वर्षों तक ओबीसी वर्गों को आरक्षण की सुविधा नहीं देने तथा सरकारी नौकरियों में इनके पदों को नहीं भरकर उनका भारी बैकलॉग रखने आदि के जातिवादी रवैयों को भला कौन भुला सकता है, जो कि इनका यह अनुचित जातिवादी रवैया अभी भी जारी है।
इतना ही नहीं बल्कि इन सभी जातिवादी पार्टियों ने आपस में मिलकर एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण को किसी ना किसी बहाने से एक प्रकार से निष्क्रिय एवं निष्प्रभावी ही बना दिया है। इस प्रकार दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़ों इन बहुजन समाज को सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक तौर पर गुलाम व लाचार बनाए रखने के मामलों में सभी जातिवादी पार्टियाँ हमेशा से एक ही थैली के चट्टे-बट्टे रहे हैं,
जबकि अम्बेडकरवादी पार्टी बी.एस.पी. सदा ही इन वर्गों की सच्ची हितैषी रही है और यूपी में चार बार बी.एस.पी. के नेतृत्व रही सरकार में सर्वसमाज के ग़रीबों, मज़लूमों के साथ-साथ बहुजन समाज के सभी लोगों के जान-माल व मज़हब की सुरक्षा व सम्मान तथा इनके हित एवं कल्याण की भी पूरी गारण्टी रही है।
अर्थात् देश के बहुजनों का हित केवल बी.एस.पी. की आयरन गारण्टी में ही निहित है। अतः ख़ासकर दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी समाज) के लोग ख़ासकर कांग्रेस, सपा आदि इन विरोधी पार्टियों के किसी भी बहकावे में नहीं आयें, यही उनकी सुख, शान्ति व समृद्धि हेतु बेहतर है।
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देश के कानून मंत्री का कल संसद में दिया गया बयान कि संविधान की प्रस्तावना से ’सेक्युलरिज़्म’ (धर्मनिरपेक्षता) आदि शब्द हटाने सम्बंधी सरकार की ना कोई नीयत है और ना ही ऐसा कुछ विचाराधीन है, यह उचित एवं सराहनीय है तथा ख़ासकर हमारी पार्टी बी.एस.पी. सहित देश व दुनिया भर में उन सभी लोगों के लिए राहत की ख़बर है व अच्छा आश्वासन है जो परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के संविधान में इस प्रकार के किसी भी अनुचित बदलाव या छेड़छाड़ के पूरी तरह विरुद्ध हैं तथा ऐसी उठने वाली ग़लत माँग को लेकर चिन्तित भी थे।
वैसे भी यह सर्वविदित है कि अपना भारत देश हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध व पारसी आदि विभिन्न धर्मों के मानने वाले लोगों का विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है तथा संविधान के ज़रिए विविधता में एकता की विशेषता इसकी बेमिसाल पहचान दुनिया भर में है। सभी धर्मों के मानने वाले लोगों को एक समान आदर-सम्मान देने व समतामूलक समाज व्यवस्था आदि की सोच को लेकर ही बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने संविधान रचा और जिसकी झलक संविधान में हर कदम पर मिलती है।
केन्द्र सरकार ने संविधान को लेकर ताज़ा विवाद के सम्बंध में संविधान की पवित्र मंशा के हिसाब से अपनी स्थिति स्पष्ट की है, यह अच्छी बात है तथा सरकार बिना किसी की परवाह व चिन्ता किये हुए अपने इस स्टैण्ड पर कायम रहेगी, ऐसी देश की चाहत व उम्मीद भी है।
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BSP TG State President Manda Prabhakar with Hon'ble Bahan Kum.Mayawati ji on 13.07.2025 in Lucknow. Thank you very much to the National Coordinator Shri.Rajaram ji Ex.MP (R.S) and the Central State Coordinator Shri.Atar Singh Rao ji Ex(MLC)
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वैसे तो बिहार में ख़ासकर दलितों, अति-पिछड़ों, शोषितों, ग़रीबों और उनकी महिलाओं आदि के विरुद्ध जुल्म-ज्यादती, हत्या एवं जातिवादी शोषण तथा इन वर्गों के लोगों को उनके हक़ से वंचित रखने के मामले हमेशा काफी चर्चा का विषय रहे हैं, लेकिन राज्य में विधानसभा आमचुनाव से पहले हिसंक वारदातों व हत्याओं के जारी रहने के क्रम में शासित दल भाजपा के ही एक प्रमुख उद्योगपति व नेता श्री गोपाल खेमका की राजधानी पटना में हाल में हुई सनसनीखेज़ हत्या ने राज्य में कानून व्यवस्था की बदहाल स्थिति के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति को भी नये तरीके से गर्मा दिया है, जिस खून-खराबे के सम्बंध में चुनाव आयोग अगर अभी से ही संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करे तो यह शान्तिपूर्ण चुनाव संचालन हेतु बेहतर होगा।
बिहार में चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण के दौरान यह सब हिंसक घटनाक्रम किसके द्वारा किसके स्वार्थ की पूर्ति के लिए किया जा रहा है, इसको लेकर ना केवल राज्य की गठबंधन सरकार कठघरे में है, बल्कि इसको लेकर राजनीति काफी गर्म है कि आगे चलकर राज्य के राजनीतिक समीकरण व चुनाव पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह देखने वाली बात है।
