

Bharatiya Vichar Manch
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@bvmgujarat
आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः https://t.co/hgwd26VnmH https://t.co/1QRwYpKzD2























भारतीय विचार मंच एवं गुजरात यूनिवर्सिटी द्वारा “भारत की वैश्विक भूमिका : कल, आज और कल” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी भारतीय विचार मंच एवं गुजरात यूनिवर्सिटी द्वारा “भारत की वैश्विक भूमिका : कल, आज और कल” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन कर्णावती, 16 फरवरी 2026: भारतीय विचार मंच द्वारा “भारत की वैश्विक भूमिका : कल, आज कल” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन आज अटल–कलाम रिसर्च पार्क, गुजरात विश्वविद्यालय में किया गया। देश के विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों, शोधकर्ताओं और प्रबुद्धजनों ने उपस्थित रहकर भारत के वैश्विक दृष्टिकोण पर विचारमंथन किया। संगोष्ठी की शुरुआत में गुजरात विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति डॉ. नीरजा गुप्ता द्वारा प्रस्तावना प्रस्तुत की गई। उन्होंने कहा कि भारत का मूलभूत विचार “राष्ट्र को स्वस्थ और समृद्ध बनाकर विश्व के कल्याण की दिशा में आगे बढ़ना” है। भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि विश्व को दिशा देने वाली विचारधारा है, ऐसा उन्होंने जोर देकर कहा। इस अवसर पर श्री प्रशांत पोल द्वारा लिखित “इंडिया से भारत यात्रा” तथा श्री जे. नंदकुमार द्वारा लिखित “नेशनल सेल्फहुड इन साइंस” पुस्तकों का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख श्री सुनीलभाई मेहता तथा पुनरुत्थान विद्यापीठ की कुलाधिपति सुश्री इंदुमतीबेन काटदरे द्वारा किया गया। इसके बाद श्री सुनीलभाई मेहता ने अपने प्रासंगिक उद्बोधन में कहा कि भारत विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति वाला देश है और सामाजिक व्यवस्था, धर्म की अवधारणा, ज्ञान परंपरा तथा परिवार प्रणाली जैसे क्षेत्रों में भारत अद्वितीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “धर्म” और “रिलिजन” समान नहीं हैं और भारत का मूल स्वभाव मानवतावादी है। यदि भारत विश्वगुरु बनेगा तो दुनिया को उसमें कोई आपत्ति नहीं होगी। पुनरुत्थान विद्यापीठ की कुलाधिपति सुश्री इंदुमतीबेन काटदरे ने बीज वक्तव्य में “भारतीय अध्यात्म – वैश्विक शांति और मानव कल्याण का आधार” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि जब भारत जीतता है तो कोई पराजित नहीं होता, बल्कि विश्व उन्नत होता है। पश्चिमीकरण को आधुनिकता मानने की मानसिकता गलत है और वास्तविक विकास वही है जिसमें सुख, समृद्धि, ज्ञान, संस्कार–संस्कृति और शांति — ये पाँचों तत्व सभी के लिए उपलब्ध हों। भारत की पहचान एक आध्यात्मिक देश के रूप में है, ऐसा उन्होंने जोड़ा। मेजर जनरल डॉ. एस. बी. अस्थाना ने “भारत की रक्षा नीति : क्षेत्रीय सुरक्षा से वैश्विक स्थिरता तक” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारत की भौगोलिक सुरक्षा दृष्टि, सैन्य क्षमता, हार्ड पावर–सॉफ्ट पावर–स्मार्ट पावर जैसे विषयों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। भारत के अतीत और वर्तमान युद्धों, कूटनीति तथा पाकिस्तान, चीन और अमेरिका सहित अन्य देशों के साथ संबंधों के परिप्रेक्ष्य में भारत की रणनीति पर भी उन्होंने मार्गदर्शन दिया। “ज्ञान, शक्ति और तकनीक : भारत का वैश्विक मॉडल” विषय पर विख्यात बेस्टसेलर लेखक श्री प्रशांत पोल ने मार्गदर्शन प्रदान किया। “भारत सेंट्रिक करिकुलम : औपनिवेशिक ज्ञान से मुक्ति की दिशा” विषय पर गुजरात विश्वविद्यालय की कुलपति सुश्री डॉ. नीरजा गुप्ता जी का उत्तम वक्तव्य हुआ। अंत में प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्री जे. नंदकुमार ने “सभ्यता से रणनीति तक : भारतीय विचार और वैश्विक शक्ति की संरचना” विषय पर समापन भाषण दिया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन ने भारत की वैश्विक भूमिका, सांस्कृतिक शक्ति, आध्यात्मिक मूल्यों और सुरक्षा दृष्टिकोण पर सकारात्मक चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी महानुभावों के प्रति आयोजकों ने आभार व्यक्त किया। इस संगोष्ठी में कुल मिलाकर कुल 450 से अधिक प्रबुद्धजन जिसमें 100 से अधिक महिला सहभागियों तथा 110 से अधिक डॉक्टरेट प्राप्त और शोधार्थी सहभागी हुए। साथ ही गुजरात के प्रत्येक जिले तथा राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों से भी प्रबुद्धजन उपस्थित होकर विचार-विमर्श में सहभागी बने। @gujuni1949 @kumarnandaj @sanjaymsraval @NeerjaGuptaa @asthana_shashi @prashantpole @PunarutthanV #NationalSeminar #Bharat #GlobalRole #trendingvideo