वैसे हमारी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.), विशेषकर दलितों, अन्य पिछड़ों, वंचितों, शोषितों, ग़रीबों व मज़दूरों आदि बहुजनों की पार्टी है जो अपने कैडर व शुभचिन्तकों के तन, मन, धन के बूते पर राजनीति करने के सिद्धान्त व नीति के तहत् बिहार विधानसभा का आमचुनाव अकेले अपने बलबूते पर लड़ रही है, और इसीलिए चुनाव आयोग से अपील है कि बिहार चुनाव को सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के साथ-साथ बाहूबल, धनबल व अपराध बल आदि से मुक्त कराने के लिए जो भी सख़्त कदम उठाने की ज़रूरत हो तो वह समय से अवश्य उठाए ताकि चुनाव अभियान स्वतंत्र व निष्पक्ष साबित हो।
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बिहार के प्रसिद्ध पटना विश्वविद्यालय के पाँच प्रतिष्टित कालेजों में ’लाटरी’ की नई व्यवस्था के तहत् प्रिन्सिपलों की नियुक्ति का मामला दिलचस्प होने के कारण देश भर में ख़ासकर मीडिया व शिक्षा जगत में काफी चर्चाओं में है।
स्थापित परम्परा से हटकर, ’लाटरी’ के ज़रिए नियुक्ति की एक प्रकार से विचित्र व्यवस्था लागू करने के कारण केवल कला (आर्ट्स) विषयों की पढ़ाई वाले 1863 में स्थापित पटना कालेज में कैमिस्ट्री के प्राध्यापक प्रो. अनिल कुमार प्राचार्य बन गये हैं, जबकि बिहार विश्वविद्यालय में गृह विज्ञान की प्राचार्य प्रो. अल्का यादव विज्ञान की उच्च शिक्षा के लिए प्रख्यात पटना साइन्स कालेज की नयी प्रिन्सिपल नियुक्त हुयी हैं।
इतना ही नहीं बल्कि इसी प्रकार की नियुक्ति वाणिज्य महाविद्यालय में भी हुई है। यहाँ पहली बार कला संकाय की महिला प्राध्यापक डा सुहेली मेहता प्राचार्य बनी हैं, हालाँकि उनके विषय की पढ़ाई यहाँ इस कालेज में नहीं होती है।
साथ ही, महिला शिक्षा जगत में प्रसिद्ध मगध महिला कालेज को लम्बे इतिहास में दूसरी बार पुरुष प्रिन्सिपल मिले हैं। प्रो. एन. पी. वर्मा यहाँ के नये प्राचार्य होंगे जबकि प्रो. योगेन्द्र कुमार वर्मा की लाटरी पटना लॉ कालेज के प्रिन्सिपल के रूप में निकली है।
इसको लेकर लोगों में उत्सूकता है कि ’पारदर्शिता व तटस्था’ के नाम पर बिहार सरकार व वहाँ के चांसलर द्वारा इस प्रकार लाटरी के माध्यम से की गयी प्रिन्सिपल की नियुक्तियों को सही ठहरा कर क्या इस व्यवस्था को भाजपा-शासित अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा?
वास्तव में कालेजों के प्रिन्सिपल जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी पूरी पारदर्शिता, तटस्था व ईमानदारी के साथ नियुक्ति नहीं कर पाने की अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ही ऐसा घातक प्रयोग करना लोगों की नज़र में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुधार का कम तथा खराब करने वाला ज़्यादा प्रतीत होता है।
इसी प्रकार, इसी परम्परा को अपना कर आगे चलकर मेडिकल कालेजों, आईआईटी व अंतरिक्ष विज्ञान आदि जैसी सांइस की उच्च व विशिष्ठ संस्थाओं में भी गै़र-एक्सपर्ट नियुक्त किये जायें तो यह ताज्जुब की बात नहीं होनी चाहिए।
वैसे हमारी पार्टी का यह मानना है कि किसी भी विशिष्ठ क्षेत्र में इस प्रकार की मनमानी वाला विकृत प्रयोग ना किया जाये तो उचित। और इससे पहले कि यह रोग गंभीर होकर और ज़्यादा फैले केन्द्र की सरकार को इसका उचित व समुचित संज्ञान लेकर जन व देशहित में जितनी जल्द कार्रवाई करे उतना बेहतर, ऐसी सभी को उम्मीद।
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राजा महेन्द्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ़ से सम्बद्ध कई जिलों के दर्जनों कालेजों के हजारों एससी/एसटी वर्ग के छात्र व छात्राओं की छात्रवृत्ति का सरकारी स्तर पर अब तक सही से समय पर निपटारा नहीं होने के कारण उनके भविष्य के अधर में लटकने के खतरे से लोगों में भारी बेचैनी व आक्रोश व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय व जिला प्रशासन द्वारा भी इस सम्बंध में बार-बार पत्राचार के बावजूद लखनऊ स्थित समाज कल्याण विभाग स्तर पर असंवेदनशीलता व लापरवाही बरतने का परिणाम है कि लगभग 3,500 दलित छात्र व छात्राओं के शिक्षण जीवन पर भारी खतरा मंडरा रहा है।
चूँकि माननीय मुख्यमंत्री जी के विशेष प्रयासों से ही अलीगढ़ का उक्त विश्वविद्यालय स्थापित हुआ है, इसके सुचारु संचालन में भी सही रूचि लेकर ख़ासकर हजारों दलित छात्र/छात्राओं की इस गंभीर समस्या का समाधान वे तत्काल ज़रूर निकालेंगे, ऐसी उम्मीद।
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